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अगर ज़करबर्ग ये केस हारे तो इंस्टाग्राम और फे़सबुक हमेशा के लिए बदल सकते हैं

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Source :- BBC INDIA

मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क ज़करबर्ग ने गहरे नीले रंग का सूट और गहरे लाल रंग की टाई पहनी हुई है.

इमेज स्रोत, Getty Images

हाल के सालों में मेटा को अदालतों में लगातार हार का सामना करना पड़ा है. अदालतों ने कहा है कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स ने यंग यूज़र्स (युवा उपयोगकर्ताओं) को नुक़सान पहुंचाया है.

लेकिन मंगलवार से शुरू होने वाला जूरी ट्रायल मेटा के लिए अब तक का सबसे बड़ा ख़तरा साबित हो सकता है.

2023 में कैलिफोर्निया और न्यूयॉर्क समेत 30 अमेरिकी राज्यों ने मेटा पर एक मुकदमा दायर किया था. ये केस उसी से जुड़ा है. इन राज्यों ने आरोप लगाया है कि मेटा ने बच्चों से जुड़े फ़ेडरल और स्टेट के क़ानूनों का उल्लंघन किया है और उनकी प्राइवेसी को ख़तरे में डाला है.

ये राज्य न केवल मेटा से 1 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा की मांग कर रहे हैं, बल्कि वे इंस्टाग्राम और फ़ेसबुक में बदलाव करने की भी मांग कर रहे हैं, जिसमें “लाइक” काउंट और लगातार स्क्रॉल को ख़त्म करना शामिल है.

अगर मेटा इस तरह के बड़े मामले में हार जाती है, तो युवाओं का सोशल मीडिया एक्सपीरिएंस हमेशा के लिए बदल सकता है.

मेटा पर मुक़दमा करने वाले राज्य इंस्टाग्राम और फेसबुक ऑपरेशन के तरीके में और बदलाव की मांग कर रहे हैं ताकि वो कम उम्र के यूज़र्स और बच्चों के लिए सेफ़ बन सके.

इन राज्यों की मांग है कि

  • किशोर यूज़र्स के मां-बाप के वेरिफ़िकेशन की प्रक्रिया लागू की जाए
  • इसके एल्गोरिदम को बदला जाए ताकि यूज़र्स लगातार कई घंटों तक इसे स्क्रॉल ना करते रहें
  • ऐसे कई इमेज फिल्टर हटाएँ जो तस्वीरों में व्यक्ति के लुक को बदल देते हैं
  • वीडियो कंटेंट से ऑटो प्ले फ़ीचर हटाएं
  • एक से ज़्यादा अकाउंट बनाने पर रोक लगाएं
  • इंस्टाग्राम स्टोरीज़ जैसी गायब होने वाली या “अस्थायी” पोस्ट को बंद करें

ये सभी फ़ीचर्स वर्तमान में मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के बेहद अहम फ़ीचर माने जाते हैं.

राज्यों का कहना है कि इन फ़ीचर्स को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि बच्चे, किशोर और बाक़ी यूज़र्स भी ज़्यादा से ज़्यादा समय तक प्लेटफ़ॉर्म पर बने रहें.

उनका दावा है कि मेटा ऐप युवाओं को नोटिफिकेशन जैसी चीज़ों के ज़रिए उन्हें बार-बार इन पर वापस आने के लिए मजबूर करता है.

आरोप है कि मेटा ने बच्चों को टारगेट करके, युवाओं का शोषण किया ताकि वे उसके प्लेटफॉर्म से जुड़कर अपना यूज़र बेस बढ़ा सकें और अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकें. आज, शेयर बाज़ार में मेटा का मूल्य लगभग 1.5 ट्रिलियन डॉलर है.

मेटा ने लगातार ऐसे दावों का खंडन किया है.

कंपनी के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “हम इन आरोपों से पूरी तरह असहमत हैं और हमें विश्वास है कि सबूत युवाओं का समर्थन करने के प्रति हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाएंगे.”

राज्य अपने दावों को कैलिफोर्निया की मुख्य संघीय न्यायाधीश यवोन गोंज़ालेज़ रोजर्स के समक्ष रख रहे हैं. वह हाई-प्रोफाइल एलन मस्क बनाम सैम ऑल्टमैन मुक़दमे की न्यायाधीश थीं और लगभग 20 वर्षों के अपने कार्यकाल में वो साफ़गोई के लिए जानी जाती हैं.

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सोशल मीडिया ‘सार्वजनिक परेशानी’ बना

मेटा के ख़िलाफ़ हाल ही में दिए गए एक फै़सले में, न्यू मैक्सिको के एक न्यायाधीश ने कंपनी पर क़रीब 94.2 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया और उसे अपने प्लेटफॉर्म में कुछ उसी तरह के बदलाव करने का आदेश दिया था जैसे बदलावों की मांग ये 30 राज्य कर रहे हैं.

जज ब्रायन बीडशाइड ने अपने आदेश में कहा कि इंस्टाग्राम और फेसबुक 18 वर्ष से कम उम्र के यूज़र्स के लिए लाइक काउंट को समाप्त करें, किशोरों के प्लेटफार्मों के ज़रिए न्यूड कंटेट भेजने पर रोक लगाएं और ऐप्स से पुश नोटिफिकेशन को दिन के कुछ निश्चित घंटों तक सीमित करें.

न्यायाधीश ने मेटा को एक पब्लिक न्यूसेंस (सार्वजनिक उपद्रव) घोषित किया, जो एक ऐसी फ़ैक्ट्री की तरह है जो हवा को प्रदूषित कर रही है, जिससे लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है. मेटा ने कहा कि वह इस फै़सले के ख़िलाफ़ अपील करेगी.

हालांकि जज बीडशाइड के आदेश में मेटा को केवल न्यू मैक्सिको में बदलाव करने की मांग की गई है, लेकिन अगर 30 राज्य मेटा के ख़िलाफ़ अपने अलग मुक़दमे में जीत हासिल करते हैं, तो मेटा को लगभग निश्चित रूप से पूरे अमेरिका में प्लेटफॉर्म में बदलाव करने की ज़रूरत होगी.

इस मुक़दमे में शामिल राज्य देश की लगभग दो-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं.

अगर मेटा इस तरह के बदलाव लागू करता है, तो यह उसके यूज़र्स के प्लेटफॉर्म एक्सपीरिएंस में बड़ा बदलाव होगा.

हाथों में रंगीन बैंड्स पहने एक किशोरी बाहर बैठी अपने आईफोन को देख रही है.

इमेज स्रोत, Reuters

‘लाइक्स’ को लेकर सवाल

उदाहरण के लिए, “लाइक” की संख्या मेटा का शुरुआती वर्षों से ही हिस्सा रही है, जब इसे फ़ेसबुक ही कहा जाता था और वही इसका एकमात्र प्लेटफॉर्म था.

आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइक्स हर जगह हैं. ऑनलाइन देखे जाने वाले टेक्स्ट, फोटो और वीडियो के साथ जुड़ने का ये मुख्य तरीका है.

फिर भी, लाइक को तेज़ी से निगेटिव फ़ीलिंग्स (नकारात्मक भावनाओं) को बढ़ावा देने के एक तरीके के रूप में देखा जा रहा है, खासकर युवाओं के बीच.

कैली नाम की एक युवा यूज़र ने इस साल की शुरुआत में मेटा के ख़िलाफ़ अपने मुक़दमे में जीत हासिल की थी. कैली ने अदालत में गवाही के दौरान बताया कि उन्होंने यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर दर्जनों अकाउंट्स कैसे बनाए थे.

वह अपने पोस्ट पर लाइक पाने के लिए अकाउंट सिस्टम का इस्तेमाल करती थी, ताकि दूसरे यूज़र्स से जुड़ सके और खुद को संतुष्टि और आत्मसम्मान का एहसास हो सके. उस समय कैली सिर्फ़ नौ साल की थीं. उन्होंने बताया कि उन्हें याद है कि वह डिप्रेशन से जूझ रही थीं. बाद में उन्होंने इससे छुटकारा पाया.

पिछले कई वर्षों के शोध से पता चला है कि लाइक काउंट जैसे एंगेजमेंट मेट्रिक्स किशोरों में रिजेक्शन (अस्वीकृति) और डिप्रेशन (अवसाद) की भावनाओं को बढ़ा सकते हैं.

राज्यों के मेटा के ख़िलाफ़ दायर मुक़दमे में, कंपनी ने कहा है कि उसने 20 लाख से अधिक दस्तावेज़ सौंपे हैं. लेकिन वकीलों ने मेटा के अपने शोध की ओर इशारा किया, जिसमें दिखाया गया कि लाइक्स वगैरह की संख्या बेवजह तुलना को बढ़ावा देती है और मानसिक सेहत पर बुरा असर डालती है.

मेटा की अपनी रिसर्च के मुताबिक़, इंस्टाग्राम यूज़र्स दूसरों से अपनी तुलना करते हैं जिसकी वजह से लोगों में अकेलापन बढ़ा, अपने शरीर को लेकर असंतोष बढ़ा और मूड भी ख़राब हुआ.

जज बीडशाइड ने अपने आदेश में कहा कि न्यू मैक्सिको और दूसरी जगहों पर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संकटों की एक बड़ी वजह ये सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भी रहे.

अब 30 और राज्यों के वकील जज गोंज़ालेज़ रोजर्स पर उसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दबाव डालेंगे.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS