Source :- LIVE HINDUSTAN
Gautam Adani US Case: अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में मंगलवार को तेजी देखने को मिली। अमेरिका की एक अदालत द्वारा अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज करने के बाद निवेशकों की धारणा में सुधार हुआ। खबर सामने आने के बाद अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, अडानी पावर, अडानी ग्रीन एनर्जी, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी टोटल गैस समेत ग्रुप की कई कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ी। शुरुआती कारोबार में कुछ शेयरों में करीब 3% तक की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि अदालत द्वारा मामले को खारिज किया जाना अपने आप में आरोपों की सत्यता या मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम फैसला नहीं माना गया है। अमेरिकी जज ने भी स्पष्ट किया कि उनका आदेश अमेरिकी न्याय विभाग की कार्रवाई का समर्थन या आरोपों के सही होने पर कोई निष्कर्ष नहीं है।
अडानी ग्रुप के शेयरों में आई तेजी
बाजार में खबर का असर सबसे ज्यादा अडानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर में देखने को मिला। शेयर करीब 3% चढ़कर 3,080 रुपये तक पहुंच गया। वहीं अडानी पावर में करीब 2% की तेजी के साथ शेयर 214 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। अडानी पोर्ट्स में भी 1% से ज्यादा की बढ़त रही और शेयर करीब 1,704 रुपये तक पहुंच गया। अडानी ग्रीन एनर्जी में 3% से अधिक की तेजी दर्ज की गई और शेयर करीब 1,416 रुपये तक पहुंचा। इसके अलावा अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस और अडानी टोटल गैस में भी करीब 3% तक की तेजी देखने को मिली। इस तरह अमेरिका से आई कानूनी खबर ने पूरे अडानी ग्रुप के शेयरों में सकारात्मक माहौल बनाया।
क्या है पूरा मामला?
मामला अमेरिका के ब्रुकलिन स्थित अमेरिकी जिला अदालत से जुड़ा है। अमेरिकी जिला जज निकोलस गाराउफिस ने संघीय अभियोजकों की उस मांग को मंजूरी दी, जिसमें गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक मामला खारिज करने का अनुरोध किया गया था। जज ने इस अनुरोध को मंजूर करने से पहले यह भी जांच की कि अभियोजन पक्ष मामले को खत्म क्यों करना चाहता है। इस प्रक्रिया के दौरान उन्होंने इस सवाल पर भी गौर किया कि नवंबर 2024 में अडानी द्वारा अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता का मामले को खत्म करने के फैसले पर कोई प्रभाव पड़ा था या नहीं। जज ने कहा कि उन्हें इस बात का संतोष है कि अमेरिका में निवेश की यह प्रतिबद्धता न्याय विभाग के मामले को खत्म करने के निर्णय को प्रभावित करने वाली वजह नहीं थी।
हालांकि, जज गाराउफिस ने न्याय विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैककॉट्टर के काम करने के तरीके पर सवाल उठाया। रिपोर्ट के अनुसार, मैककॉट्टर ने अडानी के बचाव पक्ष के वकीलों के साथ मामले को खत्म करने के फैसले पर बातचीत की, लेकिन इस प्रक्रिया में उन अभियोजकों और जांच एजेंसियों के विचार नहीं लिए गए, जिन्होंने मूल मामले की जांच की थी। न्याय विभाग की ओर से 4 जुलाई को दाखिल दस्तावेज में कहा गया था कि मैककॉट्टर ने अडानी के बचाव पक्ष के वकीलों से मुलाकात की, न्याय विभाग के अन्य वकीलों से सलाह ली और अपनी रिसर्च तथा विश्लेषण के आधार पर मामले को खत्म करने का फैसला किया।
अदालत के फैसले का स्वागत
गौतम अडानी ने अदालत के फैसले का स्वागत किया। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वह इस फैसले को विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वीकार करते हैं। लेकिन निवेशकों के लिए जज की एक अहम टिप्पणी को समझना जरूरी है। जज ने साफ कहा कि मामले को खारिज करने के उनके फैसले को अमेरिकी न्याय विभाग की कार्रवाई का समर्थन नहीं माना जाना चाहिए। साथ ही यह भी नहीं समझा जाना चाहिए कि अदालत ने आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दे दी है। जज ने अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले को खारिज करने से पहले न्याय विभाग से अतिरिक्त जानकारी देने को भी कहा है।
नवंबर 2024 में लगाए गए थे आरोप
दरअसल, गौतम अडानी और मामले से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ नवंबर 2024 में अमेरिका में आरोप लगाए गए थे। आरोपों के अनुसार, अडानी पर एक अडानी ग्रुप की कंपनी को सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट विकसित करने की मंजूरी हासिल करने में मदद के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने पर सहमति जताने का आरोप था। इसके अलावा उन पर अमेरिकी निवेशकों को कंपनी की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों को लेकर कथित रूप से भ्रामक जानकारी देने का आरोप भी लगाया गया था। अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया है।
अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में एक और महत्वपूर्ण पहलू है। अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारी मैककॉट्टर ने अपने दस्तावेज में कहा कि मामला मुख्य रूप से विदेशी गतिविधियों से जुड़ा था, इसे साबित करना मुश्किल था और यह न्याय विभाग की मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था। हालांकि, अडानी की ओर से अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश की घोषणा को लेकर भी सवाल उठे। अडानी ने 15 जुलाई को दाखिल एक शपथपत्र में स्वीकार किया कि उन्होंने पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई थी। उनके वकीलों ने न्याय विभाग के साथ हुई बातचीत में यह भी कहा था कि यह निवेश प्रतिबद्धता मामले के समाधान का हिस्सा हो सकती है। जज ने इस तरह की पेशकशों की उपयुक्तता पर कोई राय नहीं दी, लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसे प्रस्तावों का न्याय के समान प्रशासन और कानून के शासन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, इसका फैसला जनता को करना है।
भतीजे सागर अडानी से भी जुड़ा है मामला
इस मामले से जुड़ी कुछ अन्य वित्तीय कार्रवाइयां भी अलग से हुई हैं। अमेरिका के SEC (Securities and Exchange Commission) द्वारा लाए गए सिविल मामले के समाधान के तहत गौतम अडानी ने 60 लाख डॉलर और उनके भतीजे सागर अडानी ने 1.2 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई। इसके अलावा अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान से जुड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन को लेकर अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ समझौते के तहत 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करने पर भी सहमति जताई है। ये मामले आपराधिक मामले से अलग हैं और इसलिए निवेशकों को इनके बीच अंतर समझना चाहिए।
शेयर बाजार के नजरिए से क्या?
शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो अमेरिकी अदालत का फैसला अडानी ग्रुप के शेयरों के लिए एक सकारात्मक सेंटीमेंट ट्रिगर है, क्योंकि इससे ग्रुप से जुड़े एक बड़े कानूनी जोखिम की धारणा में कमी आ सकती है। हालांकि, किसी भी शेयर की कीमत केवल एक खबर के आधार पर लंबे समय तक ऊपर रहे, यह जरूरी नहीं है। निवेशकों को कंपनियों के तिमाही नतीजे, कर्ज का स्तर, कैश फ्लो, कारोबार की वृद्धि, वैल्यूएशन और भविष्य की परियोजनाओं के साथ-साथ सभी कानूनी और नियामकीय घटनाक्रमों पर नजर रखनी चाहिए। इसलिए अदालत के फैसले के बाद आई तेजी को निवेश का सीधा संकेत मानने के बजाय इसे सेंटीमेंट में सुधार के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




