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अमेरिका-ईरान समझौते के आर्टिकल-5 में ऐसा क्या है, जिसपर भिड़ गए दोनों देश; फिर बने जंग के हालात

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मजु को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ता हुआ दिख रहा है। समझौते में आर्टिकल- 5 में होर्मजु से आवाजाही का जिक्र किया गया था। ईरान का कहना है कि अमेरिका अब आर्टिकल- 5 को भी नहीं मान रहा है।

होर्मुज में आवाजाही को लेकर अमेरिका और ईरान एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। दोनों एक दूसरे को तबाह करने की धमकी दे रहे हैं। इस टकराव की वजह बन रहा है यूएस-ईरान समझौते का आर्टिकल- 5. ईरान का कहना है कि वह इस आर्टिकल का पालन कर रहा है जबकि अमेरिका ही इसमें अपनी मर्जी से बदलाव चाहता है। वहीं अमेरिका का कहना है कि अगर ईरान होर्मुज में किसी जहाज पर हमला करता है तो उसपर सैन्य कार्रवाई करने से परहेज नहीं किया जाएगा। दोनों देशों के बीच 17 जून को समझौते पर साइन किए गए थे।

होर्मुज को लेकर टकराव

अमरिका और ईरान के बीच टकराव की मुख्य वजह अब परमाणु हथियार या फिर मिसाइलें नहीं बल्कि होर्मजु बन गया है। समंदर का यह संकरा रास्ता दुनियाभर के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी रास्ते से कुल तेल का पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद इसे बंद कर दिया गया था। इसके बाद दुनिया ऊर्जा संकट की ओर तेजी से बढ़ने लगी। अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के बाद फिर से आवाजाही को पहले की तरह बहाल करने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच शुक्रवार को होर्मुज में ईरान ने एक जहाज पर हमला कर दिया। हालांकि ईरान ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली।

आर्टिकल- 5 में क्या है?

अमेरिका-ईरान समझौते के आर्टिकल- 5 में होर्मुज से तुरंत कमर्शल शिप की आवाजाही शुरू करने की बात कही गई है। युद्ध शुरू होने के बाद सैकड़ों शिप होर्मुज के आसपास के इलाके में फंस गए थे। इस आर्टिकल में कहा गया है कि ईरान इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करेगा और 60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं लेगा। इसके अलावा 30 दिनों के भीतर सभी बारूदी सुरंगों को साफ किया जाएगा। इसमें यह भी कहा गया था कि ईरान ओमान की सरकार से बात करके होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था करे और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन ना हो।

ईरान ने जहाजों पर शुल्क लगाने की बात कही थी लेकिन अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इस आर्टिकल में यह भी कहा गया था कि सारी बाधाएं खत्म करने के बाद होर्मुज से पहले की तरह आवाजाही सुनिश्चित की जाए। ईरान का कहना है कि यह जिम्मेदारी उसकी है और इसमें किसी अन्य को दखल देने की जरूरत नहीं है। वहीं जब कुछ जहाजों को अमेरिका के इशारे पर ओमान तट के पास से गुजारा जाने लगा तो ईरान को यह रास नहीं आया।

क्या अमेरिका और ईरान निकाल रहे हैं अलग-अलग मतलब?

जिस तरह से आर्टिकल – 5 को लेकर टकराव हो रहा है उससे जानकारों को भी शंका है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि दोनों ही पक्ष इसका मतलब अलग-अलग निकाल रहे हों। अमेरिका इस समझौते का विरोध नहीं कर रहा है लेकिन वह अपने हिसाब से होर्मुज की व्यवस्था चाहता है। जबकि ईरान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि होर्मुज से आवाजाही की जिम्मेदारी उसकी होगी।

एक जानकार ने कहा कि जिस तरह से अमेरिका ने लेबनान के मामले में नए फ्रेमवर्क बना दिए उसी तरह वह आर्टिकल-5 को भी अपने हिसाब से डील करना चाहता है। तेहरान के राजनीतिक जानकार अबास असलानी ने कहा कि ईरान होर्मुज को अपनी ढाल के तौर पर देखता है। यह ईरान के लिए रणनीतिक अहमियत रखता है और अमेरिका को किसी बड़े हमले से रोक स कता है। विएना के एक रक्षा विशेषज्ञ वोल्फगैंग पुश्जताई ने कहा कि ईरान होर्मुज पर नियंत्रण चाहता है जबकि अमेरिका और अरब देश चाहते हैं कि होर्मजु से स्वतंत्र आवाजाही हो।

अमेरिका ओमान तट के पास से नए रूट से जहाजों की आवाजाही चाहता है। जबकि ईरान का कहना है कि नए रूट से जहाज नहीं जाएंगे। ईरान इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जहाजों को चेतावनी दी है कि वे नए रास्ते का इस्तेमाल ना करें और पारंपरिक मार्ग से ही गुजरें। ओमान तट के पास से जा रहे चार जहाजों को वापस लौटना पड़ा। शुक्रवार को सिंगापुर के झंडे वाले एवर लवली शिप पर ड्रोन हमला किया गया था। इसके बाद शनिवार को पनामा फ्लैग वाले किकू को निशाना बनाया गया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN