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अमेरिका पहले से ज्यादा मजबूत…; ट्रंप के दावे के पीछे क्या हैं असली आंकड़े?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आज पहले से ज्यादा मजबूत है। नौकरियां बढ़ी हैं, सेना ताकतवर है और तकनीक में देश आगे है। लेकिन ऊंची ईंधन कीमतें और चल रहे युद्ध इस दावे पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है। नौकरियां बढ़ रही हैं, सेना दुनिया की सबसे ताकतवर है और नई तकनीक में भी देश सबसे आगे है। लेकिन यह तस्वीर पूरी नहीं है। एक तरफ देश की अर्थव्यवस्था बड़ी बनी हुई है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अमेरिका आगे है। दूसरी तरफ पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरान के साथ चल रहा युद्ध और दूसरे देशों से बढ़ता तनाव भी साफ दिख रहा है। ट्रंप के भाषण में ताकत की बातें ज्यादा थीं। लेकिन आंकड़े और मौजूदा हालात बताते हैं कि अमेरिका मजबूत होते हुए भी कई बड़ी मुश्किलों से घिरा हुआ है।

नौकरियां बढ़ीं, लेकिन महंगाई भी बढ़ी

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि निजी कंपनियों में 10 लाख से ज्यादा नई नौकरियां बनीं। उन्होंने यह भी बताया कि गरीबी दर देश के इतिहास में सबसे नीचे आ गई है। ट्रंप ने इसे देश का सुनहरा दौर बताया। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था अभी भी बढ़ रही है। वह दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। महंगाई रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं, फिर भी नौकरियां बन रही हैं। यह अच्छी बात है।

ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी ऊर्जा पूरी दुनिया को ईंधन दे रही है। मतलब अमेरिका तेल और गैस निकालकर दूसरे देशों को भी बेच रहा है। लेकिन ईरान के साथ सात महीने से युद्ध चल रहा है। इस युद्ध की वजह से होर्मुज के पास तेल की सप्लाई लगभग रुक गई है। यह जगह दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत जरूरी है। इस बंद के कारण देश में और पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।

बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव है। लोगों को रोजमर्रा की चीजें महंगी पड़ रही हैं। इसी दौरान अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर नए टैक्स लगा दिए हैं। इससे बड़े व्यापारिक साझेदार देशों से तनाव और बढ़ गया है। दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञों को डर है कि व्यापार और महंगाई दोनों पर और बुरा असर पड़ सकता है।

सेना मजबूत, लेकिन साथी देशों से दूरी बढ़ी

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी पुरानी बात दोहराई कि ताकत से ही शांति आती है। उन्होंने ईरान के ठिकानों पर किए गए बड़े हमलों का जिक्र किया। उन्होंने वेनेजुएला के तानाशाह नेता को हटाने की बात भी कही। अमेरिकी सेना आज भी दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है। उसके पास सबसे ज्यादा पैसा है और सबसे आधुनिक हथियार हैं। डेनमार्क के साथ हुए समझौते के बाद ग्रीनलैंड में दो नए बड़े सैन्य अड्डे बनने वाले हैं। इससे आर्कटिक यानी उत्तर के ठंडे इलाके में अमेरिका की पहुंच और बढ़ जाएगी।

लेकिन एक साथ कई जगहों पर युद्ध चलाने से दिक्कत आ रही है। ईरान में भी ऑपरेशन चल रहा है और कैरिबियन इलाके में भी। इससे पारंपरिक हथियारों के भंडार पर बहुत दबाव बढ़ गया है। हथियार तेजी से खर्च हो रहे हैं। सरकार कहती है कि वह देश की रक्षा के लिए और ज्यादा कोशिश कर रही है। लेकिन एकतरफा हमलों की वजह से संयुक्त राष्ट्र में काफी नाराजगी है। कई देश अमेरिका के फैसले से सहमत नहीं हैं। खासकर यूरोप के पुराने सहयोगी देशों ने खुलकर सवाल उठाए हैं। वे कह रहे हैं कि अमेरिका अब पहले जैसा भरोसेमंद साथी नहीं रहा। मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध के नतीजों को देखकर उनकी चिंता और बढ़ गई है।

एआई में आगे, लेकिन दुनिया से कटा हुआ

तकनीक के मामले में राष्ट्रपति ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय नियमों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब ‘सुपर इंटेलिजेंस’ यानी और भी तेज कृत्रिम बुद्धिमत्ता बनाकर दुनिया में आगे बढ़ेगा। आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी कंपनियां एआई में दुनिया से काफी आगे हैं। उनके पास सबसे ज्यादा कंप्यूटर पावर है। वे नए और ताकतवर एआई मॉडल भी सबसे पहले बना रहे हैं। निजी कंपनियां इस क्षेत्र में बहुत पैसा लगा रही हैं।

लेकिन समस्या यह है कि अमेरिका एआई पर दुनिया भर के साझा नियम बनाने की बात मानने को तैयार नहीं है। यूरोप और एशिया के कई देश मिलकर नियम बना रहे हैं। अमेरिका उनसे अलग खड़ा है। इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए आगे चलकर व्यापार करना मुश्किल हो सकता है।

चीन के साथ भी तनाव बना हुआ है। दोनों देश सेमीकंडक्टर यानी चिप्स और नई एआई व्यवस्था पर कब्जा करने की होड़ में लगे हैं। ये चिप्स आधुनिक तकनीक की रीढ़ हैं। जो इन पर काबू करेगा, वही आगे की दौड़ में आगे रहेगा। यह तनाव अब सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि बड़े कूटनीतिक रिश्तों का केंद्र बन गया है।

कुल मिलाकर कहा जाए तो राष्ट्रपति ट्रंप का भाषण ताकत दिखाने वाला था। लेकिन आंकड़े और मौजूदा हालात बताते हैं कि अमेरिका मजबूत जरूर है, पर उसे कई मोर्चों पर एक साथ चुनौती भी झेलनी पड़ रही है। एक तरह से कहा जा सकता है कि आर्थिक दबाव, युद्ध और तकनीक के नियम; ये तीनों चीजें आने वाले समय में और ज्यादा चर्चा में रहेंगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN