Source :- LIVE HINDUSTAN
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और 22 अमेरिकी राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई ग्रीन कार्ड नीति के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। यह नीति 18 सितंबर से लागू होनी है।
अमेरिका में ग्रीन कार्ड को लेकर बवाल शुरू हो गया है। न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी और 22 अमेरिकी राज्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उनकी नई ग्रीन कार्ड नीति को अदालत में चुनौती दी है। यह नीति शुक्रवार ( 18 सितंबर ) से लागू होनी है। सोमवार ( 14 सितंबर ) को दो अलग-अलग मुकदमे दाखिल किए गए। एक मुकदमा 22 राज्यों और कोलंबिया जिले ने दाखिल किया। दूसरा मुकदमा न्यूयॉर्क शहर के साथ शिकागो, सैन फ्रांसिस्को और सिएटल जैसी स्थानीय सरकारों ने दाखिल किया। ममदानी दूसरे मुकदमे का नेतृत्व कर रहे हैं। राज्यों ने इस नीति को ‘विनाशकारी’ बताया है।
ग्रीन कार्ड क्या मायने रखता है?
दरअसल, अमेरिका में स्थायी रूप से बसने का सपना देखने वाले हजारों भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड अंतिम बड़ा कदम होता है। यह अस्थायी काम, पढ़ाई और लंबी प्रतीक्षा के बाद स्थायी निवास का रास्ता खोलता है। ग्रीन कार्ड धारक देश में स्थायी रूप से रह और काम कर सकता है। कई लोगों के लिए यह नागरिकता की दिशा में भी महत्वपूर्ण पड़ाव है। भारतीय आवेदकों के लिए यह और भी अहम है, क्योंकि रोजगार आधारित आव्रजन में इंतजार अक्सर सालों तक चलता है। कई भारतीय लंबे समय तक अस्थायी वीजा पर रहते हैं।
मुकदमे क्यों हुए दायर?
ट्रंप प्रशासन की नई नीति शुक्रवार से लागू होनी है, इसलिए डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले राज्य, शहर और काउंटी इसे रोकना चाहते हैं। ममदानी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ परिवार पहले ही खाद्य सहायता, स्वास्थ्य सेवा और सस्ते आवास जैसे लाभ छोड़ रहे हैं। कई मामलों में परिवार के अमेरिकी नागरिक बच्चे इन योजनाओं के कानूनी हकदार हैं, फिर भी डर के कारण परिवार दूर हो रहे हैं। यही डर मुकदमों का मुख्य आधार है। तर्क यह है कि लोग उन लाभों से भी बच सकते हैं जिनके वे कानूनी रूप से हकदार हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे भविष्य का आव्रजन आवेदन कमजोर पड़ सकता है।
वहीं, कई अप्रवासी, जिनके पास ग्रीन कार्ड नहीं है, पहले से कई सार्वजनिक योजनाओं के लिए पात्र नहीं होते। फिर भी अधिकार समूहों और डेमोक्रेटिक अधिकारियों का कहना है कि नीति का ‘नकारात्मक असर’ व्यापक होगा। उदाहरण के लिए, अगर माता-पिता अप्रवासी हैं और बच्चे अमेरिकी नागरिक हैं, तो माता-पिता बच्चों की ओर से लाभ ले सकते हैं। लेकिन अगर उन्हें लगता है कि इससे उनके ग्रीन कार्ड पर असर पड़ेगा, तो वे योजनाओं से दूर रह सकते हैं। यानी अधिकारी का फैसला आने से पहले ही परिवार अपना व्यवहार बदल सकते हैं। गृह सुरक्षा विभाग का खुद का अनुमान है कि करीब 9 लाख 50 हजार लोग सार्वजनिक सहायता से नाम कटवा सकते हैं या नया नामांकन नहीं कराएंगे।
पब्लिक चार्ज नियम क्या है?
इस विवाद की जड़ पुरानी आव्रजन अवधारणा ‘पब्लिक चार्ज’ है। इसके तहत मेडिकेड और पूरक पोषण सहायता कार्यक्रम (एसएनएपी) समेत सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सूची का विस्तार किया गया है, जिनका इस्तेमाल संघीय अधिकारी यह आकलन करने में कर सकते हैं कि कोई आवेदक भविष्य में ‘पब्लिक चार्ज’ बन सकता है या नहीं। अमरीकी अप्रवास कानून का ‘पब्लिक चार्ज’ नियम 18 सितंबर 2026 से लागू हो रहा है, जिसके तहत सरकारी सहायता लेने वाले विदेशी नागरिकों के लिए ग्रीन कार्ड पाना मुश्किल हो जाएगा।
क्या है राज्यों की चिंता?
राज्यों का कहना है कि असर सिर्फ आवेदकों तक नहीं रुकेगा। अगर परिवार खाद्य सहायता या स्वास्थ्य योजनाएं छोड़ देंगे, तो इलाज में देरी होगी। छोटी बीमारी बढ़कर आपातकालीन कक्ष तक पहुंच सकती है। इससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ेगा। राज्यों का यह भी तर्क है कि संघीय योजनाओं में भागीदारी घटेगी तो स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है और राज्यों को मिलने वाली संघीय राशि भी कम हो सकती है। इसलिए वे इसे सिर्फ आव्रजन विवाद नहीं मानते। उनका कहना है कि नीति सार्वजनिक स्वास्थ्य, राज्य के वित्त और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी छू सकती है।
ट्रंप प्रशासन का अलग रुख
दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का रुख अलग है। उसका कहना है कि स्थायी निवास चाहने वालों को सरकार पर पूरी तरह निर्भर नहीं, आत्मनिर्भर होना चाहिए। गृह सुरक्षा विभाग का तर्क है कि यह नीति सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा करती है और अप्रवासियों की आत्मनिर्भरता का पुराना सिद्धांत वापस लाती है। विभाग ने मुकदमा दायर करने वाले राज्यों और शहरों की आलोचना करते हुए उन्हें ‘आश्रय राज्य’ कहा है। आरोप यह है कि वे इसलिए चिंतित हैं क्योंकि लोग योजनाएं छोड़ देंगे तो संघीय धन कम हो सकता है।
भारतीयों के लिए क्या मायने?
भारतीयों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि यह कोई ऐसा कठोर नियम नहीं है जो कहता हो कि ग्रीन कार्ड आवेदक सरकारी लाभ ले ही नहीं सकते। असर आवेदक की स्थिति, लिए गए लाभ और अधिकारी द्वारा नए मानक के इस्तेमाल पर निर्भर करेगा। लेकिन यह नीति पहले से जटिल आव्रजन व्यवस्था में एक और अनिश्चितता जोड़ देती है। जो भारतीय पेशेवर सालों से काम कर स्थायी निवास का इंतजार कर रहे हैं, उनके लिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि लाभ लेने से ग्रीन कार्ड रुक जाएगा या नहीं। बड़ा सवाल यह भी हो सकता है कि किसी लाभ का जिक्र बाद में स्पष्ट करना या समझाना पड़े।
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