Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिकी प्रशासन ने एक बार फिर से एक नया नियम प्रस्तावित किया है। इस नियम का मकसद यूएससीआईएस के उस लंबे समय से चल रहे सिद्धांत को खत्म करना है, जिसमें किसी अप्रवासन याचिका को पहले मंजूरी मिल चुकी हो तो उसी तरह की नई याचिका पर आसानी से और जल्दी विचार किया जाता था।
अमेरिका में वीजा के एक्सटेंशन के नियमों में बड़ा बदलाव होने की तैयारी चल रही है। ट्रंप प्रशासन एक नया नियम लाने जा रहा है, जिसमें अगर किसी कर्मचारी को पहले वीजा मिल चुका हो तो अब दोबारा आसानी से एक्सटेंशन नहीं मिलेगा। पुरानी मंजूरी का उतना सम्मान नहीं रहेगा। यह बदलाव खासकर उन भारतीयों पर असर डाल सकता है, जो अमेरिका में H-1B पर काम कर रहे हैं और अपने वीजा की अवधि बढ़ाना चाहते हैं। अगर नियम लागू हो गया तो एक्सटेंशन मिलने में ज्यादा समय लग सकता है, ज्यादा दस्तावेज मांगे जा सकते हैं और रद्द होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
दरअसल, ट्रंप प्रशासन ने एक बार फिर अमेरिकी अप्रवासन नियमों में सख्ती लाने का प्रस्ताव रखा है। इस बार प्रशासन यूएससीआईएस (US Citizenship and Immigration Services) के उस पुराने नियम को खत्म करना चाहता है, जिसमें अगर किसी विदेशी कर्मचारी की याचिका को पहले मंजूरी मिल चुकी हो तो उसी तरह की नई याचिका पर आसानी से विचार किया जाता था। यह प्रस्ताव खासकर फॉर्म I-129 से जुड़ा है। इसी फॉर्म के जरिए अमेरिकी कंपनियां H-1B, L-1 और O-1 जैसे वर्क वीजा के लिए विदेशी कर्मचारियों को स्पॉन्सर करती हैं। अगर यह नियम लागू हो गया, तो कंपनियों को अपने मौजूदा विदेशी कर्मचारियों को अमेरिका में बनाए रखने में ज्यादा दिक्कत हो सकती है।
यह तीसरी कोशिश है
बता दें कि यह ट्रंप प्रशासन की तीसरी कोशिश है, जिसमें वे ‘पुरानी मंजूरी का सम्मान’ (Deference To Prior Approval) वाले नियम को खत्म करना चाहते हैं। पहले भी दो बार ऐसी कोशिश की गई थी, लेकिन वह नियम पूरी तरह लागू नहीं हो सका। अब फिर से नया प्रस्ताव लाया गया है। नियम के प्रकाशन के बाद 30 दिनों तक जनता अपनी राय और टिप्पणियां दे सकती है। प्रशासन का कहना है कि यह नियम 14 अक्टूबर को प्रकाशित होने की उम्मीद है। उसके बाद 30 दिन तक लोग अपनी प्रतिक्रिया भेज सकेंगे।
पुरानी मंजूरी का सम्मान क्या होता है?
आसान शब्दों में कहे तो अगर किसी कर्मचारी को पहले H-1B या L-1 वीजा मिल चुका है और कंपनी उसे आगे बढ़ाने के लिए दोबारा याचिका दाखिल करती है, तो यूएससीआईएस आमतौर पर पुरानी मंजूरी को ध्यान में रखता था। यानी अगर पहले सारे कागजात सही थे और मंजूरी मिल चुकी थी, तो दोबारा बहुत ज्यादा सवाल नहीं उठाए जाते थे। अब प्रस्तावित नियम के मुताबिक, हर बार याचिका को नए सिरे से देखा जाएगा। पुरानी मंजूरी का कोई खास महत्व नहीं रहेगा।
अगर नियम लागू हुआ तो क्या होगा असर?
अब सवाल उठता है कि अगर नया नियम लागू हो जाता है तो क्या असर पड़ेगा? जानकारों का कहना है कि अगर यह नियम लागू हो जाता है तो कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जैसे…
- प्रोसेसिंग टाइम बढ़ सकता है: याचिकाओं को मंजूरी मिलने में पहले से ज्यादा समय लग सकता है
- आरएफई की संख्या बढ़ेगी: यूएससीआईएस ज्यादा मामलों में अतिरिक्त दस्तावेज (Request for Evidence या RFE) मांग सकता है
- रद्द होने का खतरा बढ़ेगा: खासकर उन याचिकाओं पर असर पड़ेगा, जिनमें कर्मचारी के अमेरिका में रहने की अवधि बढ़ाने ( Extension of stay) की मांग की जाती है।
- कंपनियों को दिक्कत: अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने विदेशी कर्मचारियों को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
बताया जा रहा है कि यह नियम खासकर उन कंपनियों और कर्मचारियों पर असर डाल सकता है, जो H-1B और L-1 वीजा पर निर्भर हैं। इनमें भारतीय कर्मचारियों की संख्या काफी ज्यादा है। कहने का मतलब ये है कि अगर यह नियम लागू होता है तो सबसे अधिक भारतीय प्रभावित होंगे।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल यह सिर्फ एक प्रस्तावित नियम है। इसे अंतिम रूप से लागू करने से पहले जनता की राय ली जाएगी। 14 अक्टूबर को प्रकाशन के बाद 30 दिनों तक कोई भी अपनी राय मशविरा दे सकता है। उसके बाद प्रशासन फैसला लेगा कि नियम को अंतिम रूप देना है या नहीं। अगर नियम लागू हो जाता है, तो कंपनियों को अपनी अप्रवासन नीति में बदलाव करना पड़ेगा। इसके साथ ही कर्मचारियों का टेंशन बढ़ जाएगा।
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