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अमेरिकी ड्रग्स लिस्ट में भारत का नाम, फिर PM मोदी की तारीफ क्यों कर रहे ट्रंप?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार के उन प्रयासों का स्वागत किया, जो अवैध अफीम की खेती रोकने और नशीली दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए चल रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने अवैध अफीम की खेती रोकने के प्रयासों के लिए तारीफ की है। यह तारीफ ऐसे समय में किया गया है, जब अमेरिका ने भारत को फिर उन देशों की सूची में रखा, जिन्हें प्रमुख अवैध नशीले पदार्थों के उत्पादन या तस्करी वाले देश माना जाता है। आधिकारिक बयान में ट्रंप ने कहा कि भारत सरकार अवैध अफीम पर लगाम लगाने और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का काम कर रही है। उन्होंने अमेरिका-भारत ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के जरिए आगे भी सहयोग जारी रखने की उम्मीद जताई।

अमेरिका की ओर से जारी आधिकारिक बयान में ट्रंप ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार के उन प्रयासों का स्वागत करता हूं, जिनसे अवैध अफीम की खेती पर रोक लगाई जा रही है और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है। मैं अमेरिका-भारत ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क के जरिए आगे भी सहयोग जारी रखने की उम्मीद करता हूं।

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति को एक रिपोर्ट भेजा गया था। इस रिपोर्ट में अमेरिका ने कुल 23 देशों का नाम लिया है। इनमें अफगानिस्तान, चीन, कोलंबिया, मैक्सिको, पाकिस्तान, म्यांमार और भारत जैसे देश शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि किसी देश का इस सूची में होना जरूरी नहीं कि उसकी सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ काम नहीं कर रही हो। कई बार भौगोलिक स्थिति, व्यापारिक रास्ते और आर्थिक कारणों से भी कोई देश इस सूची में आ जाता है। उसी दस्तावेज में ट्रंप ने भारत के मामले में सकारात्मक रुख भी दिखाया।

गौरतलब है कि भारत उन देशों में नहीं है, जिन्हें अमेरिका ने ‘साफ तौर पर नाकाम’ बताया है। उस श्रेणी में अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा, कोलंबिया और वेनेजुएला जैसे देशों को रखा गया है। भारत का नाम सूची में है, लेकिन अमेरिका ने उसके खिलाफ कोई विशेष असफलता या सजा का ऐलान नहीं किया है। दरअसल, दोनों देशों के बीच नशीले पदार्थों पर सहयोग पहले से चल रहा है। जनवरी 2026 में वाशिंगटन में अमेरिका-भारत ड्रग पॉलिसी कार्य समूह की पहली बैठक हुई थी। उस बैठक में दोनों पक्षों ने अवैध दवाओं, उनके कच्चे रसायनों और तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने पर जोर दिया था।

तब भारत ने साफ कहा था कि वह नशीले पदार्थों की तस्करी और दवा उद्योग से जुड़े रसायनों के दुरुपयोग को गंभीरता से लेता है, लेकिन वैध दवा व्यापार को भी जारी रखना चाहता है। बता दें कि भारत में अफीम की खेती पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। सरकार कुछ इलाकों में लाइसेंस देकर अफीम उगाती है, ताकि दवा बनाने के लिए जरूरत का कच्चा माल मिल सके। समस्या तब होती है जब इसके साथ अवैध खेती या तस्करी भी जुड़ जाती है। अमेरिका का ताजा बयान इसी अवैध हिस्से पर रोक लगाने के भारतीय प्रयासों की तारीफ करता है।

अमेरिका का कहना है कि फेंटानिल जैसी सिंथेटिक दवाएं और उनके बनाने वाले रसायन उसके लिए बड़ी राष्ट्रीय समस्या बन चुके हैं। इसी वजह से वह भारत जैसे देशों से और सख्त निगरानी, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और आपूर्ति श्रृंखला की जांच चाहता है। भारत दुनिया के बड़े दवा उत्पादक देशों में से एक है, इसलिए अमेरिका की नजर यहां के फार्मा और केमिकल सेक्टर पर भी रहती है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN