Source :- LIVE HINDUSTAN
अमेरिकी बॉन्ड मार्केट में बुधवार को जबरदस्त हलचल देखने को मिली। इस दौरान 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.058% तक पहुंच गई, जो जुलाई 2007 के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। कहने का मतलब है कि 10 साल की यील्ड यानी रिटर्न 18 साल के हाई पर है। वहीं, 2 साल की ट्रेजरी नोट की यील्ड 8 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4.464% और 30 साल की ट्रेजरी यील्ड 4 बेसिस प्वाइंट से ज्यादा बढ़कर 5.347% हो गई। बॉन्ड यील्ड में उछाल से शेयर बाजार पर दबाव बढ़ गया है।
क्यों बढ़ा है दबाव?
जब अमेरिकी बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो निवेशकों के लिए शेयरों की तुलना में बॉन्ड ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। यही वजह है कि इस बार की तेजी से अमेरिकी शेयर बाजार से निकलकर निवेशक बॉन्ड मार्केट में दांव लगा सकते हैं। इससे शेयर बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर टेक्नोलॉजी और ग्रोथ कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
क्यों अहम है टाइमिंग?
बॉन्ड यील्ड में यह तेजी इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका के नए सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग आंकड़ों ने महंगाई, ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मजबूत आर्थिक गतिविधियों के कारण बाजार में यह आशंका बढ़ रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व को महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। यूरोप में भी सरकारी बॉन्ड की कीमतों पर दबाव देखा गया और उनकी यील्ड में बढ़ोतरी हुई। निवेशक महंगाई, ब्याज दरों की दिशा, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और सरकारों की बढ़ती उधारी जरूरतों पर नजर रख रहे हैं।
एक और ब्याज दर बढ़ोतरी का अनुमान
इस बीच, CME ग्रुप के FedWatch टूल के मुताबिक अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से 25 बेसिस प्वाइंट की एक और दर बढ़ोतरी की संभावना बढ़ गई है। प्रतिशत के हिसाब से संभावना अब 64% हो गई है जबकि मंगलवार को यह 55% थी। एक महीने पहले यह संभावना 10% से भी कम थी।
बता दें कि हाल ही में फेडरल रिजर्व ने नीतिगत ब्याज दरों के दायरे में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। फेड की दो दिवसीय बैठक के बाद बताया गया था कि संघीय मुक्त बाजार समिति (एफओएमसी) के सभी 12 सदस्यों ने ब्याज दरें एक-चौथाई प्रतिशत बढ़ाकर इसे 3.75 प्रतिशत से चार प्रतिशत के बीच करने के पक्ष में मतदान किया। साल 2023 के बाद फेड ने पहली बार ब्याज दरें बढ़ाई हैं। इससे पहले ब्याज दरों का दायरा 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के बीच था।
SOURCE : LIVE HINDUSTAN




