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अली खामेनेई के जनाजे में क्यों नहीं शामिल होंगे उनके बेटे मुजतबा? भारत से कौन-कौन जा रहा ईरान

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि इस छह दिवसीय शोक के दौरान करोड़ों लोग सड़कों पर उतरेंगे, जिससे यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े वैश्विक घटनाक्रमों में से एक बन जाएगा। 

Ali Khamenei Funeral: ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के जनाजे में शामिल नहीं होंगे। भारत में उनके प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने इसकी जानकारी दी है। उनका कहना है कि सुरक्षा से जुड़े गंभीर खतरों के कारण यह फैसला लिया गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, इलाही ने बताया कि इजरायल की तरफ से मिल रही धमकियों और खुफिया इनटपुट के आधार पर यह फैसला लिया गया है।

इलाही ने कहा है कि मुजतबा खामेनेई का सार्वजनिक रूप से सामने आना बेहद खतरनाक हो सकता है। आपको बता दें कि हाल ही में इजरायली रक्षा मंत्री द्वारा मुजतबा खामेनेई को लेकर दिए गए बयानों के बाद ईरान ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी भी दी है।

खामेनेई ने 36 वर्षों तक ईरान पर किया राज

ईरान पर करीब 36 वर्षों तक शासन करने वाले अयातुल्ला अली खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हवाई हमलों में मारे गए थे। इसके बाद मिडिल ईस्ट में भीषण युद्ध देखने को मिला था। इसके कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना पड़ा और इसका असर भारत सहित कई देशों में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों पर पड़ा। खामेनेई के जनाजे की शुरुआत 4 जुलाई से तेहरान में शुरू होने जा रहा। 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में उन्हें दफन किया जाएगा।

इस्लाम के सामान्य नियमों के अनुसार किसी भी मृतक को आदर्श रूप से 24 घंटे के भीतर दफनाया जाना अनिवार्य होता है, लेकिन युद्ध की स्थिति और सुरक्षा कारणों के चलते खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर मार्च महीने से ही सस्पेंस बना हुआ था। अब जाकर इन तारीखों का आधिकारिक ऐलान हुआ है। 6 दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम के दौरान 7 जुलाई को तेहरान के दक्षिण में स्थित शहर कौम में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रम और शोक सभाएं आयोजित की जाएंगी।

ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि इस छह दिवसीय शोक के दौरान करोड़ों लोग सड़कों पर उतरेंगे, जिससे यह आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े वैश्विक घटनाक्रमों में से एक बन जाएगा। पूरे ईरान में खामेनेई के विशाल पोस्टर और होर्डिंग्स लगाए गए हैं।

भारत से कौन जाएगा?

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस राजकीय अंतिम संस्कार और दफन कार्यक्रमों के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया था। हालांकि पीएम मोदी के पूर्व निर्धारित विदेशी दौरों के चलते इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने की संभावना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा इस भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उनके साथ विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी ईरान जाएंगे। कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी तेहरान जाएंगे। भारत से जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और कई प्रमुख शिया धर्मगुरुओं को भी इस कार्यक्रम के लिए विशेष निमंत्रण मिला है।

ईरान-अमेरिका शांति समझौता

पिछले महीने ही ईरान और अमेरिका के बीच एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद मध्य पूर्व में दोनों ओर से गोलीबारी जारी है। हाल ही में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में एक जहाज को निशाना बनाया था, जिसके बारे में ईरान का दावा था कि वह अपने स्वीकृत मार्ग से भटक गया था। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कार्रवाई करते हुए ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमले किए। इसके बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिसकी दोनों खाड़ी देशों ने कड़ी निंदा की थी। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में इस सीमापार गोलाबारी में थोड़ी नरमी देखी गई है।

इस बीच कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में कतर की राजधानी दोहा में अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच अलग-अलग बैठकें संपन्न हुई हैं। कतर के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, दोनों देशों के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापनसे जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है और खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्द ही अगली बैठक की तारीख तय की जाएगी।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN