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अस्पताल के बिस्तर पर थीं मीना कुमारी, दुनिया को अलविदा कहने से पहले गुलजार को दी थी ये बेशकीमती चीज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

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ये किस्सा बॉलीवुड की उस ट्रैजडी क्वीन का है, जिसने पर्दे पर जितने आंसू बहाए, असल जिंदगी में उससे कहीं ज्यादा दर्द छुपाए रखा। यह कहानी है मीना कुमारी और मशहूर शायर-फिल्ममेकर गुलजार साहब के उस रिश्ते की, जो शब्दों से शुरू हुआ और हमेशा के लिए अमर हो गया।

ये उन दिनों की बात है जब मीना कुमारी और कमाल अमरोही की शादीशुदा जिंदगी में दरारें आ चुकी थीं। मीना बहुत अकेली थीं और इस अकेलेपन में उनका सबसे बड़ा सहारा थीं उनकी लिखी नज्में। दुनिया उन्हें एक बेहतरीन अदाकारा के रूप में जानती थी, लेकिन उनके भीतर छिपे शायर से बहुत कम लोग वाकिफ थे।

मीना और गुलजार की दोस्ती

जब मीना अपनी जिंदगी के सबसे खराब दौर से गुजर रही थीं तब ‘बेनजीर’ के सेट पर उनकी मुलाकात गुलजार से हुई। गुलजार, जो खुद शब्दों के जादूगर थे, ने मीना के भीतर के उस दर्द और उनकी शायरी के हुनर को पहचान लिया। उन्होंने मीना को और लिखने के लिए प्रेरित किया। बस फिर क्या था, दोनों के बीच शायरी, अदब और जज्बातों का एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसने मीना के तन्हा दिल को एक नया हौसला दिया।

गंभीर बीमारी ने घेरा

वक्त आगे बढ़ा, लेकिन मीना की सेहत उनका साथ छोड़ रही थी। उन्हें लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया था। इसी ढलती सेहत के बीच, गुलजार अपनी फिल्म ‘मेरे अपने’ बना रहे थे। मीना की हालत खराब थी, लेकिन गुलजार के प्रति उनके सम्मान और सिनेमा के लिए उनके जुनून ने उन्हें रुकने नहीं दिया। उन्होंने गिरती सेहत के बावजूद इस फिल्म की शूटिंग पूरी की।

मीना ने गुलजार को दी थी ये कीमती चीज

मीना कुमारी की जिंदगी में भले ही प्यार की कमी रही हो, लेकिन अपनी जिंदगी के आखिरी दौर में गुलजार की दोस्ती उनके लिए एक सुकून भरे साये की तरह थी। 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। लेकिन जाने से ठीक पहले, अस्पताल के बिस्तर पर उन्होंने अपनी सबसे कीमती चीज, अपनी डायरियां, जिनमें उनके दिल का हर दर्द शायरी बनकर दर्ज था, गुलजार साहब के हाथों में सौंप दीं। उन्हें पता था कि इस दुनिया में अगर कोई उनके शब्दों की कीमत समझ सकता है, तो वो सिर्फ गुलजार हैं।

गुलजार ने ऐसे निभाई दोस्ती

गुलजार ने उस भरोसे को टूटने नहीं दिया। मीना के जाने के बाद, उन्होंने उन कतरनों और डायरियों को सहेजा और किताबों की शक्ल में दुनिया के सामने लाए। इन किताबों के जरिए दुनिया ने जाना कि मीना कुमारी सिर्फ एक महान अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक कवयित्री भी थीं।

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