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वैभव सूर्यवंशी

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आईपीएल 2026 के क्वालिफ़ायर-2 मुक़ाबले में अपनी धुआंधार बल्लेबाज़ी के चलते कई रिकॉर्ड बना डाले.

न्यू चंडीगढ़ में खेले जा रहे दूसरे क्वालिफ़ायर में वैभव सूर्यवंशी ने सात छक्कों और आठ चौकों की मदद से 47 गेंदों में 96 रन बनाए.

वैभव की विस्फोटक बल्लेबाज़ी की बदौलत राजस्थान रॉयल्स ने गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ छह विकेट पर 214 रन बनाए.

सोशल मीडिया पर वैभव के छक्कों की तारीफ़ हो रही है.

न्यू चंडीगढ़ में गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ टॉस जीतकर पहले बैटिंग करने उतरी राजस्थान रॉयल्स की टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही.

पहले ही ओवर में यशस्वी जायसवाल मोहम्मद सिराज की बॉल पर डीप स्क्वायर लेग पर कैच आउट हो गए.

अगले ओवर में कगिसो रबाडा ने ध्रुव जुरेल को पवेलियन की राह दिखा दी. लेकिन वैभव और रवींद्र जडेजा ने मिलकर पारी को मजबूत स्थिति तक पहुंचाया.

हालांकि वैभव रबाडा की ही गेंद पर ही कैच आउट हुए.

इस पर भारत के पूर्व खिलाड़ी इरफ़ान पठान ने एक्स पर लिखा, “15 साल के वैभव सूर्यवंशी को रोकने के लिए बॉडी लाइन गेंदबाज़ी करना मुझे सही नहीं लगता. मुझे पता है कि वह बड़े खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ खेल रहे हैं, लेकिन एक पिता होने के नाते मैं इससे सहमत नहीं हूं.”

दरअसल रबाडा की यह गेंद बाउंसर लग रही थी जिसे प्रसिद्ध कृष्णा ने कैच किया.

वैभव के स्टाइल की चर्चा

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क्रिकेट कमेंटेटर हर्ष भोगल ने वैभव के एक छक्के पर एक्स पर लिखा, “रबाड़ा की 153 किमी/घंटा की बॉल पर वैभव सूर्यवंशी का 91 मीटर लंबा स्ट्रेट छक्का इस टूर्नामेंट का सबसे शानदार शॉट हो सकता है. मैं एक मिनट के लिए भी इस युवा पर से अपनी आंखें नहीं हटा पाता हूं.”

पूर्व भारतीय क्रिकेटर शिखर धवन ने एक्स पर लिखा, “आज वैभव की बल्लेबाज़ी देखकर यक़ीन करना मुश्किल था कि वह इतने युवा हैं. उनका धैर्य, शॉट चयन और खेल को समझने का तरीका शानदार रहा. बहुत बढ़िया खेले युवा खिलाड़ी.”

आकाश चोपड़ा ने इस उम्र में वैभव की तारीफ़ करते हुए एक्स पर लिखा, “उनकी परिपक्वता उम्र से कहीं आगे नजर आती है. कमाल के खिलाड़ी हैं. होल्डर के ख़िलाफ़ उनकी बल्लेबाज़ी अविश्वसनीय रही.”

वैभग के अबतक के रिकॉर्ड

वैभव सूर्यवंशी किसी टी20 टूर्नामेंट के पावरप्ले में 500 या उससे अधिक रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बन गए हैं.

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शुक्रवार के मैच के साथ ही वैभव सूर्यवंशी किसी टी20 टूर्नामेंट के पावरप्ले में 500 या उससे अधिक रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज़ बन गए हैं.

इसके अलावा वैभव किसी आईपीएल सीज़न में 700 रन बनाने वाले पहले अनकैप्ड बैट्समैन भी बन गए हैं.

इससे पहले बीते बुधवार को वैभव ने सनराइजर्स हैदराबाद के क्रिस गेल के एक सीज़न में सबसे ज़्यादा 59 छक्के के रिकॉर्ड को तोड़ा था. गेल का यह रिकॉर्ड एक दशक से ज़्यादा समय तक टिका रहा था.

वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में अब तक 72 छक्के लगाए हैं.

वैभव ने आईपीएल 2026 के 16 मैचों में 776 रन बनाए हैं. उन्होंने 63 चौके और 72 छक्के लगाए हैं. साथ ही इस सीज़न में उन्होंने पांच अर्द्धशतक और एक शतक लगाया.

वैभव सूर्यवंशी ने 12 साल की उम्र में बिहार के लिए अपना पहला रणजी ट्रॉफी मैच खेला था.

बीबीसी गुजराती की एक स्टोरी के मुताबिक़, उस समय रणजी ट्रॉफी टीम के कोच विकास कुमार ने बताया, “वैभव हमेशा से निडर रहे हैं. जब उन्होंने 12 साल की उम्र में मुंबई के खिलाफ अपना पहला रणजी ट्रॉफी मैच खेला, तो उन्होंने ज्यादा रन नहीं बनाए.”

“लेकिन मुंबई के अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ जिस तरह से उन्होंने कवर ड्राइव और पुल शॉट खेले, वह देखने लायक था. उन्होंने अपनी मानसिकता स्पष्ट कर दी.”

वैभव सूर्यवंशी ने सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान और दुनिया के सर्वकालिक महानतम गेंदबाजों में से एक पैट कमिंस के एक ओवर में एक चौका और फिर लगातार तीन छक्के जड़े.

सनराइजर्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ वैभव सूर्यवंशी द्वारा 97 रन बनाने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ी ध्रुव जुरेल ने कहा, “वैभव सूर्यवंशी को खुद पर भरोसा है, उनके मन में इस बात का कोई संदेह नहीं है कि ‘मैं यह नहीं कर सकता’.”

निडर और आक्रामक

वैभव सूर्यवंशी ने 12 साल की उम्र में बिहार के लिए अपना पहला रणजी ट्रॉफी मैच खेला था.

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वैभव सूर्यवंशी ने पिछले आईपीएल में गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ 38 गेंदों में 101 रन बनाने के बाद कहा, “मैं गेंदबाज़ों को नहीं देखता, मैं सिर्फ गेंद को देखता हूं और खेलता हूं.”

इस पारी के बाद सचिन तेंदुलकर ने सोशल मीडिया पर वैभव सूर्यवंशी की निडरता के बारे में लिखा, “निडर रवैया, बल्ले की गति, गेंद की लंबाई को जल्दी पहचानना और गेंद को पूरी ताकत से खेलना ही इस पारी की सफलता का राज था.”

गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अकादमी निदेशक हितेश मजूमदार कहते हैं, “वैभव सूर्यवंशी अपनी पीढ़ी में इकलौते खिलाड़ी हैं. कई 15 वर्षीय खिलाड़ी क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन वैभव सूर्यवंशी का खेल कुछ अलग है. उनमें कोई डर नहीं है, वे सहजता से खेल रहे हैं, यही उनकी खूबी है.”

उन्होंने आगे कहा, “जिस तरह राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा में ‘धैर्य’ एक जन्मजात प्रतिभा थी, उसी तरह वैभव सूर्यवंशी में आक्रामक बल्लेबाजी एक जन्मजात प्रतिभा है. इस प्रतिभा से संपन्न लोगों को यह सिखाने की जरूरत नहीं होती, यह उनमें स्वाभाविक रूप से मौजूद होती है.”

वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा कहते हैं, “वैभव आठ साल की उम्र में मेरे पास आया था. वह बचपन से ही निडर होकर खेलता आया है.”

“जब वह दस-ग्यारह साल का था, तो मैंने उससे कहा कि तुम्हें भी एक-दो रन बनाने चाहिए. जब उसने मुझसे कहा कि मैं छक्का मार सकता हूँ, तो मुझे एक-दो रन क्यों बनाने चाहिए?”

मनीष ओझा कहते हैं, “जब कोई 10-11 साल का बच्चा आपसे यह सवाल पूछता है, तो आप उसे क्या जवाब देते हैं? मैंने तब से उसे कभी एक या दो रन लेने के लिए नहीं कहा है, उसकी आक्रामक बल्लेबाजी वैसी ही बनी हुई है.”

बेहतरीन फ़ुटवर्क

वैभव सूर्यवंशी

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वैभव सूर्यवंशी ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 29 गेंदों में 97 रनों की पारी खेली, जिसमें 12 छक्के शामिल थे. वैभव ने मैदान के हर कोने में रन बनाए.

वैभव की बल्लेबाजी के बारे में बात करते हुए सचिन तेंदुलकर ने एक्स पर लिखा, “वैभव का बैट स्विंग शानदार है. साथ ही, गेंद उनके पैरों की तरफ़ आती है तो वे अपने आगे वाले पैर को अच्छी तरह से हिलाते हैं, जिससे उन्हें खुले शॉट खेलने और आसानी से छक्के लगाने की आजादी मिलती है. उनकी पारी शानदार से कम नहीं थी.”

आकाश चोपड़ा के अनुसार, वैभव सूर्यवंशी शिकारी की तरह चाबुक चलाते हुए वार करते हैं और अपनी कलाई का इस्तेमाल करते हैं. यह अद्भुत है.

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज आरोन फिंच ने ईएसपीएन क्रिकइंफो पर कहा, “वैभव अपने हाथों को ऊपर रखते हैं. बल्ले का ऊपरी हिस्सा हवा में रहता है, जिससे बल्ले का वज़न कम हो जाता है. बल्ले को उठाने की ज़रूरत नहीं पड़ती.”

“बस बल्ले को स्वतंत्र रूप से घुमाने का मौका मिलता है. वैभव सूर्यवंशी अपना सिर स्थिर रखते हैं, वह इधर-उधर नहीं भटकता या झुकता नहीं है. वैभव अपने हाथों को ऊपर रखते हैं.”

आरोन फिंच आगे कहते हैं, “बाएं हाथ के बल्लेबाजों में कूल्हे के पास एक ब्लाइंड स्पॉट होता है, लेकिन वैभव के मामले में ऐसा नहीं है क्योंकि वह अपना सिर स्थिर रखते हैं.”

वैभव सूर्यवंशी की तीसरी विशेषता उनके बल्ले को पकड़ने का तरीका है.

क्रिकेट में अधिकतर खिलाड़ी बल्ले को V-आकार में पकड़ते हैं, जबकि वैभव बल्ले को O-आकार में पकड़ते हैं.

क्रिकेट की भाषा में इसे “बॉटम-हैंड डोमिनेंट ग्रिप” या “राउंड ग्रिप” कहा जाता है, जिससे लॉफ्टेड शॉट्स के लिए अधिक शक्ति मिलती है.

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