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इंटरनेट पर FREE में देख रहे हैं TV, तो लग सकता है झटका! नया नियम लाने की तैयारी में TRAI

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Source :- LIVE HINDUSTAN

सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ट्राई से यह जांचने को कहा कि क्या FAST और ALTD सर्विसेस को लाइसेंसिंग के दायरे में लाया जाना चाहिए या नहीं। नए नियम लागू होने से स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल वाली सुविधा थोड़ी सिकुड़ सकती है। हालांकि, यह फाइनल नियम नहीं है।

TRAI, एप्लीकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) और फ्री ऐड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सर्विसेस को एक फॉर्मल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के दायरे में लाने की सिफारिश कर सकती है।

TRAI Free Internet TV Regulation Rules: ट्राई एक नया नियम लाने पर विचार कर रहे हैं, जिससे इंटरनेट पर फ्री टीवी देखने वालों को बड़ा झटका लग सकता है। सूत्रों के अनुसार, ट्राई, एप्लीकेशन-बेस्ड लीनियर टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन (ALTD) और फ्री ऐड-सपोर्टेड स्ट्रीमिंग टेलीविजन (FAST) सर्विसेस को एक फॉर्मल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के दायरे में लाने की सिफारिश कर सकती है। नए नियम लागू होने से स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल वाली सुविधा थोड़ी सिकुड़ सकती है। हालांकि, यह फाइनल नियम नहीं है, बल्कि अभी केवल सुझाव मांगे जा रहे हैं। इसलिए जब तक नियम लागू नहीं होते, स्मार्ट टीवी पर मुफ्त चैनल चलते रहेंगे और इसका असर फिलहाल ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा।

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यह मुद्दा तब उठा, जब सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ट्राई से यह जांचने को कहा कि क्या FAST और ALTD सर्विसेस को लाइसेंसिंग के दायरे में लाया जाना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि ट्राई के अपनी इस बात पर कायम रहने की उम्मीद है कि लीनियर, शेड्यूल वाले चैनल देने वाली ओपन-इंटरनेट टेलीविजन सर्विसेस को पूरी तरह से फॉर्मल रेगुलेटरी फ्रेमवर्क से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।

इंडस्ट्री दो गुटों में बंटी

मामला सामने आने के बाद टीवी और ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री दो गुटों में बंट गई है। केबल और DTH ऑपरेटर जैसे पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म का तर्क है कि FAST सर्विसेस टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन की नकल कर रही हैं, जबकि वे लाइसेंस प्राप्त डिस्ट्रीब्यूटरों पर लागू कई शर्तों का पालन किए बिना काम कर रही हैं। हालांकि, टेक्नोलॉजी कंपनियों, OTT प्लेटफॉर्म, स्मार्ट-TV बनाने वाली कंपनियों और FAST ऑपरेटरों का तर्क है कि इंटरनेट पर आधारित सर्विसेस पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग से बिल्कुल अलग हैं और उन पर पुराने लाइसेंसिंग नियम लागू नहीं होने चाहिए।

केबल/DTH वाले कह रहे हैं कि मुफ्त इंटरनेट टीवी उनकी सब्सक्रिप्शन घटा रही है, इसलिए नियम चाहिए। डिजिटल/OTT वाले कहते हैं कि इंटरनेट सर्विसेस पर पुराने ब्रॉडकास्ट नियम न थोपो।

इसलिए, रेगुलेटरी बहस अब मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित हो रही है कि किसी सर्विस का स्वरूप उस टेक्नोलॉजी से तय होना चाहिए जिसका इस्तेमाल उसे देने के लिए किया जाता है, या फिर उस टेलीविजन जैसे अनुभव से जो वह ग्राहकों को देती है।

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ये फ्री इंटरनेट TV क्या है?

Samsung TV Plus, LG Channels, Pluto TV, Xiaomi जैसी स्मार्ट टीवी पर आने वाले ऐप्स/प्लेटफॉर्म। इनमें लीनियर टीवी चैनल (जैसे पारंपरिक टीवी की तरह शेड्यूल पर चलने वाले) मुफ्त दिखते हैं। इसका पैसा विज्ञापन से आता है, इसलिए सब्सक्रिप्शन फीस नहीं ली जाती है। ये इंटरनेट के जरिए स्मार्ट टीवी, ऐप या ब्राउजर पर चलते हैं। ये पारंपरिक केबल/DTH/IPTV की तरह काम करते हैं, लेकिन अभी तक लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन के सख्त नियमों में नहीं थे।

ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा

अगर ट्राई का प्रस्तावित नियम लागू हो जाता है, तो दर्शकों को खराब सर्विस या किसी तरह का फ्रॉड होने पर शिकायत दर्ज कराने का अधिकार मिलेगा। इससे टीवी की तरह ही इंटरनेट पर चलने वाले चैनलों पर भी अश्लील या भ्रामक विज्ञापनों और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने पर लगाम लगेगी। अभी जितने चैनल इंटरनेट पर फ्री में देखे जा सकते हैं, उन पर लाइसेंस फीस लगने के बाद वे कुछ चार्ज यूजर्स से ले सकते हैं। यानी नए नियम लागू होने से स्मार्ट टीवी पर फ्री चैनल वाली सुविधा थोड़ी सिकुड़ सकती है। इससे इंटरनेट पर टीवी देखना मुफ्त नहीं रहेगा।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN