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इतिहास रचा, सरकार बनाई और फिर इस्तीफा, जानिए स्टार्मर की विदाई के 5 बड़े कारण

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। महज 22 महीने के कार्यकाल के बाद उनका प्रधानमंत्रित्व समाप्त हो गया है। डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर जारी संक्षिप्त बयान में स्टार्मर ने कहा कि राष्ट्रीय हित को देखते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को अचानक इस्तीफा दे दिया। इससे उनके दो साल से भी कम समय चले प्रधानमंत्रित्व काल का अंत हो गया। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर दिए गए भावुक भाषण में स्टार्मर ने कहा कि मैंने जो भी निर्णय लिए, वे हमेशा अपने प्रिय देश को सर्वोपरि रखते हुए लिए गए। इसीलिए मैं आज लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे रहा हूं। उन्होंने अपने इस्तीफे को राष्ट्रीय हित में लिया गया कदम बताया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला महीनों से हो रहे आंतरिक विद्रोह, पार्टी के भीतर असंतोष, घटते जनसमर्थन और लगातार विवादों का नतीजा था।

ऐसे में अब सवल खड़ा हो रहा है कि कीर स्टार्मर के इस्तीफे के पीछे प्रमुख कारण क्या है? आइये हम आपको बता रहे हैं वो पांच कारण, जो इस्तीफे की वजह बनी…

  • लेबर पार्टी के अंदर गहराता विद्रोह

बताया जाता है कि स्टार्मर के इस्तीफे का सबसे बड़ा कारण उनकी अपनी पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष था। लेबर पार्टी के 100 से अधिक सांसदों ने पिछले कुछ हफ्तों में उनसे इस्तीफा देने की मांग की थी। कई वरिष्ठ मंत्रियों ने निजी बैठकें कर सवाल उठाया था कि क्या स्टार्मर अगले आम चुनाव में पार्टी को जीत दिला पाएंगे। स्टार्मर ने अपने भाषण में अप्रत्यक्ष रूप से इस कमी को स्वीकार भी किया। उन्होंने कहा कि अब सवाल यह बन गया था कि क्या वे लेबर पार्टी के लिए सही नेता बने हुए हैं। आंतरिक विरोध इतना तेज हो चुका था कि पद पर बने रहना उनके लिए असंभव हो गया था।

  • एंडी बर्नहैम का उदय

दिग्गज लेबर नेता और मैनचेस्टर के पूर्व मेयर एंडी बर्नहैम का हालिया संसदीय उपचुनाव में भारी अंतर से जीतना स्टार्मर के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। इस जीत के साथ बर्नहैम संसद में लौट आए, जो लेबर पार्टी के नियमों के मुताबिक नेतृत्व दावेदार के लिए अनिवार्य शर्त है। अपनी जीत के भाषण में बर्नहैम ने साफ चेतावनी दी थी कि पार्टी के पास बदलने का आखिरी मौका है। उनकी बढ़ती लोकप्रियता और पार्टी के विभिन्न गुटों में फैली समर्थन ने स्टार्मर पर दबाव को कई गुना बढ़ा दिया। चौंकाने वाली बात ये है कि स्टार्मर के इस्तीफे की घोषणा उसी दिन हुई जब बर्नहैम को सांसद के रूप में शपथ लेनी थी। यह संयोग राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

  • बार-बार नीतिगत यू-टर्न

स्टार्मर सरकार पर कल्याणकारी सुधारों, सामाजिक लाभों में कटौती, रक्षा खर्च बढ़ाने और आर्थिक नीतियों को लेकर लगातार उलटफेर करने के आरोप लगे। विरोध प्रदर्शनों और पार्टी के भीतर असहमति के बाद कई बड़े फैसलों को या तो नरम किया गया या पूरी तरह उलट दिया गया। इन यू-टर्नों ने जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंचाया। 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को भारी बहुमत दिलाने के बावजूद स्टार्मर सरकार उस जनादेश को स्थिर और प्रभावी शासन में बदलने में संघर्ष करती रही। नीतिगत अस्थिरता ने धीरे-धीरे उनके नेतृत्व की छवि को कमजोर कर दिया।

  • घोटाला और हाई-प्रोफाइल गलतियां

मार्च महीने में पीटर मंडेलसन को वाशिंगटन में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने का फैसला सबसे विवादास्पद साबित हुआ। मंडेलसन के दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर जेफरी एपस्टीन से पुराने संबंधों के कारण इस नियुक्ति पर तीखी आलोचना हुई और विपक्षी दलों के साथ-साथ पार्टी के अंदर भी भारी विरोध हुआ। इस घटना के अलावा कई अन्य घोटालों, मंत्रियों के इस्तीफों और आंतरिक कलह ने स्टार्मर के प्रधानमंत्रित्व को लगातार कमजोर किया। हर नया विवाद उनके लिए राजनीतिक गति हासिल करना और भी मुश्किल बनाता गया।

  • जनसमर्थन में भारी गिरावट

जनमत सर्वेक्षणों में स्टार्मर और लेबर पार्टी की लोकप्रियता लगातार नीचे गिरती रही। स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसी बीच आप्रवासन-विरोधी पार्टी ‘रिफॉर्म यूके’ का तेजी से उदय हुआ। मई के स्थानीय चुनावों में रिफॉर्म ने कई पारंपरिक लेबर क्षेत्रों में अच्छी बढ़त हासिल की और खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित किया। इससे लेबर पार्टी के सांसदों में यह आशंका बढ़ गई कि स्टार्मर के नेतृत्व में पार्टी अपने मुख्य मतदाताओं से दूर होती जा रही है।

अब आगे क्या होगा?

इस्तीफे के दौरान स्टार्मर ने घोषणा की कि लेबर पार्टी के नए नेता के चुनाव की प्रक्रिया जुलाई में औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी। नए नेता के चुने जाने तक वे प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे। संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सितंबर में होने वाले सत्र से पहले यह बदलाव पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि चुनाव पूरा होने तक मैं प्रधानमंत्री पद पर बना रहूंगा और सत्ता के सुचारू हस्तांतरण के लिए हर संभव प्रयास करूंगा। मैं अपने उत्तराधिकारी को पूर्ण और स्पष्ट समर्थन दूंगा। उन्हें एक ऐसा ब्रिटेन विरासत में मिलेगा जो दो साल पहले मुझे मिले ब्रिटेन से कहीं अधिक मजबूत, समृद्ध और न्यायपूर्ण है।

दूसरी ओर कीर स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ब्रिटिश राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। अब लेबर पार्टी की नेतृत्व दौड़ न केवल पार्टी के भविष्य, बल्कि पूरे ब्रिटेन की राजनीतिक दिशा को भी तय करेगी। एंडी बर्नहैम समेत अन्य संभावित दावेदारों के बीच यह मुकाबला काफी दिलचस्प होने वाला है। ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प होगा कि स्टार्मर के बाद ब्रिटेन की कमान कौन संभालता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN