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इसराइल को हथियार देने से अंतरराष्ट्रीय संगठन ने किया मना तो भारत ने गिनाए तर्क

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Source :- BBC INDIA

पीएम मोदी और नेतन्याहू

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पढ़ने का समय: 7 मिनट

इसराइल को हथियारों के निर्यात पर मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल की ताज़ा रिपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रतिक्रिया दी है.

रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत के पास स्ट्रेटेजिक ट्रेड कंट्रोल पर एक मज़बूत क़ानूनी और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क है और वह अपने राष्ट्रीय क़ानूनों और अपनी अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियों के मुताबिक़ अलग-अलग देशों को डुअल-यूज़ आइटम और टेक्नोलॉजी का एक्सपोर्ट करता है.”

मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, उसकी पड़ताल में पाया गया है कि इसराइल को भारत से हथियारों का निर्यात ग़ज़ा में जारी कथित जनसंहार का जोखिम बढ़ा सकता है.

इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने भी एक्स पर टिप्पणी की है. उन्होंने लिखा, “यह एक त्रासदी है कि अहिंसा की धरती दूसरे देश के अवैध युद्ध में सहभागी बन गई. अगर हम वास्तव में वही हिंदू राष्ट्र हैं, जैसा बीजेपी दावा करती है, तो हमें कर्म के सिद्धांत पर भी विश्वास करना चाहिए.”

पवन खेड़ा ने आगे लिखा, “निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ हिंसा कभी बिना नतीजे के नहीं रहती. हर अन्यायपूर्ण काम ऐसी निश्चित प्रतिक्रिया को जन्म देता है, जिससे कोई ताक़त, धन या प्रचार नहीं बच सकता.”

“कर्म हमेशा अपना हिसाब लेता है. मोदी का दरबार भी धूल में मिल जाएगा.”

एमनेस्टी इंटरनेशनल की ताज़ा रिपोर्ट में क्या कहा गया?

रणधीर जायसवाल

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एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी नई रिपोर्ट में दावा किय है कि भारत ने इसराइल को हथियारों की आपूर्ति जारी रखी है.

उसका कहना है कि यह जोखिम स्पष्ट तौर पर मौजूद था कि इनका इस्तेमाल क़ब्ज़े वाले ग़ज़ा पट्टी में फ़लस्तीनी लोगों के ख़िलाफ़ जारी कथित जनसंहार में किया जा सकता है.

रिपोर्ट में भारत और इसराइल के बीच अलग-अलग खेप के व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है.

इसके आधार पर दावा किया गया है कि भारत में बने हथियार, गोला-बारूद, पुर्जे़ और अन्य सामान उन बड़ी इसराइली कंपनियों को भेजे गए, जो इसराइली सेना की सप्लायर हैं.

इस रिपोर्ट में भारत सरकार के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कुछ कंपनियों की भी पहचान की गई है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव एग्नेस कैलामार्ड ने कहा, “हमारी जांच से पता चलता है कि ग़ज़ा में कथित जनसंहार को लेकर दुनिया भर में लगातार सामने आ रही तस्वीरों के बावजूद भारत ने इसराइली सेना और रक्षा क्षेत्र का समर्थन जारी रखा.”

कैलामार्ड ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की ओर से जारी अंतरिम आदेशों में ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के ख़िलाफ़ संभावित जनसंहार के जोखिम को स्वीकार किया गया है. ऐसे में भारतीय अधिकारी यकीन के साथ यह नहीं कह सकते कि उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि इसराइल को हथियारों के हस्तांतरण की अनुमति देना और उसे आसान बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून के गंभीर उल्लंघनों में योगदान का बड़ा जोखिम पैदा करता है.”

भारत-इसराइल संबंध

कैलामार्ड ने आगे कहा, “जब इसराइली सेना ग़ज़ा में बड़े पैमाने पर मौत, तबाही और पीड़ा पहुंचा रही थी, तब भारतीय कंपनियां इसराइल के रक्षा क्षेत्र के लिए पुर्जे़ और गोला-बारूद की आपूर्ति कर लाभ कमाती रहीं.”

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत सरकार से मांग की है कि वह तुरंत इसराइल को हथियार, गोला-बारूद और पुर्ज़ों के निर्यात की अनुमति देना बंद करे.

संगठन ने यह भी कहा कि भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके अधिकार क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत अपराधों में योगदान न दें.

संगठन के अनुसार सभी कंपनियों की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने वैश्विक परिचालन के दौरान मानवाधिकारों का सम्मान करें और समय रहते ऐसे प्रभावी क़दम उठाएं जिनसे उनके उत्पाद अंतरराष्ट्रीय क़ानून के गंभीर उल्लंघनों में इस्तेमाल न हों.

इसराइल से भारत के ताज़ा संबंधों पर विपक्षी दल अक्सर केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल खड़े करते हैं. 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे. इसके ठीक पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसराइल की यात्रा पर थे.

उनकी इस यात्रा को लेकर भी सवाल खड़े किए गए.

कुछ ही हफ़्ते पहले इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने भारत से दोस्ती का हवाला देते हुए दावा किया कि अमेरिका ही नहीं कई और देश भी उसके दोस्त हैं.

नेतन्याहू ने दावा किया कि भारत में उनको प्यार करने वाले बहुत सारे लोग हैं और उनको भारत में अपार समर्थन मिलता है.

उन्होंने कहा, “अमेरिका ही नहीं बल्कि हमारे दूसरे दोस्त भी हैं, जैसे भारत. 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में हमें बहुत ज़्यादा समर्थन हासिल है. फ़ेसबुक पर, सोशल मीडिया पर मुझे भारत से मिले अपार समर्थन के लगातार मैसेज आते रहते हैं.”

ऐसा तब है जब भारत और इसराइल के बीच कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत बहुत पुरानी बात नहीं है. दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध जनवरी, 1992 में शुरू हुए थे.

हालांकि मई, 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ज़ोरदार जीत के बाद, भारत और इसराइल के संबंध नए स्तर तक पहुंच गए हैं.

1990 के मध्य से ही भारत और इसराइल के बीच सैन्य संबंध काफ़ी अहम रहे हैं. बीते क़रीब दो दशक में दोनों देशों के बीच बड़ा कारोबार देखने को मिला है.

जस्टिस मुरलीधर लगा चुके हैं इसराइल पर आरोप

जस्टिस मुरलीधर

इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि इसराइल ने ग़ज़ा में फ़लस्तीनी बच्चों को जानबूझकर और सुनियोजित तरीक़े से निशाना बनाया है.

आयोग का निष्कर्ष है कि इन हमलों का मक़सद ग़ज़ा में फ़लस्तीनी समूह के भविष्य और उनके अस्तित्व को ख़त्म करना था. हालांकि इसराइल ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया.

मानवाधिकार परिषद ने नवंबर 2025 यानी पिछले साल उनको एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग का प्रमुख नियुक्त किया था.

इस जांच की रिपोर्ट पूर्वी यरूशलम समेत क़ब्ज़े वाले फ़लस्तीनी इलाक़े और इसराइल पर है.

उनकी ताज़ा रिपोर्ट में, “हिंसा और फ़लस्तीनी बच्चों के ख़िलाफ़ अपराधों की जांच की गई.”

ग़ज़ा में क्या हुआ?

ग़ज़ा में इसराइली हमलों में हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं और इनमें बच्चों की भी बड़ी तादाद है

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7 अक्तूबर 2023 को हमास ने इसराइल पर हमला किया था. इस हमले में 1200 लोगों की मौत हुई थी और 250 से ज़्यादा लोगों को बंधक बना लिया गया था.

इसके जवाब में इसराइल ने हमास के ख़िलाफ़ सैन्य अभियान शुरू किया था.

हमास के नियंत्रण वाले स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, उसके बाद से इसराइल के हमलों में अब तक 73 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 21 हज़ार बच्चे भी शामिल हैं.

हमास के इन आंकड़ों को संयुक्त राष्ट्र भी भरोसेमंद मानता है.

इसराइली हमलों में फ़लस्तीनी बच्चों की मौत की तस्वीरें कई बार सामने आईं. इसके साथ ही ग़ज़ा में इसराइली हमलोंं में लोगों की मौत और शहर के मलबों में दिखा कि ग़ज़ा की तस्वीर किस तरह से बदल चुकी है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS