Source :- LIVE HINDUSTAN
पराग्वे के सबसे बड़े डिजिटल बैंक यूएनो के ठप पड़ने के बाद देश में अफरा-तफरी मच गई। लोग सड़कों पर उतर आए। इसके बाद राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
पराग्वे के सबसे बड़े डिजिटल बैंक यूएनो के डूबने के बाद अर्थव्यवस्था ढह गई है। देश की आधी आबादी अब अपने ही पैसे नहीं निकाल पा रही है। इस संकट के बीच राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि कांग्रेस ने इस्तीफा स्वीकार ना करते हुए उनके खिलाफ महाभियोग का प्रक्रिया शुरू कर दी है। बता दें कि यूएनो बैंक की वजह से सैंटियागो की पार्टी के बीच फूट पड़ गई।
आधी रात को बैंक का कामकाज अचानक ठप होने के कारण लाखों ग्राहक अपने पैसों की निकासी करने में असमर्थ रहे, जिससे पूरे देश में बड़ा घोटाला और गहरा राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया। सोशल मीडिया पर जारी एक संदेश में पेना ने कहा, “मैंने गणराज्य के राष्ट्रपति पद से अपना त्यागपत्र सौंपने का निर्णय लिया है। यह फैसला मैंने देश की स्थिरता, सामाजिक शांति और हमारी सार्वजनिक संस्थाओं की रक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। आज मेरी एकमात्र प्राथमिकता उन पराग्वेवासियों की मानसिक शांति है जिन्होंने हमारी वित्तीय प्रणाली पर भरोसा करके अपनी बचत जमा की थी।”
राष्ट्रपति के इस्तीफा देने केबाद भी महाभियोग
राष्ट्रपति के इस्तीफे की घोषणा के तुरंत बाद, पराग्वे की संसद के निचले सदन ने पेना के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू करने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया। यह कदम 35 विपक्षी सांसदों और सत्तारूढ़ दल के असंतुष्ट नेताओं द्वारा लाए गए आरोपों पर चर्चा के लिए बुलाए गए एक विशेष सत्र के दौरान उठाया गया।
अब पराग्वे की सीनेट (उच्च सदन) यह तय करेगी कि महाभियोग की कार्यवाही को आगे बढ़ाया जाए या राष्ट्रपति का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाए। विपक्षी दलों ने अगस्त 2023 में 5 साल के कार्यकाल के लिए सत्ता में आए पेना पर “कर्तव्य में गंभीर और व्यवस्थित लापरवाही” का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव पेश किया है।
यूएनो बैंक कभी देश की तेजी से बढ़ती वित्तीय संस्थाओं में शामिल था और पराग्वे के 60 प्रतिशत से अधिक वयस्कों के इसके ग्राहक होने का दावा किया जाता था। लेकिन जांच में बैंक के मालिकों से जुड़ी कंपनियों को नियमों के विरुद्ध बड़े कर्ज देने और पर्याप्त गारंटी नहीं लेने की बात सामने आई। बैंक की वित्तीय स्थिति बिगड़ने पर केंद्रीय बैंक ने मंगलवार को उसका नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। बैंक का ऐप, कार्ड और पैसे के लेनदेन की सेवाएं बंद होने से लाखों ग्राहक अपनी बचत नहीं निकाल सके। संकट से करीब सात हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां भी प्रभावित हुई हैं।
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