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कहीं आप नकली पनीर तो नहीं खा रहे, जानिए क्या है एनालॉग पनीर और इसे कैसे पहचानें

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Source :- BBC INDIA

 एनालॉग पनीर

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जिस पनीर को आप रोज खाते हैं, वो दूध से बना है या दूध से बने पनीर जैसा दिखने वाली कुछ और ही चीज़ है?

इसी सवाल पर अब सरकारों की नज़र है.

मध्य प्रदेश सरकार ने एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.

इसके साथ ही मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला देश का चौथा राज्य बन गया है. इससे पहले छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात में एनालॉग पनीर पर रोक लगाई जा चुकी है.

मध्य प्रदेश सरकार ने इस फ़ैसले की वजह स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को बताया है.

खाद्य विभाग के अधिकारियों को अलग-अलग इलाकों में पनीर बनाने वाली फ़ैक्ट्रियों की जांच करने और एनालॉग पनीर मिलने पर उसे जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं.

लेकिन आख़िर एनालॉग पनीर है क्या, इतने बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल क्यों होने लगा?

एनालॉग पनीर क्या है?

एनालॉग पनीर

पारंपरिक पनीर दूध से बनाया जाता है. कुछ खट्टी चीज़ों की मदद से दूध को जमाया जाता है और इससे पनीर तैयार होता है.

एनालॉग पनीर इसका एक सस्ता विकल्प है. इसमें दूध की जगह दूसरे पदार्थ इस्तेमाल किए जाते हैं.

मसलन, दूध से मिलने वाले फैट की जगह वनस्पति तेल या वनस्पति फैट और दूध से मिलने वाले प्रोटीन की जगह सोया या मटर से मिलने वाले प्रोटीन का इस्तेमाल किया जाता है.

कई बार एनालॉग पनीर बनाने में स्टार्च और दूसरी चीज़ें जिनमें केमिकल्स भी शामिल हैं, मिलाई जाती हैं.

इसे इस तरह तैयार किया जाता है कि ये असली पनीर जैसा लगे.

यही वजह है कि एनालॉग पनीर को सिर्फ़ देखकर पहचानना आसान नहीं है.

लेकिन दोनों के बीच एक बड़ा फ़र्क है.

दूध से बने पनीर में दूध के प्राकृतिक पोषक तत्व होते हैं, जबकि एनालॉग पनीर में न्यूट्रिशनल वैल्यू कम होती है.

नकली पनीर का इस्तेमाल क्यों बढ़ा?

एनालॉग पनीर

अलग अलग लोगों, व्यापारियों और एक्सपर्ट्स से बात करने पर इसकी सबसे बड़ी वजह कम लागत और सस्ती कीमत निकल कर आती है.

भोपाल के एक बड़े डेयरी और पनीर सप्लायर सुमित जैन के मुताबिक़, एनालॉग पनीर की कीमत डेयरी पनीर की तुलना में करीब आधी होती है.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मार्केट में सस्ती चीज़ का खपत बहुत होता है. पिछले कई वर्षों में एनालॉग पनीर ने धीरे-धीरे बाज़ार में अपनी मजबूत जगह बना ली है. बाकी शहरों में भी हमारे संपर्क हैं ज़्यादातर जगह एनालॉग पनीर खूब बिक रहा है और भोपाल के बाजार में 60 से 65 फीसदी तक एनालॉग पनीर बिक रहा था.”

उनके मुताबिक, पहले सप्लायर, दुकानदार और ग्राहक आम तौर पर यह नहीं देखते थे कि पनीर डेयरी वाला है या एनालॉग.

कम कीमत की वजह से बड़े पैमाने पर खाना बनाने वाले कारोबारों के लिए भी यह सस्ता विकल्प बन गया.

मध्य प्रदेश में अब रोक के बाद इसका असर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है.

भोपाल के एक रेस्तरां मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके यहां पहले एनालॉग पनीर इस्तेमाल होता था. प्रतिबंध के बाद उन्होंने इसे बंद कर दिया है.

उन्होंने कहा कि, “अब ग्राहक पनीर ऑर्डर करने से पहले पूछ रहे हैं कि पनीर डेयरी वाला है या एनालॉग. अब जब बैन लग गया है तो डेयरी वाले पनीर की सप्लाई में कमी भी महसूस हो रही है और कई बार पनीर ख़त्म होने की वजह से ग्राहकों को ऑर्डर देने से मना करना पड़ रहा है.”

विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं?

बीबीसी मराठी की एक रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में पनीर की जांच से जुड़े रहे पूर्व खाद्य एवं औषधि आयुक्त एचजी कोशिया ने बताया कि दूध से बना पनीर और एनालॉग पनीर एक नहीं हैं.

उनके मुताबिक़, दूध से बने पनीर में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जबकि एनालॉग पनीर में दूध की जगह वनस्पति तेल से बना फैट इस्तेमाल होता है जिसमें पोषक तत्व बहुत कम होते हैं.

उन्होंने कहा था कि एनालॉग पनीर खाने योग्य हो सकता है, लेकिन वह असली दूध वाला पनीर नहीं है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने भी एनालॉग पनीर की पोषण गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, “हमने सारे राज्यों और एफएसएसएआई को लिखा है कि जब ये वस्तु पनीर है ही नहीं, फिर इसे एनालॉग पनीर के नाम से क्यों बेचा जा रहा है? मुझे तो ये भी समझ नहीं आता कि आख़िर एनालॉग पनीर देश की कौन सी न्यूट्रिशनल वैल्यू या ज़रूरत को पूरी कर रहा है?”

उनका कहना है कि एनालॉग को बाजार में जगह देने से डेयरी सेक्टर में काम कर रहे छोटे किसानों को भी नुक़सान हो सकता है.

उन्होंने कहा, “एनालॉग को जगह देकर आप हर तरफ बरबादी कर रहे हैं. अगर पनीर फैक्ट्री में और रसायन से बनने लगेगा तो गाय- भैंस पालने वाला किसान क्या करेगा?”.

एनएचआरसी ने एफएसएसएआई से एनालॉग पनीर की संरचना, पोषण मूल्य, स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और उसकी जांच के तरीकों पर जवाब मांगा है.

आयोग ने राज्यों से भी इसके उत्पादन, सप्लाई, बिक्री, सैंपलिंग और कार्रवाई की जानकारी मांगी है.

एनालॉग पनीर पर देश भर में चर्चा हो रही है और इसमें एक बड़ा सवाल यह है कि इसकी पहचान कैसे की जाए.

एनालॉग पनीर की पहचान कैसे करें?

एनालॉग पनीर

अगर पनीर पैकेट में बंद है, तो पहचान का सबसे आसान तरीका है उसका लेबल और उसमें इस्तेमाल की गई चीज़ों की लिस्ट पढ़ना.

अगर उसमें वनस्पति तेल, वनस्पति फैट, सोया प्रोटीन, मटर का प्रोटीन या दूसरे गैर-दूध वाले पदार्थ इस्तेमाल होने की जानकारी दी गई है, तो ये पारंपरिक दूध वाले पनीर से अलग है.

लेकिन खुले में बिक रहे पनीर के मामले में डेयरी या एनालॉग पनीर की पहचान मुश्किल है.

सिर्फ रंग, खुशबू, मुलायमपन या टेक्सचर देखकर एनालॉग पनीर की पक्की पहचान नहीं की जा सकती.

सोशल मीडिया और इंटरनेट पर आयोडीन टेस्ट को लेकर भी कई दावे किए जा रहे हैं.

मसलन ये कहा जा रहा है कि पनीर के नमूने में आयोडीन डालने पर अगर उसका रंग नीला या नीला-काला हो जाए, तो ये स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है.

लेकिन आयोडीन टेस्ट एनालॉग पनीर की पहचान का टेस्ट नहीं है.

किसी एनालॉग पनीर में उत्पाद में स्टार्च हो भी सकता है और नहीं भी. इसलिए रंग बदलने पर सिर्फ स्टार्च का संकेत मिलता है, ये साबित नहीं होता कि पनीर एनालॉग है.

इसी तरह पनीर को गर्म करने या तलने पर अगर वह बहुत ज्यादा तेल छोड़ता है, रबड़ जैसा बना रहता है या बहुत ज्यादा सिकुड़ता है, तो ये शक करने की वजह हो सकता है कि जो पनीर आप इस्तेमाल करने जा रहे हैं उसकी बनावट सामान्य पनीर से अलग है.

लेकिन सिर्फ इन बदलावों से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह एनालॉग पनीर है या स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित.

पक्की पहचान के लिए लैब में जांच ही ज्यादा भरोसेमंद तरीका है.

एनालॉग पनीर का स्वास्थ्य पर क्या असर?

एनालॉग पनीर

एनालॉग पनीर को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसके पोषण और इसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स और फैट को लेकर है.

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में काम करने वाले डॉ. अजय शर्मा ने बीबीसी से कहा कि एनालॉग पनीर में इस्तेमाल होने वाले ट्रांस फैट और दूसरी चीज़ों की वजह से लंबे समय में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है और दिल से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं.

उन्होंने कहा, “एनालॉग पनीर में ट्रांस फैट और बाकी चीज़ों के चलते कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ सकता है और कार्डियक इश्यूज भी हो सकते हैं. इसमें हाइड्रोजनेटेड फैट और कई तरह के दूसरे केमिकल्स इस्तेमाल किए जाते हैं. अगर आप इसे पांच-दस साल तक खाते रहेंगे, चाहे महीने में एक बार ही क्यों न खा रहे हों, तो शरीर पर इसका नकारात्मक असर दिखेगा.”

गुजरात के हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. तेजस पटेल ने भी एनालॉग पनीर में इस्तेमाल होने वाली वनस्पति तेल से बनी चर्बी को लेकर चिंता जताई है. उनके मुताबिक़, इसके कुछ एलिमेंट्स लंबे समय में दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों में रुकावट पैदा कर सकते हैं.

बीबीसी मराठी से बात करते हुए डॉ. राजेश शाह ने कहा, एनालॉग पनीर से बने खाद्य पदार्थों में स्वाद बढ़ाने के लिए सोडियम का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा हो सकता है.

हालांकि, एनालॉग पनीर और मिलावटी या घटिया पनीर को एक ही चीज़ मानना सही नहीं होगा.

हर एनालॉग पनीर को जहरीला या असुरक्षित कहना भी सही नहीं है. स्वास्थ्य पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उसमें किस तरह का फैट और दूसरे पदार्थ इस्तेमाल किए गए हैं, उनकी मात्रा कितनी है और उसका सेवन किस मात्रा में और कितने लंबे समय तक किया जा रहा है.

गुजरात में पनीर की जांच से जुड़े रहे डॉ. अतुल सोनी ने कुछ नमूनों में यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर, कास्टिक सोडा और सस्ते वनस्पति तेल जैसी चीज़ों के इस्तेमाल की बात कही है.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पनीर दूध से बना है या नहीं. सवाल यह भी है कि उसकी जगह इस्तेमाल किए गए पदार्थ क्या हैं, उनकी गुणवत्ता कैसी है और एनालॉग पनीर बनाने में उनका किस मात्रा में इस्तेमाम किया जा रहा है.

मध्य प्रदेश में रोक के बाद अब खाद्य विभाग अलग-अलग जगहों पर पनीर की जांच कर रहा है और एनालॉग पनीर मिलने पर उसे जब्त किया जा रहा है.

इस मामले पर आम उपभोक्ता के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि पनीर जैसा दिखने वाला हर उत्पाद जरूरी नहीं कि दूध से बना पनीर ही हो.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS