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कौन हैं स्वीटी अख्तर, सऊदी अरब में क्यों दी गई फांसी? परिवार ने सब बता दिया, दर्दनाक है कहानी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

Saudi Arabia Sweety Akhtar Execution: बांग्लादेश की स्वीटी अख्तर को सऊदी अरब में फांसी दिए जाने की खबर से परिवार सदमे में है। बेटी के बेहतर भविष्य के लिए विदेश गई स्वीटी की मौत से एक दिन पहले पिता से बात हुई थी।

Sweety Akhtar Story: बांग्लादेश की रहने वाली स्वीटी अख्तर अपनी बेटी का भविष्य संवारने के लिए सऊदी अरब गई थी। वहां वह मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सफाईकर्मी के तौर पर काम करती थी। अगस्त 2023 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में व्यभिचार के आरोपों में उसे फांसी दे दी गई। परिवार को उसकी मौत की सजा के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी।

बांग्लादेश की रहने वाली स्वीटी अख्तर की जिंदगी में मुश्किलें कम नहीं थीं। आठवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान उसकी शादी हो गई थी। पहली शादी टूट गई तो वह अपनी बेटी के साथ मायके लौट आई। परिवार के दबाव में उसने दूसरी शादी की, लेकिन दूसरा पति भी उसे छोड़कर चला गया। आर्थिक तंगी और पारिवारिक परेशानियों के बीच स्वीटी ने अपनी बेटी का भविष्य बेहतर बनाने के लिए सऊदी अरब जाने का फैसला किया। हालांकि, वहां पहुंचने के कुछ ही महीनों बाद उसकी जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसकी कल्पना उसके परिवार ने भी नहीं की थी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीटी को सऊदी अरब में व्यभिचार के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। 14 अक्टूबर को सऊदी अरब ने दो बांग्लादेशी नागरिकों स्वीटी अख्तर और नाजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर को फांसी दिए जाने की घोषणा की। सऊदी अधिकारियों ने उनके खिलाफ कार्रवाई को अनैतिक कृत्यों से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि से जोड़ा था।

स्वीटी के परिवार को उसकी मौत की सजा के बारे में पहले से जानकारी नहीं थी। उसके पिता ने बताया कि उन्होंने 13 अक्टूबर को बेटी से आखिरी बार बात की थी। यह बातचीत उसकी फांसी से ठीक एक दिन पहले हुई थी। परिवार को उसकी मौत की खबर दूसरों के जरिए और फेसबुक पर मिले एक वीडियो से पता चली।

आठवीं में हुई शादी, दूसरी बार भी टूटा रिश्ता

स्वीटी अख्तर मध्य बांग्लादेश के तंगाइल जिले के मिर्जापुर उपजिला के नगर छावली गांव की रहने वाली थी। उसके पिता का नाम फजल मिया और मां का नाम जोहोरा बेगम है। पांच बहनों में स्वीटी सबसे छोटी थी। उसका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और उसके पिता दिहाड़ी मजदूरी करते थे।

बांग्लादेशी अखबार प्रथम आलो के मुताबिक, स्वीटी की शादी उस समय हो गई थी, जब वह आठवीं कक्षा में पढ़ रही थी। पहली शादी टूटने के बाद वह अपनी बेटी के साथ माता-पिता के घर लौट आई।

परिवार के दबाव में उसने दूसरी शादी कर ली। उसके पिता ने दूसरे पति को सऊदी अरब भेजने के लिए कर्ज भी लिया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसने स्वीटी से संपर्क करना बंद कर दिया।

स्वीटी की चचेरी बहन सलमा अख्तर ने प्रथम आलो को बताया कि वैवाहिक जीवन में बार-बार मिली परेशानियों और परिवार की आर्थिक स्थिति ने उसे विदेश में नौकरी तलाशने के लिए मजबूर किया।

सलमा के मुताबिक, स्वीटी की बेटी अब नौ साल की है और स्थानीय प्राथमिक स्कूल में तीसरी कक्षा में पढ़ती है। हालांकि, अखबार द डेली स्टार ने स्वीटी की मां के हवाले से बच्ची की उम्र चार साल बताई थी।

बेटी का भविष्य संवारने के लिए लिया कर्ज

द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीटी के पिता फजल मिया ने उसे सऊदी अरब भेजने के लिए 1.5 लाख टका का कर्ज लिया था। मार्च 2023 में वह एक पंजीकृत भर्ती एजेंसी के जरिए सऊदी अरब पहुंची थी।

बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के अनुसार, स्वीटी का पासपोर्ट मई 2022 में जारी हुआ था। बांग्लादेश के ब्यूरो ऑफ मैनपावर, एम्प्लॉयमेंट एंड ट्रेनिंग ने फरवरी 2023 में उसे विदेश में रोजगार के लिए मंजूरी दी थी।

सऊदी अरब पहुंचने के बाद स्वीटी मक्का की ग्रैंड मस्जिद में सफाईकर्मी के तौर पर काम करने लगी। शुरुआती पांच से छह महीनों तक वह अपने परिवार को पैसे भेजती रही। इसके बाद पैसे आने बंद हो गए।

स्वीटी के पिता ने द डेली स्टार को बताया कि बेटी ने शुरुआती पांच महीनों तक घर पैसे भेजे थे। फिर एक दिन उसका फोन आया और उसने बताया कि उसे जेल भेज दिया गया है।

अगस्त 2023 में हुई थी गिरफ्तारी

द डेली स्टार को मिले 18 अक्टूबर के एक गोपनीय कांसुलर ज्ञापन के मुताबिक, स्वीटी को 2 अगस्त 2023 को व्यभिचार के आरोपों में हिरासत में लिया गया था। उसके साथ काम करने वाले बांग्लादेशी नागरिक नाजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर को इससे एक दिन पहले सऊदी अरब के साइबर अपराध कानून के तहत हिरासत में लिया गया था।

ज्ञापन के मुताबिक, दोनों अल मजाल कंपनी में काम करते थे। गिरफ्तारी के बाद स्वीटी को जेद्दा की महिला जेल में रखा गया था। हालांकि, स्वीटी ने अपने परिवार को गिरफ्तारी की अलग वजह बताई थी। उसके पिता के मुताबिक, बेटी ने बताया था कि उसकी कुछ महिला सहकर्मियों ने कथित तौर पर अवैध तरीके से कार खरीदी थी और इसी मामले में उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। स्वीटी के रिश्तेदारों को आशंका थी कि उसे गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है।

फांसी से एक दिन पहले पिता से हुई थी आखिरी बातचीत

जेल में रहने के दौरान भी स्वीटी अपने परिवार के संपर्क में थी। कभी वह हर सप्ताह फोन करती थी तो कभी एक महीने के अंतराल पर घर बात होती थी। बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार को पता था कि स्वीटी जेल में है, लेकिन उन्हें आरोपों की पूरी जानकारी नहीं थी। स्वीटी ने घरवालों से कहा था कि जब वह वापस लौटेगी, तब सब कुछ बताएगी।

प्रथम आलो के मुताबिक, स्वीटी के पिता ने उससे 13 अक्टूबर को मगरिब की नमाज के बाद आखिरी बार बात की थी। इस बातचीत में उसने न तो मुकदमे के बारे में बताया और न ही मौत की सजा का कोई जिक्र किया।

द डेली स्टार ने उसके पिता के हवाले से बताया कि स्वीटी को उम्मीद थी कि वह दो महीने के भीतर जेल से बाहर आ सकती है। स्वीटी की बड़ी बहन ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि उसे अपनी बहन को मौत की सजा दिए जाने की जानकारी एक दोस्त की ओर से भेजे गए फेसबुक वीडियो से मिली।

बांग्लादेश को नहीं दी गई थी पहले से जानकारी

स्वीटी अख्तर और नाजरुल इस्लाम अब्दुल बासिर को फांसी दिए जाने के मामले ने बांग्लादेश में नाराजगी पैदा की है। इसकी एक वजह यह भी है कि सऊदी अरब में बांग्लादेश के राजनयिक मिशन का कहना था कि उसे फांसी दिए जाने से पहले इसकी सूचना नहीं दी गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश ने दोनों मामलों में फैसलों की प्रतियां और न्यायिक कार्यवाही से जुड़ी जानकारी मांगी है। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से इन सवालों का जवाब नहीं दिया गया था।

बांग्लादेश के प्रवासी कल्याण मंत्रालय ने 19 अक्टूबर को फांसी दिए गए दोनों लोगों की पहचान सार्वजनिक की थी। इसके बावजूद स्वीटी के परिवार का कहना था कि उन्हें अधिकारियों की ओर से सीधे तौर पर उसकी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली थी।

स्वीटी की मां जोहोरा बेगम ने प्रथम आलो से कहा कि उनकी बेटी ने इतना कुछ सहा, लेकिन किसी को कुछ नहीं बताया। उन्होंने अपनी बेटी का शव वापस बांग्लादेश लाने की गुहार लगाई, ताकि वह उसे आखिरी बार देख सकें।

जिस परिवार ने स्वीटी को विदेश भेजने के लिए कर्ज लिया था, उसे उम्मीद थी कि बेटी पैसे कमाकर लौटेगी और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी। अब वही परिवार उसके शव को वापस लाने की मांग कर रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN