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गैस की कीमत को लेकर सरकार का बड़ा फैसला! जानिए फर्टिलाइजर, CNG और PNG पर होगा क्या असर?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

मुख्य बातें

  • नेचुरल गैस की कीमत को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है
  • सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 से डीपवाटर, अल्ट्रा-डीपवाटर और हाई-प्रेशर, हाई-टेंपरेचर क्षेत्रों से उत्पादित नेचुरल गैस की सीलिंग प्राइस (Ceiling Price) बढ़ा दी है
  • आइए जानते हैं कि इससे फर्टिलाइजर, पावर, CNG और PNG की कीमतों पर क्या पड़ सकता है?

सरकार ने 1 अक्टूबर 2026 से डीपवाटर, अल्ट्रा-डीपवाटर और हाई-प्रेशर, हाई-टेंपरेचर क्षेत्रों से उत्पादित नेचुरल गैस की सीलिंग प्राइस बढ़ाई।

सरकार ने मुश्किल क्षेत्रों से निकलने वाली नेचुरल गैस (Natural Gas) के लिए कीमत की अधिकतम सीमा बढ़ा दी है। डीपवाटर, अल्ट्रा-डीपवाटर और हाई-प्रेशर, हाई-टेंपरेचर जैसे क्षेत्रों से उत्पादित गैस की सीलिंग प्राइस (Ceiling Price) अब $9.89 प्रति MMBtu होगी। पहले यह सीमा $8.90 प्रति MMBtu थी। नया प्राइस सीलिंग (Price Ceiling) 1 अक्टूबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगा। इस बदलाव से ऐसे क्षेत्रों में गैस उत्पादन करने वाली कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है, जहां उत्पादन की लागत सामान्य गैस क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा होती है।

रिलायंस-BP के KG-D6 पर भी लागू होगा नया नियम

नई सीलिंग प्राइस (Ceiling Price) का असर रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) और BP के KG-D6 जैसे डीपवाटर गैस क्षेत्रों पर पड़ेगा। सरकार ने इन मुश्किल क्षेत्रों में गैस की मार्केटिंग और प्राइसिंग को लेकर कंपनियों को ज्यादा स्वतंत्रता दी है, लेकिन कीमत पर एक सरकारी अधिकतम सीमा (Ceiling) लागू रहती है। नई सीमा बढ़ने से ऑफशोर गैस रिसोर्सेस (Offshore Gas Resources) के विकास में कंपनियों के लिए इकोनॉमिक्स (Economics) कुछ बेहतर हो सकती है। खासकर उन परियोजनाओं में जहां तकनीकी चुनौतियों के कारण प्रोडक्शन कॉस्ट (Production Cost) अधिक है।

ONGC और ऑयल इंडिया की पुरानी गैस की कीमत कितनी?

दूसरी तरफ सरकारी कंपनियों ONGC और Oil India (OIL) के पुराने या लीगैसी फील्ड (Legacy Fields) से निकलने वाली गैस के लिए APM व्यवस्था लागू है। अक्टूबर के लिए सरकार ने APM गैस प्राइस $11.22 प्रति MMBtu तय की है, लेकिन वास्तविक कीमत पर $7 प्रति MMBtu की सीलिंग लागू रहेगी। इस गैस का इस्तेमाल मुख्य रूप से फर्टिलाइजर (Fertiliser), पावर (Power) और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन जैसे प्रियॉर्टी सेक्टर्स (Priority Sectors) में होता है।

ONGC और OIL के नए कुएं (Wells) से मिलने वाली गैस के लिए मौजूदा APM प्राइस पर 10% प्रीमियम की अनुमति है। इसलिए $7 की प्रभावी सीलिंग (Ceiling) को आधार मानें तो नए कुएं (Well) की गैस की कीमत अधिकतम करीब $7.70 प्रति MMBtu तक जा सकती है। इसका उद्देश्य सरकारी कंपनियों को नए रिजर्व विकसित करने और प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

APM गैस प्राइसिंग में 2023 में हुआ था बड़ा बदलाव

भारत में लीगैसी गैस (Legacy Gas) की प्राइसिंग व्यवस्था में अप्रैल 2023 में बदलाव किया गया था। इसके बाद APM गैस प्राइस को क्रूड ऑयल इंपोर्ट प्राइस (Crude Oil Import Price) के मंथली एवरेज (Monthly Average) के 10% से जोड़ा गया, साथ ही फ्लोर (Floor) और सीलिंग (Ceiling) तय किए गए। शुरुआत में सीलिंग (Ceiling) $6.50 प्रति MMBtu थी। इसके बाद इसमें हर साल $0.25 की बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया। अप्रैल 2025 में यह सीमा $6.75 और अप्रैल 2026 में बढ़कर $7 प्रति MMBtu हो गई।

इससे पहले APM गैस प्राइस को हर 6 महीने में इंटरनेशनल गैस बेंचमार्क (International Gas Benchmarks) के आधार पर बदला जाता था। इस व्यवस्था में कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। सरकार ने डीपवाटर और दूसरे कठिन क्षेत्रों के लिए अलग प्राइसिंग रिजीम (Pricing Regime) इसलिए रखा है, ताकि तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण हाइड्रोकार्बन रिसोर्सेस (Hydrocarbon Resources) में निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।

CNG से फर्टिलाइजर तक, गैस महंगी होने का असर कहां?

नेचुरल गैस (Natural Gas) भारत की इकोनॉमी (Economy) के कई अहम क्षेत्रों के लिए जरूरी इनपुट है। फर्टिलाइजर (Fertiliser) कंपनियां इसे फीडस्टॉक (Feedstock) के तौर पर इस्तेमाल करती हैं, जबकि पावर जेनरेशन (Power Generation) और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (City Gas Distribution) में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। CNG और PNG की सप्लाई भी इसी क्षेत्र से जुड़ी है। इसलिए डोमेस्टिक गैस प्राइस (Domestic Gas Prices) में बदलाव का असर इन इंडस्ट्रीज (Industries) की इनपुट कॉस्ट (Input Costs) पर पड़ सकता है।

नई डीपवाटर गैस सीलिंग (Gas Ceiling) से मुश्किल ऑफशोर प्रोजेक्ट (Offshore Projects) में प्रोडक्शन इकोनॉमिक्स (Production Economics) को कुछ सहारा मिल सकता है, जबकि APM गैस की $7 सीलिंग से प्रियॉर्टी सेक्टर्स (Priority Sectors) के लिए लिगैसी गैस (Legacy Gas) की कीमत पर कंट्रोल बना रहेगा। कुल मिलाकर सरकार ने डीपवाटर गैस और लीगैसी गैस के लिए अलग-अलग प्राइसिंग फ्रेमवर्क को बरकरार रखते हुए नए उत्पादन और निवेश को प्रोत्साहित करने की कोशिश की है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN