Home rss world hindi ट्रंप के ‘नहीं-हां-नहीं’ से बढ़ा सस्पेंस, हूतियों पर हमले की तैयारी के...

ट्रंप के ‘नहीं-हां-नहीं’ से बढ़ा सस्पेंस, हूतियों पर हमले की तैयारी के बाद आखिर क्यों बदला फैसला?

5
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यमन में ईरान के समर्थन वाले हूती ठिकानों पर हमला करने वाले थे। इसके लिए सेना पूरी तरह तैयार खड़ी थी, लेकिन अचानक उन्होंने फैसला बदलते हुए हमले से पीछे हट गए।

बम लदे थे, विमान तैयार थे और टारगेट भी… फिर अचानक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यमन में हूती ठिकानों पर हमला करने से ठीक पहले पीछे हट गए। जी हां.. अंदरखाने की खबर यही है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप यमन में ईरान के समर्थन वाले हूती ठिकानों पर हमला करने वाले थे। इसके लिए सेना पूरी तरह तैयार थी, लेकिन ट्रंप ने अचानक हमले से इनकार कर दिया। वो भी सऊदी अरब की अपील के बाद ट्रंप ने अपना फैसला बदला और फिलहाल हमले रोकने का फैसला कर लिया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला ट्रंप के लिए मुश्किल बन गया है। सऊदी अरब सैन्य मदद मांग रहा है, लेकिन ट्रंप अपने फैसले पर अडिग नहीं रहे।

नहीं से हां, फिर ना

बताया जा रहा है कि सऊदी अरब के नेता क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप को फोन किया। उन्होंने आगे बढ़ रहे हूतियों के खिलाफ मदद की फिर से अपील की। इस अपील से एक दिन पहले ट्रंप सलाहकारों से मिले थे और हमले के खिलाफ संकेत दिए थे। लेकिन क्राउन प्रिंस से बात के बाद उन्होंने पेंटागन को हवाई हमलों की तैयारी का आदेश दे दिया। रविवार दोपहर तक उन्होंने फिर फैसला बदल लिया। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल हूतियों पर कोई अमेरिकी हवाई हमला नहीं होगा।

हालांकि वाइट हाउस की ओर से इस पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिका का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है और हम हमेशा अपने साथियों की रक्षा करेंगे। लेकिन ट्रंप के यू-टर्न से सस्पेंस बढ़ गया कि आखिर उनके मन में चल क्या रहा है। दूसरी ओर खबर है कि ट्रंप के कई सलाहकार हूतियों के खिलाफ सऊदी अभियान में शामिल होने के खिलाफ थे। शायद यही कारण है कि आखिरी समय में उन्होंने यू-टर्न ले लिया।

ट्रंप ने क्या कहा?

रविवार सुबह फॉक्स न्यूज से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के साथ बड़े युद्ध पर फैसला लेने की स्थिति में हैं। हूतियों के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका उनसे बात कर रहा है और हूतियों ने अभी तक अमेरिका से न लड़ने पर सहमति जताई है। आपको बता दें कि हूतियों ने अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं किया है, लेकिन सऊदी अरब को निशाना बनाया और लगातार बना रहा है। इसलिए वाशिंगटन को रियाद के साथ रिश्ते और सैन्य भागीदारी के खतरे दोनों को संतुलित करना पड़ रहा है। कुछ अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि ईरान के खिलाफ जंग में सऊदी अरब की मदद जरूरी है।

गौरतलब है कि हूती 2014 से यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार से लड़ रहे हैं, जिसे सऊदी अरब का समर्थन है। 2022 के समझौते के बाद लड़ाई कम हुई थी, लेकिन एक बार फिर तेज हो गई। हूतियों ने लाल सागर में सऊदी जहाजों पर नाकाबंदी की और हमले किए। हूतियों ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास रणनीतिक इलाकों पर भी कब्जा कर लिया है। यह लाल सागर का महत्वपूर्ण रास्ता है। इसके अलावा सउदी के खिलाफ ताबड़तोड़ मिसाइल हमले कर रहे हैं, जिससे इलाके में और तनाव बढ़ गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN