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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने SPIEF में पश्चिमी देशों पर तीखा प्रहार किया है। पुतिन ने कहा कि प्रतिबंधों और संपत्तियां फ्रीज होने के डर से BRICS देश अब डॉलर छोड़ अपनी राष्ट्रीय करेंसी अपना रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ग्लोबल फाइनेंस सिस्टम पर पश्चिमी देशों के दबदबे की कड़ी आलोचना की है। सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) के प्लेनरी सेशन में बोलते हुए पुतिन ने दावा किया कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों, संपत्तियों को फ्रीज करने और उनके वित्तीय नियंत्रण के कारण दुनिया भर में अविश्वास बढ़ रहा है। यही वजह है कि तमाम देश, विशेषकर ब्रिक्स (BRICS) देश अब अमेरिकी डॉलर और यूरो पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं।

इंडिया टुडे की पत्रकार गीता मोहन द्वारा मॉडरेट किए गए इस सत्र में पुतिन ने साफ किया कि ब्रिक्स और ‘ग्लोबल साउथ’ का उदय दुनिया के व्यापार, अर्थव्यवस्था और तकनीक को पूरी तरह से बदल रहा है।

पश्चिमी देशों की नीतियों पर तीखा प्रहार

पुतिन ने यूरोप की नीतियों को अदूरदर्शी बताते हुए कहा कि ये पश्चिमी देश मध्य पूर्व समेत दुनिया के कई हिस्सों में अराजकता फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की वित्तीय व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है। अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ जाने वालों को सजा देने के लिए पश्चिमी देश पलक झपकते ही किसी का भी सेटलमेंट, तकनीक और लॉजिस्टिक सिस्टम बंद कर सकते हैं।

यूक्रेन विवाद पर लगे प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए पुतिन ने कहा कि रूस के रिजर्व फंड को फ्रीज करना एक तरह की ‘चोरी’ है। इससे दुनिया की प्रमुख मुद्राओं (डॉलर और यूरो) पर भरोसा हमेशा के लिए टूट गया है। पुतिन के मुताबिक, आज हर देश समझ चुका है कि जिस तरह रूस के वैध डॉलर और यूरो एसेट्स तक पहुंच रोकी गई, वैसे ही कल को उन्हें भी पश्चिमी भुगतान प्रणालियों से बाहर किया जा सकता है।

राष्ट्रीय मुद्राओं की ओर बढ़ता कदम

रूस के राष्ट्रपति ने बताया कि इस डर और अविश्वास के कारण देश अब डॉलर का विकल्प तलाश रहे हैं। देश अब एक-दूसरे के साथ व्यापार के लिए अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। डिजिटल फाइनेंस एसेट्स और सेंट्रल बैंकों की डिजिटल करेंसी की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।

पुतिन ने अपनी बात रखते हुए बताया कि रूस आज अपने प्रमुख साझेदारों के साथ अपनी मुद्रा में ही व्यापार कर रहा है। रूस के कुल निर्यात में करीब 65 फीसदी का लेन-देन सिर्फ ‘रूबल’ (रूसी मुद्रा) में हो रहा है।

G7 से बहुत आगे निकल चुका है ब्रिक्स

पुतिन ने ब्रिक्स की बढ़ती ताकत के आंकड़े सामने रखे और इसे भविष्य की ग्लोबल ग्रोथ का मुख्य इंजन बताया। पिछले 5 सालों में वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में ब्रिक्स देशों का योगदान 49 प्रतिशत रहा है, जबकि G7 देशों का योगदान सिर्फ 18 फीसदी रहा। क्रय शक्ति (PPP) के आधार पर, वैश्विक जीडीपी में ब्रिक्स का हिस्सा अब 40% हो गया है, जबकि G7 की हिस्सेदारी 20% से भी कम रह गई है।

पुतिन ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स ने साल 2020 में ही G7 को पछाड़ दिया था और यह फासला लगातार बढ़ रहा है। आगे चलकर ब्रिक्स की अर्थव्यवस्थाएं 4% सालाना से अधिक की दर से बढ़ेंगी, जबकि G7 देशों की ग्रोथ केवल 1.1% के आसपास रहने का अनुमान है।

व्यापार के नए केंद्र और वैकल्पिक रास्ते

पुतिन ने स्पष्ट किया कि वैश्विक व्यापार और वित्तीय सिस्टम का केंद्र अब पूर्व और दक्षिण की ओर शिफ्ट हो रहा है। दुनिया के व्यापारिक और लॉजिस्टिक रास्ते अब पश्चिमी देशों के नियंत्रण वाले हब को दरकिनार कर रहे हैं। ‘नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर’, ‘ट्रांस-आर्कटिक ट्रांसपोर्टेशन रूट’ और कैस्पियन सागर, मध्य एशिया, ब्लैक सी व मध्य पूर्व से गुजरने वाले नए व्यापारिक रास्ते इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) पर निशाना साधते हुए पुतिन ने कहा कि जब तक पश्चिमी देशों को फायदा हो रहा था, उन्होंने इसके नियम माने और दूसरों को भी इसमें शामिल होने का न्योता दिया। लेकिन जब वे इस प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने लगे, तो उन्होंने इन वैश्विक नियमों से मुंह मोड़ लिया। एकतरफा प्रतिबंधों के कारण आज वैश्विक संस्थाओं से भरोसा पूरी तरह खत्म हो रहा है।

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