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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने मंगलवार को अंकारा एयरपोर्ट पर एयर फ़ोर्स वन के दरवाज़े तक पहुँचकर ख़ुद ट्रंप का स्वागत किया.
किसी विदेशी नेता के स्वागत के लिए अर्दोआन का ख़ुद हवाई अड्डे पर पहुँचना बेहद दुर्लभ माना जाता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुर्की के दौरे पर हैं. राष्ट्रपति ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अगर इस साल नेटो का सालाना शिखर सम्मेलन तुर्की में नहीं हो रहा होता, तो शायद वह उसमें शामिल नहीं होते.
उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात से बहुत निराश हैं कि ईरान के ख़िलाफ़ उनके शुरू किए गए युद्ध में नेटो ने हिस्सा नहीं लिया.
ट्रंप ने कहा, “सच कहूँ तो अगर यह सम्मेलन तुर्की में नहीं हो रहा होता, जहाँ मेरे दोस्त अर्दोआन एक बेहद मज़बूत नेता और शख्स हैं, तो संभव है कि मैं इसमें शामिल नहीं होता. मुझे लगा कि मुझे आना चाहिए क्योंकि मैं जानता हूँ कि उन्होंने इसके लिए पूरी ताक़त लगा दी है.”
ट्रंप ने अर्दोआन को अपना क़रीबी दोस्त बताया और कहा कि उनके मन में तुर्की के राष्ट्रपति के लिए बहुत सम्मान है.
उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ़ इतना कहना चाहता हूँ कि राष्ट्रपति के लिए मेरे मन में बहुत सम्मान है. मेरा मानना है कि यह दोनों देशों के हित में है. आपके साथ होना मेरे लिए सम्मान की बात है. हमारी कई अच्छी बैठकें होंगी, साथ में अच्छा डिनर करेंगे, अच्छा खाना खाएंगे और अच्छा समय बिताएंगे. लेकिन सबसे बढ़कर हम बहुत काम करेंगे और अपने-अपने देशों के लिए अच्छे काम करेंगे.”
अंकारा में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाक़ात के बाद पत्रकारों ने अर्दोआन से तुर्की पर अमेरिकी प्रतिबंध को लेकर सवाल पूछा था. दरअसल, तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम ख़रीदा था. इसके बाद अमेरिका ने “काउंटरिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरीज़ थ्रू सैंक्शंस एक्ट के तहत प्रतिबंध लगा दिए थे.
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हटेगा प्रतिबंध
ये प्रतिबंध 2020 से लागू हैं. अमेरिका ने इसी प्रतिबंध के तहत तुर्की से एफ़-35 फाइटर जेट का सौदा रद्द कर दिया था. ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका यह प्रतिबंध हटा देगा.
उन्होंने कहा, “मैं आपको बता सकता हूं कि हम प्रतिबंध हटा रहे हैं, ठीक है? मैं नहीं चाहता कि अर्दोआन इस सवाल का जवाब देने में अपना समय बर्बाद करें, क्योंकि हम मार्को रुबियो, स्कॉट बेसेंट, पीट हेगसेथ और बाक़ी सभी के साथ बहुत क़रीबी से काम कर रहे हैं. हम प्रतिबंध हटा रहे हैं. अब ऐसा करने का समय आ गया है.”
उन्होंने कहा, “हम अपने दोस्तों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते. बात इतनी सी है. ऐसे बहुत से लोग हैं, जिन पर हम प्रतिबंध लगा सकते हैं, लेकिन हम अपने दोस्तों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहते.”
यह प्रतिबंध हटते ही तुर्की अमेरिका से एफ-35 फाइटर जेट ख़रीद सकेगा लेकिन इसराइल प्रतिबंध हटाए जाने से ख़ुश नहीं है.
अमेरिकी राष्ट्रपति के प्रतिबंध हटाने की घोषणा के कुछ घंटों बाद ही इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस संभावित सौदे का विरोध किया.
सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने चेतावनी दी कि अमेरिका के सबसे उन्नत लड़ाकू विमान की बिक्री तुर्की को अमेरिका का मित्र राष्ट्र नहीं बना देती.
राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन के साथ बढ़ते विवाद के बीच नेतन्याहू ने तुर्की को ऐसा शासन बताया जो मुस्लिम ब्रदरहुड की विचारधारा से प्रभावित है जो अमेरिका से नफ़रत करता है.
नेतन्याहू ने सीएनएन की पत्रकार डाना बैश से कहा, “वह अमेरिका का आदर्श सहयोगी नहीं है. वह मेरे देश, दुनिया के एकमात्र यहूदी राष्ट्र को नष्ट करने की धमकी देता है.”
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने पिछले सप्ताह सीएनएन तुर्क को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि इसराइल “मानवता पर ऐसा बोझ बन गया है, जिसे अब और नहीं उठाया जा सकता.”
नेतन्याहू ने कहा, “यह शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने वाली ताक़त नहीं है. अगर आप उन्हें यह क्षमता देंगे, तो उसके बाद आक्रामकता ही देखने को मिलेगी.”
इससे पहले फॉक्स एंड फ्रेंड्स के साथ इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा, ”तुर्की एक महान देश है, लेकिन वहाँ राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन की सरकार है. अर्दोआन इसराइल के ख़ात्मे की बात करते हैं, साइप्रस के एक हिस्से पर क़ब्ज़ा चाहते हैं, ग्रीस को धमकाते हैं, हमास का समर्थन करते हैं और मुस्लिम ब्रदरहुड का समर्थन करते हैं.”
नेतन्याहू ने कहा कि मध्य-पूर्व में शक्ति संतुलन आख़िरकार इसराइल की हवाई बढ़त और क्षेत्र में अमेरिका की मौजूदगी से सुरक्षित रहता है.
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इसराइली मीडिया ने बताया क्यों बढ़ेगी टेंशन
इसराइल के प्रमुख अंग्रेज़ी अख़बार यरूशलम पोस्ट ने सात जुलाई को एक संपादकीय छापा था, जिसमें बताया है कि तुर्की को अगर अमेरिका एफ़-35 देता है तो क्यों यह चिंता बढ़ाने वाला होगा.
यरूशलम पोस्ट ने लिखा है, ”अर्दोआन का रिकॉर्ड इसराइल के लिए चिंतित होने की हर वजह देता है. सात अक्टूबर के जनसंहार के बाद से उन्होंने हमास को एक मुक्ति समूह कहा है, इसराइल को आतंकी राज्य बताया है, नेतन्याहू की तुलना हिटलर से की है और कहा है कि तुर्की इसराइल में प्रवेश कर सकता है जैसे वह लीबिया और नागोर्नो-काराबाख में गया था.”
यरूशलम पोस्ट ने लिखा है, ”ट्रंप और अर्दोआन के बीच कामकाजी रिश्ता हो सकता है, लेकिन यह नेताओं के बीच निजी केमिस्ट्री का सवाल नहीं है. वॉशिंगटन और अंकारा के बीच कुछ ऐसे क्षेत्र हो सकते हैं, जहां वे सहयोग कर सकते हैं.”
”तुर्की रणनीतिक रूप से अब भी महत्वपूर्ण है. वह यूरोप, रूस, ब्लैक सी, मध्य-पूर्व और भूमध्य सागर के बीच स्थित है. उसके पास बड़ी सेना और वास्तविक प्रभाव है. इनमें से कोई भी वजह अर्दोआन को अमेरिका का सबसे उन्नत एफ-35 लड़ाकू विमान देने को सही नहीं ठहराती.”
यरूशलम पोस्ट ने लिखा है, ”एफ़-35 केवल एक फाइटर जेट नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सैन्य प्लेटफॉर्म है. इससे तुर्की को स्टेल्थ क्षमता, लंबी दूरी तक पहुँच, ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने की क्षमता और भरोसे पर आधारित सैन्य तंत्र का हिस्सा बनने का मौक़ा मिलेगा. लेकिन यह भरोसा तब टूट गया था, जब तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम ख़रीदने का फ़ैसला किया.”
”इसराइल के लिए यह मुद्दा उसके अस्तित्व से जुड़ा है. इसराइल की हवाई बढ़त कोई विलासिता नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा की बुनियादी ज़रूरत है. इसी के सहारे छोटा-सा देश अपने चारों ओर मौजूद ख़तरों के बीच बड़े युद्ध को रोकने की कोशिश करता है.”
”इससे इसराइल ईरान के हथियारों के काफिलों पर हमला कर सकता है, हिज़्बुल्लाह को रोक सकता है, सीरिया पर नज़र रख सकता है, अपने हवाई क्षेत्र की रक्षा कर सकता है और विरोधी सेनाओं को यह संदेश दे सकता है कि वे बल प्रयोग करके क्षेत्र का नक्शा नहीं बदल सकते. इस बढ़त को कमज़ोर करना दुस्साहस को बढ़ावा देगा.”
इसराइल के पास है एफ़-35
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ट्रंप के पहले कार्यकाल में उपराष्ट्रपति रहे माइक पेंस ने तुर्की को एफ़-35 देने का विरोध किया है.
माइक पेंस ने एक्स पर लिखा है, ”2017 में तुर्की ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम ख़रीदा था. इसके बावजूद अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना और तुर्की को एफ़-35 लड़ाकू विमान उपलब्ध कराने का रास्ता साफ़ करना एक रणनीतिक भूल होगी. इससे अमेरिका, इसराइल और नेटो की सुरक्षा कमज़ोर होगी. राष्ट्रपति, कृपया ऐसा मत कीजिए.”
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ”तुर्की ऐसे समझौते के लिए तैयार है, जिसके तहत एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर अमेरिका को तकनीकी निगरानी की अनुमति दी जा सकती है. लेकिन तुर्की इन मिसाइलों को अपने जखीरे में बनाए रखना चाहता है, ताकि तुर्की की राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा पैदा करने वाली असाधारण परिस्थितियों में उनका इस्तेमाल किया जा सके.”
तुर्की को एफ-35 हासिल करने की राह में दूसरे देशों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है.
इसराइल और ग्रीस इस मामले में बहुत सतर्क हैं. एफ़-35 को दुनिया का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान माना जाता है. मध्य-पूर्व में इसराइल ही एकमात्र देश है, जिसके पास एफ-35 है और वह अपनी सुरक्षा के लिए चाहता है कि यह स्थिति बनी रहे.
नेटो शिखर सम्मेलन से पहले ट्रंप ने तुर्की के उस अनुरोध के प्रति भी समर्थन जताया, जिसमें वह जीई एयरोस्पेस एफ़110 इंजन हासिल और असेंबल करना चाहता है.
ये इंजन तुर्की के स्वदेशी कान लड़ाकू विमान के लिए अहम हैं. इससे पहले वॉशिंगटन हुरजेट ट्रेनर विमान के लिए एफ़404 इंजनों के निर्यात को मंज़ूरी दे चुका था. अलग से, तुर्की 40 एफ-35A विमान और 40 एफ-16V लड़ाकू विमान भी ख़रीदना चाहता है.
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