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सीबीआई ने शुक्रवार को त्विषा शर्मा मौत मामले में उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को भोपाल की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया. अदालत ने दोनों आरोपियों को पांच दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया.
अदालत ने जांच एजेंसी की उस दलील को स्वीकार किया जिसमें कहा गया था कि मामले की कई कड़ियों की जांच अभी बाकी है और अभियुक्तों को एक साथ बैठाकर पूछताछ की ज़रूरत है.
इसके पहले त्विषा शर्मा के पति समर्थ सिंह को 23 मई को गिरफ़्तार कर पुलिस रिमांड पर भेजा गया था. बाद में मध्य प्रदेश सरकार के मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद उन्हें केंद्रीय जांच एजेंसी की हिरासत में दिया गया.
शुक्रवार को भोपाल में जस्टिस शोभना भलावे की अदालत ने उनकी सीबीआई रिमांड पांच दिन के लिए और बढ़ा दी. इसी आदेश के तहत गिरिबाला सिंह को भी पांच दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा गया है.
त्विषा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “सीबीआई ने अदालत से दोनों आरोपियों की पांच पांच दिन की रिमांड मांगी थी.”
उन्होंने आगे कहा कि, “सीबीआई ने अदालत को बताया कि मामले में सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका है, दोनों आरोपी प्रभावशाली हैं और घटना से जुड़े कई पहलुओं की जांच शुरू से की जानी है.”
गिरिबाला सिंह की गिरफ़्तारी
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इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार 28 मई को सीबीआई ने त्विषा शर्मा की सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को गिरफ़्तार किया था.
सीबीआई की मुख्य सूचना अधिकारी बीना यादव ने बीबीसी को बताया था कि, “भोपाल स्थित घर में कई घंटे तक पूछताछ और जांच के बाद गिरिबाला सिंह को गिरफ़्तार किया गया.”
गिरफ्तारी से एक दिन पहले यानी बुधवार 27 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम ज़मानत रद्द कर दी थी.
अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध सामग्री और जांच की स्थिति को देखते हुए उन्हें राहत देना उचित नहीं था.
कई सवालों के जवाब मिलने बाकी
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12 मई को त्विषा शर्मा की मौत के बाद अब भी कई सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं.
इस मामले में बीते दिनों कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए. सबसे पहले त्विषा की सास गिरिबाला सिंह को अग्रिम ज़मानत मिली, जबकि उनके बेटे और त्विषा के पति समर्थ सिंह को यह राहत नहीं मिली.
एक ओर समर्थ सिंह 22 मई तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहे, वहीं दूसरी ओर गिरिबाला सिंह ने कई बार मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि त्विषा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं और उनका इलाज चल रहा था.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि त्विषा नशीले पदार्थों का सेवन करती थीं.
दूसरी तरफ़ त्विषा शर्मा के परिजन लगातार उनकी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते रहे हैं.
परिवार ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह पर त्विषा पर गर्भपात का दबाव बनाने, दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं.
त्विषा के पिता नवनिधि शर्मा ने बीबीसी से कहा था, “मेरी बेटी बहुत हंसमुख और खुशमिजाज़ थी. लेकिन शादी के बाद से ही पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह उसे लगातार परेशान कर रहे थे.”
परिवार ने ससुराल पक्ष पर सबूतों से छेड़छाड़ और जांच को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप भी लगाए हैं. हालांकि अभियुक्त पक्ष ने इन आरोपों से इनकार किया है.
शुरुआती जांच पर सवाल
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त्विषा शर्मा का अंतिम संस्कार उनकी मौत के 12 दिन बाद भोपाल में किया गया था.
इससे पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर एम्स नई दिल्ली के विशेषज्ञों के एक पैनल ने उनका दूसरा पोस्टमार्टम किया था.
अब जांच सीबीआई के हाथ में है. जांच एजेंसी के सामने कई ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब अभी मिलने बाकी हैं.
इनमें कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल फ़ोन डेटा, टावर लोकेशन, इंटरनेट गतिविधियों और सीसीटीवी फुटेज से जुड़े पहलू शामिल हैं.
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि 12 मई की रात घर के भीतर कौन मौजूद था, किस समय कौन किस कमरे में गया, घटना से पहले और बाद में किससे संपर्क किया गया और क्या घटनास्थल या अन्य साक्ष्यों में किसी तरह का बदलाव किया गया था.
मामले में मध्य प्रदेश पुलिस की शुरुआती जांच पर भी त्विषा के परिजनों ने सवाल उठाए हैं.
ऐसे में यह देखना बाकी है कि सीबीआई अपनी जांच में इन आरोपों और आपत्तियों को किस तरह परखती है.
क्या है पूरा मामला?
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33 वर्षीय त्विषा शर्मा का शव 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल में मिला था.
त्विषा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं और उनकी शादी दिसंबर 2025 में भोपाल के वकील समर्थ सिंह से हुई थी.
त्विषा के परिवार ने पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक उत्पीड़न और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं.
परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही त्विषा को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था.
मामले की शुरुआती जांच भोपाल पुलिस ने की थी. बाद में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया.
इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया और सीबीआई ने अपनी एफ़आईआर दर्ज कर जांच शुरू की.
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