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नज़र न आने वाला कैमरा: कहीं आप तो एआई स्मार्ट चश्मों से चोरी-छिपे रिकॉर्ड नहीं हो रहे हैं

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Source :- BBC INDIA

अक्सर जिन लोगों का वीडियो बनाया जाता है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती और न ही उनसे इजाज़त ली जाती है.

इमेज स्रोत, Joan Cros/NurPhoto via Getty Images

दिल्ली में रहने वाले 29 साल के ट्रांसजेंडर स्काई को एआई स्मार्ट चश्मे से उनकी जानकारी के बिना रिकॉर्ड किया गया था.

इस अनुभव के बारे में स्काई कहते हैं, “ऐसा लगा जैसे मैं फिर से स्कूल में हूं और मुझे परेशान किया जा रहा है. लेकिन इस बार यह सब बहुत बड़े स्तर पर हो रहा था.”

यह घटना अप्रैल की है. स्काई दिल्ली के जंतर-मंतर पर ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन क़ानून, 2026 के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शन में शामिल होने गए थे.

स्काई के मुताबिक़, एक व्यक्ति उनके पास आया और उन्हें ‘अनिरुद्धाचार्य’ और ‘पूकी बाबा’ कहने लगा.

‘पूकी बाबा’ हिंदू धर्मगुरु अनिरुद्धाचार्य के लिए इंटरनेट पर इस्तेमाल होने वाला एक लोकप्रिय नाम है. स्काई को उस समय पता नहीं था कि उनकी रिकॉर्डिंग हो रही है.

रील वायरल हुई तब पूरी बात बता चली

करीब एक महीने बाद इस घटना की रील इंस्टाग्राम पर वायरल हुई, तब उन्हें पता चला कि उनका वीडियो बनाया गया था.

इसी प्रदर्शन में उस इंस्टाग्राम अकाउंट को चलाने वाले व्यक्ति ने ट्रांसफ़ेमिनिन ग्राफ़िक डिज़ाइनर शुबनम की भी चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग की थी.

शुबनम के वीडियो पर कई लोगों ने उन्हें अपशब्द कहे.

अगले कुछ दिनों में स्काई ने देखा कि दोनों वीडियो के कुछ सेकंड के हिस्से को कई दूसरे अकाउंट ने एडिट करके दोबारा पोस्ट किया. उनसे मीम भी बनाए गए.

अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर इन वीडियो को लाखों बार देखा गया.

स्काई का कहना है कि वीडियो और उन पर लिखे गए कमेंट से उन्हें अपमानित महसूस हुआ. उन्हें बहुत अधिक तनाव और ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा.

डेटिंग ऐप पर अनजान लोगों ने उनका मज़ाक उड़ाया. असल ज़िंदगी में भी लोगों ने उन्हें परेशान किया.

यह घटना सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने के एक बढ़ते चलन का हिस्सा है. इसमें स्मार्ट ग्लास पहनकर सार्वजनिक जगहों पर लोगों की चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग की जाती है.

अक्सर जिन लोगों का वीडियो बनाया जाता है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती और न ही उनसे इजाज़त ली जाती है.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

‘सार्वजनिक जगहों पर मुझे हर समय डर लगने लगा’

बीबीसी ने ऐसे तीन लोगों से बात की, जिनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं का उनकी मानसिक हालत पर गंभीर असर पड़ा.

इनमें कोलकाता की 35 साल की लेक्चरर बिदिशा भी शामिल हैं.

बिदिशा की शिकायत पर एक व्यक्ति को गिरफ़्तार भी किया गया है. माना जा रहा है कि भारत में इस तरह की घटना को लेकर दर्ज हुआ यह पहला पुलिस मामला हो सकता है.

11 जून की शाम बिदिशा शहर की एक कम रोशनी वाली गली से अपने घर जा रही थीं. उसी समय एक व्यक्ति ने उनका रास्ता रोक लिया.

उसने बिदिशा की तारीफ़ की, उनका इंस्टाग्राम अकाउंट मांगा और उनसे बात करने की ज़िद करने लगा.

बिदिशा ने दिलचस्पी नहीं दिखाई, लेकिन वह व्यक्ति लगातार उनके पीछे पड़ा रहा. आख़िरकार बिदिशा वहां से निकलने में सफल रहीं.

बिदिशा ने बीबीसी से कहा, “उसके हाथ में ऐसा कोई कैमरा या दूसरा उपकरण दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे मुझे लगे कि वह रिकॉर्डिंग कर रहा है.”

अगले दिन बिदिशा के एक स्टूडेंट ने उन्हें बताया कि इस मुलाक़ात का वीडियो इंस्टाग्राम पर घूम रहा है.

बिदिशा को पता चला कि उस व्यक्ति ने पीछे से उनका पीछा करते हुए चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग शुरू कर दी थी. उसने दोनों के बीच हुई पूरी बातचीत रिकॉर्ड की थी.

उसने बाद में वीडियो को एडिट कर दिया. वीडियो से वे हिस्से हटा दिए गए, जिनमें वह लगातार बिदिशा के पीछे पड़ रहा था और बिदिशा असहज दिखाई दे रही थीं.

एडिट किए गए वीडियो को देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे दोनों अपनी मर्ज़ी से आराम से बात कर रहे हों.

बीबीसी ने ऐसे तीन लोगों से बात की, जिनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं का उनकी मानसिक हालत पर गंभीर असर पड़ा.

इमेज स्रोत, David Paul Morris/Bloomberg via Getty Images

वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने इसे “उम्र में बड़ी महिलाओं से कैसे बात शुरू करें” सिखाने वाले वीडियो के तौर पर पोस्ट किया था.

वीडियो के कमेंट सेक्शन में कई पुरुषों ने बिदिशा के शरीर और शक्ल-सूरत पर टिप्पणियां कीं.

कई लोगों ने वीडियो बनाने वाले व्यक्ति से पूछा कि सड़क पर महिलाओं से बात करने के लिए उससे “कोचिंग” कैसे ली जा सकती है.

बिदिशा को अपने दोस्तों के बताने के बाद पता चला कि उस व्यक्ति ने स्मार्ट चश्मा पहन रखा था.

बिदिशा सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करतीं. इसलिए उन्होंने शुरुआत में न तो वीडियो देखा और न ही उस पर आए कमेंट पढ़े. पहले उन्हें मामला इतना गंभीर भी नहीं लगा.

लेकिन कई दोस्तों और स्टूडेंट ने उन्हें वीडियो पर आए परेशान करने वाले कमेंट के बारे में बताया.

उन्होंने यह भी बताया कि वीडियो बनाने वाला व्यक्ति इसे सोशल मीडिया पर डालकर पैसे कमा सकता है. इसके बाद बिदिशा को मामले की गंभीरता समझ आई.

उन्होंने कहा, “मुझे सबसे ज़्यादा परेशानी इस बात से हुई कि यह महिलाओं को एक चीज़ समझने वाले किसी महिला-विरोधी ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ की योजना का हिस्सा था.”

अगस्त में एक सार्वजनिक जगह पर एक और युवक हाथ में फ़ोन लेकर बिदिशा के पास आया.

बिदिशा को डर लगा कि कहीं दोबारा उनकी चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग तो नहीं की जा रही. वह वहां से भाग गईं.

इसके बाद उन्होंने पुलिस के पास जाने का फ़ैसला किया. लेकिन पुलिस में शिकायत दर्ज कराना भी आसान नहीं था.

बिदिशा के मुताबिक़, पुलिस शुरुआत में एफ़आईआर दर्ज करने को तैयार नहीं थी.

पुलिस ने उनसे पूछा कि क्या वह शादीशुदा हैं और क्या वह आरोपी को पहले से जानती थीं.

कई घंटे तक कोशिश करने के बाद आख़िरकार उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज हुई.

उस पर ग़लत तरीक़े से रास्ता रोकने, चोरी-छिपे देखने या रिकॉर्डिंग करने और पीछा करने के आरोप लगाए गए.

मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि एफ़आईआर दर्ज होने के कुछ दिन बाद अभियुक्त को गिरफ़्तार कर लिया गया.

उसे एक दिन के लिए पुलिस हिरासत में रखा गया. इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और बाद में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया.

चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग पर कोई ख़ास क़ानून नहीं

नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाली मीशी चौधरी ने बीबीसी से कहा कि एआई चश्मों का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.

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टेक्नोलॉजी से जुड़े मामलों की वकील और इंटरनेट पर नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वालीं मीशी चौधरी ने बीबीसी से कहा कि एआई चश्मों का ग़लत इस्तेमाल हो सकता है.

इसके बावजूद भारत के मौजूदा क़ानून ऐसी चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं.

उनके मुताबिक़, ऐसी रिकॉर्डिंग करना “अक्सर बहुत ग़लत होता है, लेकिन क़ानून में इसे साफ़ तौर पर अपराध नहीं माना गया है.”

उन्होंने कहा कि वीडियो में क्या दिखाया गया है, इसके आधार पर मानहानि, चोरी-छिपे देखने या रिकॉर्डिंग करने, पीछा करने और आपराधिक धमकी जैसे अपराधों का मामला बन सकता है.

लेकिन किसी सार्वजनिक जगह पर चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग करने से साफ़ तौर पर रोकने वाला कोई ख़ास क़ानून नहीं है.

इसी वजह से निजता के उल्लंघन से जुड़े ऐसे मामले क़ानूनी रूप से ऐसी स्थिति में फंस जाते हैं, जहां यह साफ़ नहीं होता कि किस क़ानून के तहत कार्रवाई की जाए.

वहीं, ऐसी घटनाओं का सामना करने वाले लोगों पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है.

बिदिशा कहती हैं कि इस घटना के बाद उन्हें हर समय डर और शक रहने लगा. अब सार्वजनिक जगहों पर जाने से भी उन्हें घबराहट होती है.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

पुणे में एक नाबालिग की रिकॉर्डिंग

SOURCE : BBC NEWS