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नाक और साइनस के लिए फायदेमंद है भ्रामरी प्राणायाम? न्यूरोसर्जन ने बताए फायदे और सही तरीका

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Source :- LIVE HINDUSTAN

भ्रामरी प्राणायाम योग की एक सरल श्वास तकनीक है, जिसमें सांस छोड़ते समय मधुमक्खी जैसी भिनभिनाहट की आवाज निकाली जाती है। इसे हम्मिंग बी ब्रीदिंग भी कहते हैं। न्यूरोसर्जन डॉ. प्रशांत कैटकोल ने इस प्राणायाम के फायदे और सही तरीका बताया है। 

योग को सेहत के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। भ्रामरी प्राणायाम योग की एक खास श्वसन अभ्यास है। ‘भ्रामरी’ शब्द संस्कृत के ‘भ्रमर’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है मधुमक्खी। इस प्राणायाम में सांस छोड़ते समय मधुमक्खी के भिनभिनाहट जैसी आवाज निकाली जाती है। इस ध्वनि के कारण शरीर और खासतौर से सिर के आसपास कंपन महसूस होता है। यह प्रेक्टिस मन को शांत करने, मानसिक तनाव कम करने और एकाग्रता बढ़ाने में मददगार माना जाता है। इंस्टाग्राम पर न्यूरोसर्जन डॉक्टर प्रशांक कैटकोल ने नाक और साइनस के लिए भ्रामरी प्राणायाम के फायदे बताए हैं।

क्या कहते हैं डॉक्टर

हमिंग की आवाज सिर्फ एक आवाज नहीं है। अगर इसे ‘भ्रामरी’ के तरीके से किया जाए, तो यह आपकी नाक और साइनस के अंदर होने वाली प्रक्रियाओं को बदल देता है। एक्सपर्ट ने बताया कि साल 2002 में स्टॉकहोम के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने स्वस्थ वयस्कों की नाक के रास्ते में नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा मापी। सामान्य रूप से सांस लेने की तुलना में हमिंग करते समय नाक में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर लगभग 15 गुना बढ़ गया। यह स्टडी ‘अमेरिकन जर्नल ऑफ रेस्पिरेटरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन’ में एडी वीट्जबर्ग और जॉन लुंडबर्ग द्वारा प्रकाशित किया गया था, जिसका शीर्षक था – ‘हमिंग से नाक में नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर काफी बढ़ जाता है।’

नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है और इसका संबंध ‘वेगस नर्व’ को उत्तेजित करने से भी है। यह शरीर को तनाव से शांत अवस्था में लाने का एक जरिया है। योग परंपरा में ‘भ्रामरी प्राणायाम’ की प्रेक्टिस बहुत पहले से की जा रही है, जबकि इसके कंपन से होने वाले प्रभावों को मापने की तकनीक बहुत बाद में आई। सटीक रूप से कहें तो नाक के रास्तों में नाइट्रिक ऑक्साइड का लेवल 15 गुना बढ़ा हुआ पाया गया। हार्ट रेट, ब्लडप्रेशर और कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) पर इसके प्रभावों का पता भ्रामरी अभ्यास पर हुए अलग-अलग शोधों से चलता है।

कैसे करें भ्रामरी प्राणायाम की शुरुआत

पूरी तरह से सांस अंदर लें और फिर अपने होंठ बंद करके धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें और तब तक हमिंग करें जब तक कि पूरी सांस बाहर न निकल जाए। तीन राउंड से शुरुआत करें और धीरे-धीरे इसे दो से तीन मिनट तक बढ़ाएं।

स्टेप्स

-सबसे पहले शांत और साफ जगह पर बैठ जाएं।

– सुखासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठें।

– अपनी आंखें धीरे-धीरे बंद करें।

– दोनों हाथों के अंगूठों से कानों को हल्के से बंद करें।

– नाक से गहरी सांस लें।

– मुंह बंद रखते हुए सांस छोड़ें और ‘म्म्म्म…’ की आवाज निकालें।

– ध्वनि के कंपन को महसूस करें।

– इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराएं।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य के लिए लिखा गया है। ये किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का ऑप्शन नहीं है। किसी भी हेल्थ प्रॉब्लम से जुड़े सवालों के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN