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न गोली न बम…हैकर्स ने फ्रिज का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ाकर सड़ा दिया खाना; फ्रांस में अजीबोगरीब साइबर अटैक

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Source :- LIVE HINDUSTAN

फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट में 11-12 अक्टूबर की रात को हैकरों ने फ्रीजर को हीटर में बदल दिया। दूर बैठकर उन्होंने रेफ्रिजरेशन सिस्टम को गर्म कर दिया, जिससे तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। आइसक्रीम पिघल गई, खाना खराब हो गया और कुछ जगहों पर आग लगने की खबरें हैं।

फ्रांस से हैरान करने वाली एक खबर सामने आई है। यहां के सैकड़ों सुपरमार्केट में 11 और 12 अक्टूबर की रात को एक बड़ा साइबर अटैक हुआ। हैकरों ने दूर से रेफ्रिजरेशन सिस्टम को नियंत्रित करके फ्रीजर को हीटर जैसा बना दिया। मशीनें चल रही थीं, लेकिन वे अब स्टोर मालिकों के आदेश नहीं मान रही थीं। तापमान तेजी से बढ़ा और कई जगह 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह वही गर्मी है जो दिल्ली में मई के महीने में पड़ती है। बाद सुपरमार्केट मैनेजरों ने देखा कि आइसक्रीम और दूसरे जमे हुए खाने पिघलने लगे। खाना खराब हो गया। कुछ स्टोर में आग लगने की खबरें भी आईं। हमला इतना तेज और व्यापक था कि कई सुपरमार्केट एक साथ प्रभावित हुए।

बता दें कि फ्रीजर का काम खाना ठंडा रखना होता है। लेकिन उस रात मशीनें चलते हुए भी तापमान बढ़ा रही थीं। कंट्रोलर हर कमांड मान रहा था, बस वह कमांड स्टोर के मैनेजर का नहीं, बल्कि हैकरों का था। हैकर दूर बैठकर सिस्टम को गर्म कर रहे थे।

एक साल पहले बता दी गई थी कमजोरी

इंडिया टुडे से बात करते हुए इजरायली साइबर सिक्योरिटी कंपनी क्लारोटी के CTO और टीम82 के हेड आमिर प्रेमिंगर ने बताया कि उन्होंने एक साल से भी ज्यादा पहले डैनफॉस कंपनी को इस कमजोरी के बारे में सूचना दी थी। इस कमजोरी से हमलावर बिना सही पासवर्ड के सिस्टम में घुस सकता था। डैनफॉस ने इस कमजोरी को ठीक करके सॉफ्टवेयर अपडेट जारी कर दिया था। लेकिन फिक्स निकलने के बावजूद समस्या खत्म नहीं हुई। प्रेमिंगर ने कहा कि इसके बावजूद इंटरनेट पर जो बहुत सारे डिवाइस हम देखते हैं, वे उस समय भी कमजोर थे।

डैनफॉस की एडवाइजरी में क्या चेतावनी?

डैनफॉस की अपनी एडवाइजरी में साफ लिखा था कि उनके रेफ्रिजरेशन कंट्रोलर में एक सुरक्षा कमी है। इस कमी से हमलावर पासवर्ड प्रोटेक्शन को बायपास कर सकते हैं। इस कमजोरी को 10 में से 8.2 रेटिंग दी गई थी। एडवाइजरी में यह भी चेतावनी दी गई थी कि हमलावर इंटरनल आईपी एड्रेस, यूजरनेम और स्टोर का नाम जैसी जानकारी भी देख सकते हैं। ये कंट्रोलर ऑपरेटर को दूर से ही तापमान और शेड्यूल बदलने की सुविधा देते हैं। अगर हमलावर को एक्सेस मिल जाए तो वे आसानी से खाने को ठंडा रखने वाले सिस्टम को गर्म कर सकते हैं।

कितने डिवाइस खुले?

क्लारोटी को अपने पुराने स्कैन में 2765 डैनफॉस कंट्रोलर ऑनलाइन मिले थे। बाद में रॉयटर्स को शोडान पर कम से कम 4500 डैनफॉस इंटरफेस दिखे। ये अलग-अलग स्कैन हैं। ये संख्या बताती है कि कितने डिवाइस इंटरनेट पर खुले थे, न कि कितने हैक हो चुके थे। प्रेमिंगर ने समझाया कि सेन्सिस और शोडान सिर्फ स्कैन करके रिपोर्ट करते हैं। वे बता सकते हैं कि कौन सा कंट्रोलर ऑनलाइन है, लेकिन यह कन्फर्म नहीं कर सकते कि वह कमजोर है या नहीं। फिर भी, जितने ज्यादा डिवाइस इंटरनेट पर खुले रहेंगे, हमलावरों को उतने ही ज्यादा रास्ते मिल सकते हैं। फ्रांसीसी स्कैनिंग फर्म ओनीफे ने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने जिन इंटरफेस की जांच की, उनमें से सिर्फ कुछ ही लेटेस्ट सॉफ्टवेयर चला रहे थे।

हैकर्स ने कैसे किया अटैक?

प्रेमिंगर ने साफ कहा कि हमारे पास इस बारे में कोई तथ्य नहीं है कि हमलावर कैसे अंदर आए और वास्तव में डीफ्रॉस्ट प्रक्रिया शुरू करने में सक्षम थे। उन्होंने दो संभावनाएं बताईं, दोनों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। पहली संभावना है कि डिवाइस पर डिफॉल्ट पासवर्ड लगा था, जिसे हैकरों ने क्रैक किया या कहीं से लीक हो गया। दूसरी संभावना है कि क्लारोटी ने जो कमजोरी बताई थी, हैकरों ने उसे फिर से बना लिया। क्योंकि पूरी टेक्निकल डिटेल्स कभी पब्लिक नहीं की गई थीं। प्रेमिंगर ने क्लारोटी के एक ब्लॉग पोस्ट का भी जिक्र किया जिसमें दावा किया गया था कि AI लगभग 6 डॉलर में 28 मिनट में उस कमजोरी का पता लगा सकता है।

सिर्फ रेफ्रिजरेशन तक नहीं

बताया जा रहा है कि यह खतरा सिर्फ सुपरमार्केट तक सीमित नहीं। जुलाई 2026 में अमेरिका में कम से कम सात राज्यों की पानी और वेस्टवॉटर यूटिलिटी पर भी ऐसे हमले हुए थे। हमलावरों ने सेटिंग्स और पासवर्ड बदल दिए थे, जिससे पानी का प्रेशर गिरा और बाढ़ आई। फ्रांसीसी CERT ने अलर्ट जारी किया है कि हमले अभी भी जारी हो सकते हैं। इसमें डैनफॉस, कोपलैंड और डिक्सेल के कंट्रोलर शामिल हैं। सिर्फ फैक्टरी रीसेट काफी नहीं है। डिवाइस फिर से हैक हो सकता है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN