Home rss sports hindi परिवार के पास BPL कार्ड, उधार की गन…एशियन गेम्स में दो गोल्ड...

परिवार के पास BPL कार्ड, उधार की गन…एशियन गेम्स में दो गोल्ड मेडल, कमाल की है नीरू ढांडा की कहानी

5
0

Source :- LIVE HINDUSTAN

जब नीरू ढांडा की मां को पता चला कि उनकी बेटी ने एशियन गेम्स में अपना पहला गोल्ड मेडल जीत लिया है, तब वह न तो टीवी पर मुकाबला देख रही थीं और न ही फोन पर नजर रख रही थीं। उनके पास इनमें से कोई भी चीज नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, नीरू की मां उस समय परिवार के लिए राशन की दुकान से गेहूं लेने गई थीं

‘दस दिन पहले नीरू अस्पताल में भर्ती थी, कई दिनों तक उसने ठीक से खाना भी नहीं खाया…पर आज फाइनल में उसने अपनी असली ताकत दिखाई। वो अलसी चैंपियन है।’, मंगलवार को जब नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स में पहला गोल्ड जीता तो ये बातें मीडिया के सामने उनके कोच पीटर विल्सन कह रहे थे। अगर अब तक आपने नीरू ढांडा का नाम नहीं सुना है तो आप अपने आपको स्पोर्ट्स लवर कहना तो बिल्कुल बंद कर दीजिए। नीरू ने जापान में चल रहे एशियन गेम्स में भारत के लिए मेडल्स की झड़ी लगा दी है। नीरू ने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल अपने नाम किया है।

देश की नई शूटिंग स्टार

नीरू ढांडा हरियाणा के जींद जिले से निकलकर देश की शूटिंग स्टार बनकर उभरी हैं। नीरू ने जापान में चल रहे एशियन गेम्स में भारत को दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल दिलाया है। मंगलवार 29 सिंतबर को नीरू ने ट्रैप शूटिंग की इंडिविजुअल इवेंट में गोल्ड मेडल जीता और टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीता था। वहीं 30 सिंतबर को नीरू ने एक और गोल्ड मेडल अपने नाम किया। शूटिंग के मिक्स्ड ट्रैप इवेंट में नीरू ढांडा और किनान चेनाई की जोड़ी ने गोल्ड मेडल जीता।

नीरू कितनी कमाल की शूटर हैं, इसका अंदाजा आप केवल इस बात से लगा सकते हैं कि, ट्रैप शूटिंग की इंडिविजुअल इवेंट के फाइनल में उन्होंने 30 में से 28 सटीक निशाने लगाए और नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले एशियाई रिकॉर्ड 24 का था। क्वालिफिकेशन में भी नीरू ने 118 अंकों के साथ गेम्स रिकॉर्ड बनाते हुए टाप किया था। इससे पहले नीरू ने टीम इवेंट आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ 328 प्वाइंट्स के साथ सिल्वर मेडल जीता। इस इवेंट में भी नीरु ने सबसे ज्यादा 118 प्वाइंट्स हासिल किए थे। वहीं बुधवार को हुए फाइनल में नीरू और किनान की जोड़ी ने 34 प्वाइंट्स के साथ गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।

परिवार को पास BPL कार्ड

नीरू ढांडा के लिए एशियन गेम्स का गोल्ड सिर्फ एक मेडल नहीं है। इसके पीछे बीमारी से जूझने, मुश्किल हालात में खुद को संभालने और संघर्ष की पूरी कहानी है। जब नीरू ढांडा की मां को पता चला कि उनकी बेटी ने एशियन गेम्स में अपना पहला गोल्ड मेडल जीत लिया है, तब वह न तो टीवी पर मुकाबला देख रही थीं और न ही फोन पर नजर रख रही थीं। उनके पास इनमें से कोई भी चीज नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, नीरू की मां उस समय परिवार के लिए राशन की दुकान से गेहूं लेने गई थीं। उनके हाथ में गरीबी रेखा से नीचे यानी बीपीएल राशन कार्ड था।

नीरू के कोच पीटर विल्सन ने बताया कि, ‘उनके लिए यह सफर बिल्कुल आसान नहीं था। करीब 10 दिन पहले नीरू, भारत में अस्पताल में तीन दिन भर्ती थीं। इसके बाद वह फिजियो के साथ जापान पहुंचीं और उन्हें तैयारी के लिए ट्रेनिंग करने का भी मौका नहीं मिला। इसके बावजूद नीरू ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और फाइनल में अपनी असली ताकत दिखाई।’ बता दें कि, भोपाल में एशियन गेम्स से करीब 10 दिन पहले नीरू को तेज फ्लू हुआ था। बीमारी इतनी गंभीर थी कि उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। वह कई दिन तक खाना तक नहीं खा सकी थी।

उधार की गन से शूटिंग का सफर

भारत की नई शूटिंग स्टार नीरू ढांडा का सफर किसी महंगी शूटिंग रेंज या लाखों रुपये की विदेशी बंदूक से शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने अपने परिवार की साधारण दुनाली बंदूक से टिन के डिब्बों पर निशाना लगाकर शूटिंग की शुरुआत की। उनके पिता किसान हैं और गांवों में ऐसी बंदूकों का इस्तेमाल आमतौर पर फसलों को जानवरों से बचाने के लिए किया जाता है।

नीरू ऐसे परिवार में पली-बढ़ीं, जहां खेलों की महंगी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं थीं। ट्रैप शूटिंग के लिए महंगे उपकरण, कारतूस, प्रैक्टिस के लिए शूटिंग रेंज और अच्छे ट्रेनिंग की जरूरत होती है। लेकिन नीरू ढांडा ने इसका भी रास्ता निकाल लिया। उनके चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण ट्रैप शूटिंग में अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे और एशियन गेम्स में मेडल भी जीत चुके थे। उन्हें देखकर नीरू ने भी इस खेल में हाथ आजमाना शुरू किया और नियमित अभ्यास करने लगीं। शुरुआत में नीरू के पास अपनी बंदूक तक नहीं थी। उनके पिता ने एएनआई को बताया कि नीरू ने शुरुआत में उधार की बंदूक से शूटिंग की प्रैक्टिस की।

भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं नीरू

नीरू ढांडा भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं। महिलाओं के लिए सेना में सैनिक स्तर पर भर्ती शुरू होने के बाद वह सैन्य पुलिस कोर में शामिल हुईं। इसके बाद उनके एक निशानेबाज के रूप में आगे बढ़ने में भारतीय सेना ने अहम भूमिका निभाई। वहीं गोल्ड जीतने के बाद नीरू ने कहा, पोडियम पर खड़े होकर भारत का राष्ट्रगान सुनना उनके लिए सबसे खास पल था। देश के लिए गोल्ड और सिल्वर मेडल जीतकर काफी खुश हूं।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN