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पाकिस्तान ‘डूबता जहाज’, देश छोड़कर अफसर क्यों भाग रहे पुर्तगाल? रक्षा मंत्री का कबूलनामा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया है कि देश के कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी पद पर रहते हुए ही विदेश में घर खरीद रहे हैं और वहां की नागरिकता लेने की फिराक में हैं।

आर्थिक तंगी और सियासी भूचाल से जूझ रहे पाकिस्तान से अब एक और हैरान करने वाली खबर सामने आ रही है। वहां के आम नागरिक ही नहीं, बल्कि सरकार चलाने वाले बड़े-बड़े नौकरशाह भी धीरे-धीरे देश छोड़कर विदेश में बसने की गुप्त तैयारी कर रहे हैं। इस बात का खुलासा किसी विपक्ष के नेता ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने किया है।

ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए आरोप लगाया है कि देश के कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी पद पर रहते हुए ही विदेश में घर खरीद रहे हैं और वहां की नागरिकता लेने की फिराक में हैं। इस खबर के सामने आते ही पाकिस्तान के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

पुर्तगाल बना पाकिस्तानी अफसरों का नया ‘फेवरिट ठिकाना’

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि पाकिस्तान में कई सक्षम और ईमानदार अफसर भी हैं, लेकिन एक बड़ी तादाद ऐसे नौकरशाहों की है जिन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और यूरोपीय देशों में अपना पक्का ठिकाना बना लिया है।

उन्होंने खासतौर पर पुर्तगाल का जिक्र किया। आसिफ के मुताबिक, पुर्तगाल इस समय पाकिस्तानी अफसरों की पहली पसंद बना हुआ है। रक्षा मंत्री ने सवाल उठाते हुए लिखा- “क्या यह सब संदेह से परे है या फिर ये अफसर पाकिस्तान को केवल एक अस्थाई ठिकाना समझ रहे हैं?”

पाकिस्तान के स्थानीय अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, पुर्तगाल अपनी आसान रेजिडेंसी-बाय-इन्वेस्टमेंट यानी निवेश करिए और नागरिकता पाइए, नीतियों की वजह से अफसरों को भा रहा है। इसके जरिए यूरोप में फ्री मूवमेंट और आसानी से नागरिकता मिल जाती है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि सरकारी वेतन पर काम करने वाले ये अफसर विदेश में करोड़ों की जायदाद खरीदने का पैसा कहां से ला रहे हैं?

डूबते जहाज से भाग रहे चूहे: भारतीय विशेषज्ञ का तंज

ख्वाजा आसिफ के इस बयान पर भारतीय खुफिया एजेंसी के पूर्व अधिकारी और पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ तिलक देवाशर ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि पाकिस्तान में हालात वाकई बेहद खराब हैं। जब देश की ग्राउंड रियलिटी जानने वाले अफसर ही सर्विस में रहते हुए बाहर भागने का प्लान बना रहे हैं, तो यह सीधा संकेत है कि उन्हें अपने देश के भविष्य पर कोई भरोसा नहीं रहा। देवाशर ने तंज कसते हुए पूछा, “क्या यह डूबते जहाज से चूहों के भागने जैसा मामला है?”

2,500 अफसरों के पास दोहरी नागरिकता

पाकिस्तान ऑब्जर्वर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में सरकार की ओर से कराए गए एक इंटरनल वेरिफिकेशन में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

  • 2,500 से ज्यादा संघीय अफसरों के पास दोहरी नागरिकता होने की बात सामने आई है।
  • लगभग 5 लाख सरकारी कर्मचारियों की जांच चल रही है, जिसमें से करीब 3.5 लाख कर्मचारियों का डेटा वेरिफाई हो चुका है।
  • जांच में पाया गया कि 756 अफसरों और उनके परिवारों ने अपनी दोहरी नागरिकता की जानकारी सरकार से छिपाई थी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2025 के अंत के बीच करीब 29 लाख लोग पाकिस्तान छोड़कर विदेश जा चुके हैं। इनमें आम मजदूरों से लेकर राजनेता और नौकरशाह तक शामिल हैं।

विदेश में करोड़ों की संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोप

यह पहली बार नहीं है, जब ख्वाजा आसिफ ने यह मुद्दा उठाया हो। इससे पहले अगस्त 2025 में भी उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान की 50 फीसदी से ज्यादा नौकरशाही पुर्तगाल में प्रॉपर्टी खरीद चुकी है और गबन के पैसों से विदेश में बसने की तैयारी कर रही है।

इसके बाद संसद की पब्लिक एकाउंट्स कमेटी (PAC) ने गृह मंत्रालय, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और FBR से उन अफसरों की जानकारी मांगी थी जिन्होंने विदेशी संपत्तियां खरीदी हैं।

पाकिस्तान में नेताओं और पूर्व सैन्य जनरलों पर भी विदेश में अकूत संपत्ति बनाने के आरोप लगते रहे हैं।

पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ के परिवार के पास लंदन के हाइड पार्क में करीब 17.8 करोड़ रुपए (1.35 मिलियन पाउंड) का लग्जरी फ्लैट और दुबई में करोड़ों के अपार्टमेंट हैं।

‘फैक्ट फोकस’ की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व सेना प्रमुख जनरल बाजवा के 6 साल के कार्यकाल के दौरान उनके करीबी रिश्तेदारों ने देश और विदेश में करीब 521 करोड़ रुपए (55 मिलियन डॉलर) से ज्यादा की संपत्ति बनाई।

फिलहाल, ख्वाजा आसिफ के इस ताजा दावे ने यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान का प्रशासनिक ढांचा भीतर से कितना खोखला हो चुका है और देश के नीति-नियंताओं को ही अपने देश के भविष्य पर भरोसा नहीं रहा है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN