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पाकिस्तान तो नहीं, तुर्किए आया सामने; हूती हमलों के बीच सऊदी अरब के काम आएगा मक्का पैक्ट?

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Source :- LIVE HINDUSTAN

पश्चिम एशिया में सऊदी अरब को निशाना बना रहे हूती विद्रोहियों के खिलाफ रियाद की मदद के लिए तुर्किए ने हाथ बढ़ाया है। मक्का डिफेंस पैक्ट का हिस्सा तुर्किए ने कहा कि वह सऊदी अरब की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्हें सैन्य तकनीकि मदद देने के लिए तैयार हैं।

पश्चिम एशिया की जंग में सऊदी अरब लगातार हमलों का शिकार हो रहा है। शुक्रवार को रियाद की तरफ से दावा किया गया कि हूती विद्रोहियों ने बैलेस्टिक मिसाइल से हमला करने की कोशिश की थी, जिसे हवा में ही नष्ट कर दिया गया। हूतियों की तरफ से भी कहा गया है कि वह लगातार सऊदी अरब के मुख्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। अब इस गंभीर होते संघर्ष के बीच सभी की निगाहें कुछ महीने पहले हुए मक्का डिफेंस पैक्ट के ऊपर लगी हुई हैं। सऊदी अरब की राजधानी पर हमला हुआ है। लेकिन पाकिस्तान मदद के लिए आगे नहीं आया। हालांकि, अब इस मामले में तीसरा साझेदार तुर्किए नए आगे बढ़कर सऊदी अरब को मदद की पेशकश की है।

तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने सऊदी अरब पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने जोर देकर कहा कि तुर्किए पूरी ताकत के साथ सऊदी अरब के साथ खड़ा हुआ है। हूती हमलों के खिलाफ अगर उन्हें किसी भी तरह की मदद की जरूरत पड़ती है, तो अंकारा उनकी मदद करने के लिए तैयार है।

सऊदी अरब की मदद करने को तैयार- तुर्किए के विदेश मंत्री

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए फिदान ने कहा, “हम देख रहे हैं कि सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर बहुत हमले हो रहे हैं। हमारे समझौते में एक गठबंधन करार भी शामिल है। ऐसे में अगर उनकी कुछ सैन्य जरूरतें होती हैं, तो हम उनकी मदद करने के लिए तैयार हैं। इसमें कोई भी परेशानी नहीं है।”

पाकिस्तान एकजुटता दिखाने की बात तक सीमित

बता दें, सऊदी अरब पर हुए हमलों के बाद पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने चिंता जताई थी। इसके साथ ही उन्होंने एकजुटता जाहिर की थी। वहीं, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने जोर देकर कहा था कि अब मक्का समझौते को लागू करने का समय है। हालांकि, यह बात जगजाहिर है कि पाकिस्तान का कंट्रोल मुख्य रूप से सेना के हाथों में हैं। ऐसे में जब तक सेना की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आ जाता, तब तक कुछ भी कहना संभव नहीं है। रावलपिंडी की तरफ से अभी तक इस मामले में केवल कड़ी निंदा के संकेत ही नजर आ रहे हैं।

क्या है मक्का रक्षा समझौता?

सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के बीच में हुआ यह त्रिपक्षीय रक्षा समझौता ‘मक्का रक्षा समझौता’ के नाम से ही जाना जाता है। पाकिस्तान की तरफ से इसे इस्लामिक नाटो की संज्ञा दी जाती रही है। हालांकि, यह समझौता ऐसे समय में हुआ, जब कुछ ही महीनों के भीतर इसकी जरूरत पड़ती दिख रही है। सऊदी अरब द्वारा यमन में हूतियों के खिलाफ किए गए हमलों के बाद उन्होंने पलटवार करना शुरू कर दिया। सऊदी अरब के पश्चिमी इलाकों में हमला किया गया। इसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। सऊदी अधिकारियों की मानें, मक्का शहर को भी ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश हुई थी। हालांकि, हूतियों ने इससे इनकार किया है।

मक्का रक्षा समझौते के तहत एक देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, इसके बाद भी जब सऊदी अरब की राजधानी दहल रही है। तो पाकिस्तान की तरफ से कड़ी निंदा और तुर्किए की तरफ से सैन्य तकनीक की मदद का ऑफर ही आया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN