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पानी के लिए भी जंग हो सकती है; सिंधु जल समझौते को लेकर अब पाकिस्तान के रक्षामंत्री ने दी भारत को धमकी

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Source :- LIVE HINDUSTAN

लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में धर्म पूछ-पूछकर 26 लोगों की हत्या कर दी थी, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे। जिसके बाद पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने के लिए भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का फैसला किया था

सिंधु जल समझौता निलंबित करने के भारत के फैसले के कई महीनों बाद इस मुद्दे को लेकर इन दिनों पाकिस्तान में जमकर उबाल देखा जा रहा है और हर दूसरे दिन वहां के नेता व मंत्री इस मुद्दे को लेकर उल-जुलूल बयान देकर भारत को युद्ध के लिए धमका रहे हैं। ताजी धमकी पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ की तरफ से आई है और इस मुद्दे को लेकर उन्होंने’जल युद्ध’ छेड़ने की चेतावनी दी है। आसिफ ने कहा, ‘अगर यह मामला शांतिपूर्ण ढंग से हल नहीं हुआ तो ईश्वर ना करे, पानी को लेकर युद्ध भी हो सकता है।’

आगे उन्होंने भारत को इन हालात के लिए जिम्मेदार बताते हुए कहा कि ‘नई दिल्ली पानी को विवाद का मुद्दा बनाने पर आमादा है।’ इसके बाद दोनों देशों के बीच हुए कई युद्धों का जिक्र करते हुए आसिफ ख्वाजा ने कहा कि ‘परमाणु हथियार रखने वाले इन दोनों पड़ोसियों के बीच कई पूर्ण युद्ध हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद 1960 में हुए इस सिंधु जल समझौते पर कभी किसी तरह की आंच नहीं आई और बिना किसी बड़े टकराव के यह समझौता जारी रहा।’ इस दौरान उन्होने भारत के सिंधु जल समझौता स्थगित करने के वर्तमान फैसले को पाकिस्तान की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को जानबूझकर बर्बाद करने की कोशिश बताया।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार खुफिया विभाग के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि भारत के बातचीत से इनकार करने से पाकिस्तान का सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व बुरी तरह घबरा गया है। खासकर उस स्थिति में जब भारत ने सिंधु, झेलम और चिनाब नदी के बहाव को भौतिक रूप से मोड़े या रोके बिना वहां जाने वाले पानी पर लगाम लगा दी है। ऐसा करते हुए भारत ने पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता ट्रिब्यूनल में गुहार लगाने की क्षमता को भी खत्म कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान ने अपनी धरती पर पल रहे आतंकी संगठनों व उनके ढांचे पर रोक लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

इस मामले को लेकर इस्लामाबाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सामने खुद को पीड़ित बताकर आक्रामक बयानबाजी कर रहा है, जबकि भारत एक सधे हुए तरीके से संधि के तहत तय दायरे में अपना जवाब दे रहा है। उधर पाकिस्तान के इस विलाप के बाद भी भारत सरकार ने भी जम्मू-कश्मीर में ‘रन ऑफ द रिवर’ हाइड्रोइलेक्ट्रिक और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।

बता दें कि दोनों देशों के बीच मौजूदा कूटनीतिक गतिरोध अप्रैल 2025 में कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था। इस हमले के दौरान पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में घूमने आए 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी। जिसके बाद पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाने के लिए भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने का फैसला किया था, इस समझौते में अनिवार्य हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करना, द्विपक्षीय आयोग की बैठकें और किसी भी विवाद की स्थिति में हेग में मध्यस्थता न्यायालय का सहयोग लेने जैसी शर्तें शामिल थीं।

लगभग 66 साल पुराने इस सिंधु जल समझौते को स्थगित करते हुए भारत सरकार ने कहा था कि खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते। अपने फैसले के पीछे भारत सरकार ने तर्क दिया था कि पानी साझा करने के अंतरराष्ट्रीय समझौते मूल रूप से सद्भावना, आपसी सहयोग और ईमानदारी से जुड़ने पर आधारित होते हैं। कोई देश भारतीय जमीन पर सीमा-पार आतंकवाद को बढ़ावा देते हुए भारतीय नदियों से बिना किसी रुकावट के, कानूनी रूप से सुरक्षित रणनीतिक फायदों की मांग नहीं कर सकता।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN