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पिता खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे मोजतबा, ईरान के सुप्रीम लीडर को किस बात का डर?

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will Mojtaba attend father’s funeral: ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। मोजतबा अमेरिकी हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। युद्ध शुरू होने के बाद से वह अभी तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

will Mojtaba attend father’s funeral: अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करके निकला ईरान अब अपने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियों में लगा हुआ है। सबसे बड़ा सवाल था कि क्या युद्ध शुरू होने के बाद से सार्वजनिक रूप से नजर न आने वाले मोजतबा अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। इस सवाल का जवाब अब भारत में मौजूद उनके प्रतिनिधि ने दिया है। अयातुल्लाह हकीम इलाही ने बताया कि सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में शामिल नहीं होंगे। बता दें, इससे पहले इस बात की अटकलें लगाई जा रही थीं कि मोजतबा खामेनेई अपने पिता के लिए अंतिम नमाज अदा करवा सकते हैं।

इंडिया टुडे से बात करते हुए ईरानी सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि अयातुल्लाह हकीम इलाही ने कहा कि सुप्रीम लीडर के लिए यह फैसला सुरक्षा दृष्टि से लिया गया है। क्योंकि भले ही अमेरिका के साथ शांति समझौता हो गया हो, लेकिन दोनों पक्षों के बीच में अभी भी गहरे अविश्वास के भाव हैं। वहीं, इजरायल के साथ भी तनाव अभी बना हुआ है। बकौल, इलाही मोजतबा के अलावा इस कार्यक्रम में पूरे ईरान और दुनिया से लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

बता दें, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के मिसाइल हमले में ईरान के तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई की मौत हो गई थी। इस हमले में उनके बेटे और वर्तमान सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उसके बाद से वह अभी तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। इजरायल और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की तरफ से कई बार यह दावा किया गया है कि मोजतबा खामेनेई की हालत बहुत खराब है, इसलिए वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। अब जबकि शांति हो चुकी है, तो उम्मीद की जा रही थी कि मोजतबा इसमें नजर आ सकते हैं। अब इन दावों का खंडन हो चुका है।

गौरतलब है कि भले ही ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता हो चुका है, लेकिन अभी भी दोनों देशों के बीच में गहरा अविश्वास बना हुआ है। इसकी शुरुआत फरवरी में ही हो गई थी। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि फरवरी के अंतिम सप्ताह में कतर की मध्यस्थता में लगातार वार्ता कर रहे थे, लेकिन इसी बीच अमेरिका और इजरायल ने मिलकर हमला बोल दिया। पहले ही दिन किए गए मिसाइल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई और उनके परिवार के कुछ सदस्य मारे गए थे।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN