Source :- LIVE HINDUSTAN
पुराने स्मार्टफोन कंपनियों के लिए सिर्फ इस्तेमाल हो चुके गैजेट नहीं होते, बल्कि बहुत काम के साबित होते हैं। कुछ फोन रिफर्बिश करके बेचे जाते हैं, कुछ के पार्ट्स इस्तेमाल होते हैं और कुछ से कीमती मेटल्स निकाले जाते हैं।
नया फोन खरीदते समय आपने अक्सर देखा होगा कि कंपनियां पुराने फोन के बदले हजारों रुपये का एक्सचेंज डिस्काउंट ऑफर करती हैं। कई बार सवाल उठता है कि आखिर कंपनियां पुराने फोन खरीदकर उनका क्या करती हैं? क्या वे सिर्फ रीसाइक्लिंग के लिए होते हैं या फिर उनके पीछे कोई बड़ा बिजनेस मॉडल काम करता है? कई यूजर्स को चिंता है कि कहीं उनका डाटा तो नहीं इस्तेमाल किया जाता। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
जब कोई ग्राहक अपना पुराना फोन एक्सचेंज में देता है, तो वह फोन सीधे कबाड़ या स्क्रैप में नहीं जाता। ज्यादातर मामलों में फोन की जांच की जाती है और उसकी कंडीशन के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाती है। अगर फोन अच्छी स्थिति में है, तो उसे रिपेयर और रीफर्बिश करके दोबारा बेचा जाता है। आज भारत में रीफर्बिश्ड स्मार्टफोन का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनियों और उनके एक्सचेंज पार्टनर्स के लिए पुराने फोन और भी कीमत हो गए हैं।
रीफर्बिश करके दोबारा बेचे जाते हैं फोन
कई पुराने स्मार्टफोन केवल मामूली रिपेयर के बाद फिर से मार्केट में बेचे जाते हैं। इनमें बैटरी बदलने, स्क्रीन रिप्लेस करने या सॉफ्टवेयर अपडेट करने जैसे सुधार शामिल हो सकता है। इसके बाद इन्हें ‘Refurbished’ या ‘Renewed’ डिवाइस के तौर पर कम कीमत पर बेचा जाता है। यह उन ग्राहकों के लिए भी फायदेमंद होता है जो कम बजट में अच्छे ब्रैंड का स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं।
पार्ट्स निकालकर भी कमाती हैं कंपनियां
हालांकि, हर फोन दोबारा बेचने लायक नहीं होता। ऐसे मामलों में कंपनियां उसके कई पार्ट्स और कंपोनेंट्स निकाल लेती हैं। डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल, स्पीकर, मदरबोर्ड और चार्जिंग पोर्ट जैसे कई कंपोनेंट्स अन्य डिवाइस को रिपेयर करने में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट (ई-वेस्ट) भी कम होता है और रिपेयर इंडस्ट्री के लिए सस्ते पार्ट्स उपलब्ध हो जाते हैं।
फोन के अंदर छिपे होते हैं कीमती मेटल
पुराने स्मार्टफोन में सोना, चांदी, तांबा और पैलेडियम जैसे मेटल्स की बहुत छोटी मात्रा मौजूद होती है। जब बड़ी संख्या में फोन इकट्ठा किए जाते हैं, तो इन्हें रीसाइक्लिंग प्लांट्स में भेजा जाता है, जहां इन मेटल्स को निकालकर दोबारा इस्तेमाल में लाया जाता है। यही वजह है कि पूरी तरह खराब हो चुके फोन भी कुछ वैल्यू रखते हैं।
एक्सचेंज ऑफर का असली मकसद
बता दें, एक्सचेंज प्रोग्राम का सबसे बड़ा मकसद नए डिवाइस की सेल बढ़ाना होता है। मान लीजिए किसी फोन की कीमत 30,000 रुपये है। अगर ग्राहक को पुराने फोन के बदले 8,000 रुपये या 10,000 रुपये तक का एक्सचेंज डिस्काउंट मिल जाए तो नया फोन खरीदना और भी आसान लगने लगता है। यानी कंपनियां एक तरफ नया फोन बेचती हैं और दूसरी तरफ पुराने फोन से भी कमाई का रास्ता निकाल लेती हैं।
क्या सेफ रहता है आपका पर्सनल डाटा
आम तौर पर फोन कंपनियों की कोशिश पुराने फोन की मदद से ग्राहकों का डाटा हासिल करना नहीं होता। उनका बिजनेस मॉडल डिवाइस, उसके पार्ट्स और रीफर्बिशिंग पर बेस्ड होता है। हालांकि सुरक्षा के लिहाज से किसी भी फोन को बेचने या एक्सचेंज करने से पहले सभी अकाउंट्स हटाना और Factory Reset करना जरूरी हता है।
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