Source :- LIVE HINDUSTAN
मुख्य बातें
- पोस्ट ऑफिस की सेविंग्स स्कीम में पैसा लगाने वालों के लिए एक जरूरी अपडेट सामने आया है
- पोस्ट ऑफिस ने ब्याज की रकम में किसी भी तरह के सुधार या बदलाव की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है
Post Office Schemes Rule Changes: पोस्ट ऑफिस की सेविंग्स स्कीम में पैसा लगाने वालों के लिए एक जरूरी अपडेट सामने आया है। पोस्ट ऑफिस ने ब्याज की रकम में किसी भी तरह के सुधार या बदलाव की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब ब्याज से जुड़ा कोई भी एडजस्टमेंट सीधे नहीं किया जा सकेगा, बल्कि इसके लिए मेकर-चेकर सिस्टम के तहत मंजूरी लेनी होगी। इसका सीधा मकसद ब्याज में होने वाली गलती या बिना अनुमति किए गए बदलाव को रोकना है। बता दें कि इसका असर पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट, पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि अकाउंट, नेशनल सेविंग्स स्कीम, मंथली इनकम स्कीम और सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम पर पड़ेगा।
अभी क्या है नियम
अभी तक ब्याज में बदलाव की एंट्री एसबीसीओ सुपरवाइजर कम्पीटेंट अथॉरिटी की मंजूरी के बाद करते थे। इसके बाद सिस्टम में दूसरी बार इसकी जांच नहीं होती थी और एंट्री अपने आप वेरिफाई हो जाती थी। अब नई व्यवस्था में ऐसा नहीं होगा। एक अधिकारी ब्याज एडजस्टमेंट की एंट्री करेगा और दूसरे अधिकारी को उसकी जांच करके उसे वेरिफाई करना होगा। इससे गलती की संभावना कम होगी और जिम्मेदारी भी तय होगी।
ब्याज में एडजस्टमेंट का काम एचआईएआरएम यानी इंटरेस्ट एडजस्टमेंट रजिस्टर मेंटेनेंस मेन्यू के जरिए किया जाता है। इसमें सिर्फ खाते में जमा ब्याज की रकम में बदलाव किया जा सकता है। खाते की मूल रकम यानी प्रिंसिपल अमाउंट को एचआईएआरएम के जरिए बदला नहीं जा सकता। अब संबंधित हेड ऑफिस का एसबीसीओ सुपरवाइजर ब्याज एडजस्टमेंट की एंट्री करेगा, जबकि सर्किल का सीपीसी सुपरवाइजर उसकी जांच करेगा।
जानिए कैसे करेगा काम
किसी खाते में ब्याज की रकम बदलने की जरूरत होने पर पहले हेड पोस्टमास्टर मामले और उससे जुड़े दस्तावेजों की जांच करेंगे। इसके बाद मामला डिविजनल हेड के पास भेजा जाएगा। डिविजनल हेड जरूरी जांच के बाद एडजस्टमेंट को मंजूरी देंगे या इसे खारिज कर सकते हैं। मंजूरी मिलने के बाद एसबीसीओ सुपरवाइजर को खाते की जानकारी, ब्याज की रकम, तारीख और स्कीम की जानकारी अच्छी तरह जांचने के बाद ही सिस्टम में एंट्री करनी होगी।
मैक्सिमम 5 लाख रुपये तक का एडजस्टमेंट
नए नियम के तहत एचआईएआरएम के जरिए ब्याज में मैक्सिमम 5 लाख रुपये तक का एडजस्टमेंट किया जा सकता है। अगर इससे ज्यादा रकम में बदलाव करना है तो मामला सीपीआरसी, चेन्नई को भेजना होगा। वहीं, एससीएसएस और एमआईएस खातों में ब्याज एडजस्टमेंट के लिए सिर्फ बीओडी यानी बिगिनिंग ऑफ डे की तारीख इस्तेमाल की जा सकेगी। सेविंग्स अकाउंट में बीओडी या पिछले वित्त वर्ष की 31 मार्च की तारीख इस्तेमाल की जा सकती है। नई व्यवस्था से ब्याज में बदलाव की प्रक्रिया में ज्यादा जांच और पारदर्शिता आएगी।
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