प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 से 14 जून 2026 तक फ्रांस की आधिकारिक यात्रा की, जहां उन्होंने राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक की और 16 से 19 जून 2026 तक एवियन और पेरिस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया।
**फ्रांस यात्रा का उद्देश्य**
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना था। उन्होंने राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक में विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इसके बाद, जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जहां उन्होंने ‘नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण’, ‘सभी के लिए संतुलित, साझा और सतत आर्थिक विकास को पुनर्जीवित करना’ तथा ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सुरक्षित, तीव्र और प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना’ जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।
**जी-7 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका**
जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए जी-7 देशों के नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया। विशेष रूप से, एआई के सुरक्षित और प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की, जो वर्तमान समय में महत्वपूर्ण है।
**मार्सिले में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि**
फ्रांस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने मार्सिले में भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने ‘Mazargues War Cemetery’ में जाकर प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की वीरता को सम्मानित किया। यह कदम भारत और फ्रांस के बीच ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाता है।
**स्लोवाकिया की यात्रा**
फ्रांस यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया के लिए प्रस्थान करेंगे, जहां वे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए स्लोवाक नेताओं के साथ बैठक करेंगे। यह यात्रा भारत की विदेश नीति में यूरोपीय देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-फ्रांस और भारत-स्लोवाकिया संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक होगी। इन बैठकों और चर्चाओं के माध्यम से, दोनों देशों के बीच सहयोग और साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा, जो वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में सहायक होगा।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत की विदेश नीति में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी, जो वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को और सुदृढ़ करेगी।
यह यात्रा भारत के लिए नई साझेदारियों के निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता के पुनर्निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जो वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने में सहायक होगी।
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