हाल ही में अयोध्या के राम मंदिर को लेकर सामने आई घटनाओं के बीच, कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खारगे ने मंदिर निर्माण के लिए दिए गए दान के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। खारगे ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश राज्य सरकार दोनों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि वे अपने मासिक पॉडकास्ट “मन की बात” में इस मामले पर बात करें।
**दुरुपयोग के आरोप**
यह विवाद तब शुरू हुआ जब राम मंदिर के लिए दिए गए दान के वित्तीय अनियमितताओं की खबरें सामने आईं। मंदिर निर्माण के लिए ज़िम्मेदार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर धन का गबन और कुप्रबंधन करने के आरोप लगे। इन दावों को ट्रस्ट ने पूरी तरह नामंजूर करते हुए कहा है कि सभी दान कानूनी प्रावधानों के अनुसार पारदर्शी तरीके से संभाले जाते हैं।
**प्रियंक खारगे की जवाबदेही की मांग**
प्रियंक खारगे ने अधिकारियों से जवाबदेही की मांग को जोरदार तरीके से उठाया है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के प्राण प्रतिष्ठापन और उद्घाटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि वे कथित वित्तीय गड़बड़ी पर क्यों मौन हैं। खारगे ने कहा, “तो प्रधानमंत्री इस पर ‘मन की बात’ कब करेंगे? प्राण प्रतिष्ठापन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था, उद्घाटन भी प्रधानमंत्री ने किया था। प्रधानमंत्री की आवाज अब कहाँ है?”
उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उस टिप्पणी की भी आलोचना की जिसमें उन्होंने लोगों से राम भक्तों के भावनाओं से “खेलने” से परहेज करने को कहा था। खारगे ने सवाल किया कि इन भावनाओं को चोट पहुंचाने के लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा, “किसने भावनाओं से खेला? क्या कांग्रेस ने, क्या समाजवादी पार्टी ने, क्या किसी नेता ने इसमें हाथ डाला? देखिए, आपके लोग इसमें शामिल थे। आप लोगों की आस्थाओं की रक्षा करने में विफल रहे।”
**विवाद के बीच इस्तीफे**
आरोपों के जवाब में, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है, उन्होंने कथित दान के दुरुपयोग की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की है। उनके इस्तीफे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61, और 3(5) के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद आए।
**राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ**
इस विवाद ने विभिन्न राजनीतिक हस्तियों से तीव्र प्रतिक्रियाएं प्राप्त की हैं। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कथित दुरुपयोग को “गंभीरतम पाप” बताते हुए कहा कि इसने “पूरे राष्ट्र को स्तब्ध कर दिया है।” उन्होंने मामले की पारदर्शी जांच की मांग की और强调 किया कि दोषी पाए जाने वालों को सख्त सजा दी जानी चाहिए।
वहीँ, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आरोपों की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने के फैसले की आलोचना करते हुए इसे “सनातन धर्म का अपमान” बताया। उन्होंने इस बात की चिंता जताई कि मंदिर से जुड़े पुजारीयों की जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी, और कहा कि ऐसी कार्रवाइयां मंदिर की पवित्रता को आहत करती हैं।
**क़ानूनी कार्रवाई व जांच**
आरोपों के बीच, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुदीप सिंह ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कानूनी नोटिस जारी किया है, जिसमें प्राप्त दानों और उनके खर्च का पूरा विवरण मांगा गया है। नोटिस में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक के दानों और खर्चों का पूर्ण, वस्तुवार, और वार्षिक हिसाब, साथ ही ऑडिटेड बैलेंस शीट और अन्य वित्तीय दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की मांग की गई है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने कथित धनगबन की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है। SIT ने ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा से दानों की गिनती के तरीकों और इस प्रक्रिया में शामिल स्टाफ की नियुक्ति के बारे में सवाल पूछे हैं। यह जांच मंदिर निर्माण के लिए दिए गए धन के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
**निष्कर्ष**
राम मंदिर दान विवाद ने वित्तीय पारदर्शिता और धार्मिक संस्थानों में जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को जन्म दिया है। जांच जारी रहने के बीच, विभिन्न राजनीतिक दलों और समुदायों के हितधारक मामले पर स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहे हैं और यह उम्मीद कर रहे हैं कि एक व्यापक और निष्पक्ष जांच करके लाखों श्रद्धालुओं के विश्वास और आस्था को बरकरार रखा जाएगा।
