Source :- LIVE HINDUSTAN
फीफा वर्ल्ड कप 2026 का 11 जून से आगाज हो रहा। समय बर्बादी, अनुशासनहीनता और विवादित व्यवहार रोकने के लिए फीफा कड़ी कार्रवाई करेगा। खिलाड़ियों को मैदान के अंदर और बाहर सतर्क रहना होगा।
फीफा वर्ल्ड कप में खिलाड़ियों को मैदान के अंदर और बाहर भी बेहद कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। सोशल मीडिया के इस्तेमाल से लेकर अपने व्यवहार तक, हर गतिविधि के लिए विस्तृत दिशा निर्देश हैं, जिनका उल्लंघन करने पर रेड कार्ड से लेकर बैन तक का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं फुटबॉल के इस महासंग्राम में खिलाड़ियों को क्या करने से बचना होगा और किस बात का अधिक ध्यान देना होगा…
डोप की निगरानी में रहेंगे खिलाड़ी
टूर्नामेंट के दौरान एंटी-डोपिंग नियंत्रणों को कड़ाई से लागू किया जाएगा, जिसके तहत खिलाड़ी हर पल कड़ी निगरानी में रहेंगे। मैचों, ट्रेनिंग सत्रों या होटल में रुकने के दौरान भी खिलाड़ियों को रैंडम ड्रग टेस्ट के लिए चुना जा सकता है और कभी भी बुलाया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टूर्नामेंट पूरी तरह से नशीले पदार्थों से मुक्त हो।
हर एक गतिविधि कैमरों में होगी कैद
मैदान पर खिलाड़ियों की हर गतिविधि पर वीएआर (वीडियो सहायक रेफरी) और दर्जनों कैमरों की नजर रहेगी। गोल, पेनाल्टी, सीधे रेड कार्ड और खिलाड़ी की पहचान से जुड़े विवादित मामलों में वीडियो फुटेज के आधार पर फैसले बदले जा सकते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को अनुशासनहीनता, आक्रामक व्यवहार या नियम तोड़ने से बचना होगा, क्योंकि कैमरे उनकी हर हरकत रिकॉर्ड करते रहेंगे।
फर्जी चोट पड़ सकती है खिलाड़ियों को महंगी
मैदान पर चोट लगने के बाद यदि डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ को बुलाना पड़ता है, तो खिलाड़ी खेल दोबारा शुरू होने के बाद भी एक मिनट तक मैदान से बाहर रहेगा। इसलिए टीम उस दौरान एक खिलाड़ी कम के साथ खेलेगी। फीफा का मानना है कि इससे मामूली चोट का बहाना बनाकर खेल रोकने और समय बर्बाद करने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा।
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