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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ़्रांस में स्टूडेंट्स के बड़े पैमाने पर हो रहे प्रदर्शनों के लिए इस्लाम और माइग्रेशन को जिम्मेदार ठहराया.
ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल नेटवर्क पर एक पोस्ट में कहा, “फ़्रांस में जो हो रहा है, वह नियंत्रण से बाहर बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवासन से कम कुछ नहीं है.”
उन्होंने कहा, “यह स्कूलों के बारे में नहीं है, यह इस्लाम के बारे में है जो एक महान देश पर कब्ज़ा करना चाहता है.”
ट्रंप ने अपने दावों के बारे में विस्तार से नहीं बताया और न ही कोई सबूत पेश किया. फ्रांस में अभी तक राजनीतिक विचारधारा के अलग-अलग हिस्सों से किसी ने भी स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट और किसी धार्मिक या पहचान से जुड़े मुद्दे के बीच कोई संबंध स्थापित नहीं किया है.
लेकिन ट्रंप के ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन आंदोलन से जुड़े प्रमुख लोग अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले इमिग्रेशन को लेकर अपनी बात मजबूत करने के लिए फ्रांस में हो रहे प्रदर्शनों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
फ़्रांस में प्रदर्शन
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सितंबर के अंत से फ़्रांस के छात्रों ने बेहतर स्थितियों की मांग को लेकर देशभर के सैकड़ों हाई स्कूलों के दरवाज़े बंद कर दिए हैं. इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों के साथ छिटपुट झड़पें भी हुई हैं.
फ़्रांस के स्कूलों में ज्यादा निवेश की मांग को लेकर हाई स्कूल और विश्वविद्यालय के छात्रों के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन जारी हैं. देश के कुछ सबसे बड़े यूनियनों का गठबंधन भी उनके साथ शामिल हो गया है. स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, माता-पिता और यूनियन कार्यकर्ताओं समेत वयस्क लोग सफेद पट्टियां पहनकर जमा हुए हैं.
छात्रों ने सैकड़ों स्कूलों को बंद कर रखा है. पिछले एक सप्ताह में 215 युवा और 715 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जबकि 6,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है. सोमवार को स्टन ग्रेनेड से एक छात्र का हाथ उड़ गया था, जिसके बाद गुस्सा और बढ़ गया. इससे पहले प्रदर्शनों के दौरान एक अन्य छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगा था.
यह घटना उत्तरी शहर लेंस में हुई थी. अलग-अलग रिपोर्टों में कहा गया कि छात्र ने या तो दंगा पुलिस द्वारा दागे गए स्टन ग्रेनेड को उठा लिया था या उसके पास इसे दागा गया था.
मंगलवार को भी फ़्रांस भर में लगभग ढाई लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे.
स्टन ग्रेनेड के इस्तेमाल पर रोक
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फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की ओर से स्टन ग्रेनेड के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है. देशभर में हो रहे इन प्रदर्शनों के बीच इस हफ्ते की शुरुआत में एक 15 वर्षीय किशोर का हाथ उड़ गया था.
गृह मंत्री लॉरां नुनेज़ ने कहा कि उन्होंने इस रोक का अनुरोध तब तक के लिए किया है, जब तक सोमवार को लेंस में हुई घटना के तथ्यों को लेकर स्थिति “स्पष्ट” नहीं हो जाती.
इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं.
कई संगठनों ने शिकायत की है कि पुलिस किशोरों के ख़िलाफ़ ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल कर रही है.
बुधवार सुबह भी विरोध-प्रदर्शनों का असर जारी रहा. 500 से ज़्यादा स्कूल पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहे. प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नू शाम को देश के नाम संबोधन में स्कूलों में हो रहे इन प्रदर्शनों पर बात करने वाले हैं.
यूरोप के प्रति ट्रंप का रवैया
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उधर, ट्रंप के मेक अमेरिका ग्रेट एगेन (मागा) आंदोलन के प्रमुख लोग अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले माइग्रेशन को लेकर अपनी बात जोर-शोर से रखने के लिए फ़्रांस के प्रदर्शनों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
ट्रंप की पोस्ट से पहले के दिनों में मागा समर्थक टिप्पणीकारों ने फ़्रांस में अशांति के वीडियो बार-बार पोस्ट किए.
ट्रंप के सहयोगी ग्लेन बेक ने सोमवार को एक्स पर लिखा, “फ़्रांस में हो रहे दंगे पश्चिम के बाकी हिस्सों के लिए एक साफ़ चेतावनी हैं. आज फ़्रांस में जो हो रहा है, वह पश्चिम को खत्म करने के लिए काम कर रहे समाजवादियों के एक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा है.”
दक्षिणपंथी टिप्पणीकार डेव रुबिन ने फ़्रांस के एक रेलवे स्टेशन पर बनाए गए वीडियो के साथ पोस्ट किया, “अगर डेमोक्रेट्स फिर से सत्ता में आते हैं, तो यह अमेरिका में भी होगा.”
‘सभ्यता को मिटाने की कोशिश’
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80 वर्षीय ट्रंप ने मध्यावधि चुनावों से पहले प्रवासन और ट्रांसजेंडर लोगों जैसे प्रमुख मुद्दों पर अपनी बयानबाज़ी तेज कर दी है.
ईरान युद्ध और महंगाई की वजह से ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के कांग्रेस पर नियंत्रण खोने की आशंका है. व्हाइट हाउस में अपने पहले कार्यकाल के समय से ही यूरोप ट्रंप के निशाने पर रहा है.
ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में यूरोप और पश्चिमी संस्कृति के पतन के बारे में चेतावनी देने को पहले से कहीं अधिक उत्सुक रहे हैं.
दिसंबर में जारी अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में कहा गया कि यूरोप को ‘सिविलाइज़ेशनल इरेज़र’ (सभ्यतागत मिटाव) का सामना करना पड़ रहा है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इसी मुद्दे पर यूरोप के मुखर आलोचक रहे हैं.
फ़्रांस के निवर्तमान राष्ट्रपति एमेनुएल मैक्रों के साथ ट्रंप की करीबी दोस्ती भी अमेरिकी राष्ट्रपति को एक प्रमुख सहयोगी की आलोचना करने से नहीं रोक पाई.
लेकिन फ़्रांस ने ट्रंप की प्रतिक्रिया की तुलना ईरान की प्रतिक्रिया से करते हुए जवाब दिया. ईरान ने इससे पहले स्कूलों के प्रदर्शनों पर पेरिस की “हिंसक प्रतिक्रिया” को लेकर फ़्रांस के राजदूत को तलब किया था.
फ़्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बैरो ने मंगलवार को एक संसदीय समिति से कहा, “आपको ईरानियों का वर्ज़न मिलेगा, शायद कुछ इसराइलियों का भी मिलेगा, शायद कुछ अमेरिकियों का वर्ज़न भी मिले.”
बैरो ने कहा कि फ़्रांस के राजनयिक मिशन फ़्रांस का पक्ष रखने की कोशिश कर रहे हैं, “ताकि हमारे पास प्रसारित करने के लिए हमारी अपनी बात हो, न कि हमें दूसरों की बातों के अधीन होना पड़े.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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