Home National news hindi बिहार में भरत तिवारी का ‘एनकाउंटर’, गाँव वालों का आक्रोश और सवालों...

बिहार में भरत तिवारी का ‘एनकाउंटर’, गाँव वालों का आक्रोश और सवालों के घेरे में पुलिस

5
0

Source :- BBC INDIA

भरत तिवारी

इमेज स्रोत, Preeti Prabha

“भरत ने जो भी किया लेकिन जब उसने हथियार के साथ सरेंडर कर ही दिया तब पुलिस को गोली मारने की क्या जरूरत थी ?”

गाँव के दालान पर बैठे भारत पासवान ने उदासी के साथ यह बात कही. दोपहर का समय था, चिलचिलाती धूप और गर्म हवा में दालान के चारों ओर लगे बांसबाड़ी से थोड़ी ठंडी हवा आ रही थी लेकिन भारत पासवान के साथ बैठे कई बुज़ुर्गों के सवाल अंगारों की तरह जल रहे थे.

“भरत भूषण को पुलिस ने जब ‘मानसिक अस्वस्थ’ बताया था, तब एक दिन बाद ही एनकाउंटर क्यों कर दिया?”

भोजपुर ज़िले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गाँव के 26 साल के युवक भरत भूषण तिवारी की 17 जून को कथित पुलिस एनकाउंटर के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी.

इस मामले को लेकर भोजपुर के एसपी की ओर से जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार, “पुलिस टीम ने ख़ुद और लोगों की सुरक्षा के लिए गोली चलाई थी, जो भरत भूषण के पाँव में लगी.”

लेकिन घटना और पुलिस के दावे को गाँव के लोग अलग बता रहे हैं.

गाँव वालों का कहना है कि “गोली लगने से पहले भरत भूषण ने अपने फ़ेसबुक अकांउट से जो लाइव किया था, उसमें यह साफ़ दिख रहा है कि उन्होंने अपनी पिस्टल पुलिस की तरफ़ फेंक दी थी और एक पुलिस वाले ने उस पिस्टल को उठा भी लिया था, फिर वह पुलिस पर गोली कैसे चला सकता है?”

न्यायिक जांच का एलान लेकिन परिवार संतुष्ट नहीं

भरत के गांव बिलौटी में लोगों में उदासी और गुस्सा नज़र आया

इमेज स्रोत, Preeti Prabha

इस घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली, लापरवाही और कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

हालाँकि घटना के तीन दिन बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए शाहपुर थाना अध्यक्ष समेत पाँच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. साथ ही मंगलवार को भरत की मां आशा देवी के आवेदन पर संबंधित एसडीपीओ, एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या की एफ़आईआर दर्ज की गई है. हालांकि किसी भी अभियुक्त पुलिसकर्मी की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है.

इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज से न्यायिक जाँच कराने का एलान किया है.

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, “भोजपुर ज़िले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जाँच कराने का निर्णय लिया गया है. न्यायिक जाँच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ जाँच सुनिश्चित करना है.”

काशीनाथ तिवारी

भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद 22 जून को पहली बार मीडिया के सामने आए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) सुधांशु कुमार ने इसे पुलिस की लापरवाही माना है.

उन्होंने कहा, “एनकाउंटर से पहले 16 जून को जो पुलिस वाले उससे बात करने गए, वह उसे ठीक से हैंडल नहीं कर पाए.”

प्रशासन और सरकार की इस कार्रवाई से भरत का परिवार संतुष्ट नज़र नहीं आता.

उनके पिता काशीनाथ तिवारी कहते हैं, “जब मैं अपने बेटे भरत के पिस्टल वाली हरकतों को लेकर पुलिस से बात करने शाहपुर थाना पहुँचे थे, तब पुलिस ने मुझे सुबह से शाम तक अपनी कस्टडी में रखा. मैं बार-बार घर जाने की मिन्नतें करता रहा, फ़ोन पर घरवालों से बात करवाने की मांग करता रहा , लेकिन किसी ने भी एक न सुनी.”

काशीनाथ आगे कहते हैं कि उन्होंने अपनी आँखों से पुलिस वालों को बुलेटप्रूफ़ जैकेट पहनकर निकलते देखा. क्या मालूम था कि ये लौट कर उनके बेटे की मौत की ख़बर सुनाएँगे.

भरत की माँ आशा देवी कहती हैं कि उनकी आँखों के सामने बेटे को गोली मारी गई.

वह रोते हुए कहती हैं, “ऐसे तो गुंडा बदमाश को भी नहीं मारा जाता है. निर्दोष और समाज सेवक था मेरा लड़का.पहले राइफल के बट से गिरा कर मारा, फिर गोली मार दी. यह कौन नियम है सरकार का? मेरे सामने उन लोगों ने गोली मारी. मैं और मेरी बहू वहीं पर खड़ी थीं. चारों तरफ़ से घेरा हुआ था एसटीएफ़ वाला. डीएसपी भी थे.”

“वहाँ गए, तो डीएसपी ने कहा कि इन लोगों को भी मारिए, लाठी चार्ज कीजिए दोनों पर, हम दोनों सास-बहू पर लाठी चार्ज कर दिया. दो लेडीज पुलिस थी. उसके बाद गोली चलाना स्टार्ट कर दिया भरत भूषण पर. पहले वह लोग भरत से बोले तुम्हारी तीन मांगें हैं, वह पूरी होंगी. मेरा बेटा जवइनिया गाँव के लोगों के लिए मिट्टी भरने की मांग कर रहा था, जिसे सरकार ने गड्ढा में बसा दिया है.”

भरत की मां का कोट

उन्होंने आगे बताया, “भरत ने पुलिसवालों से कहा, ठीक है मेरी मांग पूरी हो रही है तो रखिए यह पिस्टल.लेकिन पुलिस ने पिस्टल ले ली और फिर गोली चलाना स्टार्ट कर दिया.”

भरत के अधिकतर वीडियो में प्रशासन के ख़िलाफ़ उनकी नाराज़गी दिखती थी. कुछ दिन पहले भी उन्होंने एक फ़ेसबुक पोस्ट करके सरकारी कामकाज के तरीक़े पर नाराज़गी जताई थी और एक पुलिस अधिकारी का ‘एनकाउंटर’ करने की बात कही थी.

वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय पुलिस उनके घर पहुँच गई. पुलिस के पहुँचने के बाद भी भरत ने एक फ़ेसबुक लाइव किया था, जिसमें पुलिस के साथ भरत भूषण की माँ भी अपने बेटे को समझाती दिख रही हैं. पुलिस का कहना है कि उन्होंने भरत तिवारी को समझाने की कोशिश की, लेकिन भरत ने पिस्टल निकाल ली. भरत भूषण के इस रवैये पर पुलिस ने उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया था.

क्या भरत भूषण मानसिक रूप से अस्वस्थ थे?

जवइनिया गांव के लोगों को विस्थापित कर जहां बसाया गया है वहां गड्ढा है और भरत इसी को भरने की मांग कर रहे थे

इमेज स्रोत, Preeti Prabha

इस सवाल पर गाँव के गणेशजी कहते हैं, “भरत अच्छा बच्चा था, थोडा तुनक मिजाज़ और अति उत्साही होने के बावजूद वह लोगों की मदद के लिए हर वक़्त तैयार रहता था. जब भी सड़क, बिजली और पानी जैसे बुनियादी मुद्दों को लेकर प्रशासन के पास जाता, तो उसकी बातें नहीं सुनी जाती थी. वह जवान था, गर्म ख़ून था. उसकी लड़ाई और ग़ुस्सा भ्रष्ट सिस्टम से था. उसने गलती की कि हथियार उठा लिया, लेकिन जब भरत ने सरेंडर कर दिया, तो पुलिस ने उसे क्यों मारा?”

बिलौटी गाँव से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर जवइनिया गाँव है, जो मुश्किल से एक महीने पुराना है.

शाहपुर, बिलौटी से 14 कोस दूर यह गाँव पिछले साल कटाव की वजह से नदी में विलीन हो गया था. बेघर हुए लोग अपने परिवार के साथ बांध पर झोपड़ी बना कर रहने पर मजबूर थे.

बिहार सरकार ने शाहपुर में इन्हें रहने के लिए ज़मीन दी और एक लाख बीस हज़ार रुपया हर परिवार को घर बनाने के लिए मिला. चूँकि जवइनिया गाँव के लोग वहाँ बस रहे हैं, तो गाँव का नाम भी जवइनिया ही पड़ा.

तेतरी का कोट

इसी गाँव के मुहाने पर पुलिस ने भरत को गोली मारी थी. ख़ून के धब्बे अब भी दिख रहे हैं.

गाँव की तेतरी देवी रोते हुए कहती हैं, “एक तो सरकार ने हमारे साथ धोखा किया, हमको पानी से निकाल कर पानी में ही डाल दिया है. यहाँ से नदी काफ़ी नज़दीक है. जब पानी भरता है, तब यह पूरा इलाक़ा भी डूब जाता है. यहाँ लगभग चार से पाँच फीट गड्ढा है. बाढ़ आने या जल जमाव होने पर तो लोगों के घरों में पानी घुस जाएगा. छोटे-छोटे बच्चे हैं. डूबने की भी आशंका रहती है. भरत इसी गड्ढे को भरने की मांग लगातार कर रहा था. लेकिन पुलिस ने उसे मार दिया. अब हमारा दुख कौन सुनेगा?”

वहीं 24 साल की सबिता देवी कहती हैं, “हमारा तो दुख कम हो ही नहीं रहा है. हमारा घर बह गया. हम 10 महीने तक बाँध पर रहे. यहाँ हम बस तो गए, लेकिन कोई रोज़गार नहीं मिलता है. इस बात की तसल्ली थी कि सर पर छत तो होगा. इस गाँव को बसे 20 दिन भी नहीं हुए. भरत की पहल पर चापाकल और बिजली की सुविधा मिली लेकिन अब उसे भी मार दिया गया. अब हमारी बात कौन करेगा?”

पिता-भाई पर एफ़आईआर, मां की शिकायत पर चुप्पी

पुलिस ने भरत भूषण तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और छोटे भाई चंदन तिवारी के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है

इमेज स्रोत, Preeti Prabha

भरत भूषण तिवारी के पिस्टल लहराने और उनके कथित एनकाउंटर के बाद शव के साथ सड़क जाम करने को लेकर दो एफ़आईआर दर्ज हुई हैं.

17 जून को हुई एक एफ़आईआर में भरत भूषण तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और छोटे भाई चंदन तिवारी को अभियुक्त बनाया गया है.

जबकि सड़क जाम को लेकर 14 नामजद सहित 50 से अधिक अज्ञात लोगों पर दूसरी एफ़आईआर दर्ज की गई है.

यह एफ़आईआर इस मामले में सस्पेंड किए गए शाहपुर के थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की ओर से दर्ज की गई हैं. हालाँकि भरत के कथित एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब तक परिवार को नहीं सौंपी गई है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS