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‘भले मेरे पति घायल हों, लेकिन लौट आएं’, नेपाल बाढ़ में लापता शख़्स की पत्नी ने बयां किया दर्द

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Source :- BBC INDIA

नेपाल बाढ़

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नेपाल पुलिस ने बताया है कि देश में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 389 हो गई है. वहीं, नेपाल पर्यटन बोर्ड ने बताया है कि 31 देशों के 540 विदेशी नागरिक लापता हैं.

इन लापता विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है. नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक़, भारत के क़रीब 178 नागरिक लापता हैं.

भारत के विदेश मंत्रालय ने भी नेपाल में आई आपदा से प्रभावित भारतीयों को लेकर जानकारी दी है.

मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि 290 भारतीय नागरिकों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया है कि अब तक त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट से जुड़े 63 कर्मचारियों को सुरक्षित बचाया गया है.

इससे पहले रणधीर जायसवाल ने बताया था कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल की बाढ़ में फंसे 21 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है.

इन सब के बीच कुछ ऐसे भारतीय भी हैं जो इस आपदा से सुरक्षित बच निकले हैं. इन लोगों से बीबीसी ने बात की. इसके अलावा हमने उन लोगों के परिजनों से भी बात की, जो अब तक लापता हैं.

नेपाल की आपदा से बचने वाले गुजरात के ये लोग

गुजरात के कच्छ से कैलाश-मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर गए लोगों का एक समूह

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गुजरात के 43 लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे. ये सभी अब सुरक्षित हैं और अपने ज़िंदा बच निकलने को अपनी ख़ुशक़िस्मती मान रहे हैं.

इनमें से एक, शैलेश बताते हैं, “हम मंगलवार को शाम छह बजे के बाद ग्यिरोंग के चीनी इमिग्रेशन कार्यालय से निकले थे. अगर हमने वहीं रुकने और अगले दिन यात्रा करने का फ़ैसला किया होता, तो आज हममें से कोई भी ज़िंदा नहीं होता.”

वह कहते हैं, “ग्यिरोंग इमिग्रेशन कार्यालय के पास 15 से ज़्यादा गांव हैं, जहां तीर्थयात्री आराम करने के लिए रुकते हैं. इन सभी गांवों पर अचानक आई बाढ़ का बहुत ज़्यादा असर पड़ा है.”

शैलेश और उनके साथ मौजूद 42 पर्यटक इस समय तिब्बत के सागा काउंटी क्षेत्र में हैं और सुरक्षित हैं. उनका कहना है कि उनका ग्रुप शुक्रवार सुबह अपनी यात्रा फिर शुरू करेगा.

वापसी की योजना के बारे में शैलेश कहते हैं, “अभी हमारे पास कोई जानकारी नहीं है. स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि हमारी सुरक्षित वापसी के लिए ज़रूरी इंतज़ाम किए जाएंगे.”

जिनकी अब तक कोई ख़बर नहीं

नेपाल में बाढ़

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शैलेश और उनके साथी सुरक्षित बच निकले हैं. लेकिन गुजरात और अन्य राज्यों के अभी ऐसे कई यात्री हैं, जिनकी कोई सूचना तक नहीं मिल पाई है.

गुजरात के सूचना विभाग ने बताया है कि राज्य के 12 पर्यटक लापता हैं.

गुजरात के आनंद शहर के रहने वाले विमल और जैमिना पटेल भी नेपाल में लापता लोगों में शामिल हैं. दंपति के परिवार के सदस्य 16 अगस्त को नेपाल गए थे. परिवार की आख़िरी बार उनसे तब बात हुई थी, जब वे ग्यिरोंग इमिग्रेशन कार्यालय में थे.

आंध्र प्रदेश सरकार ने नेपाल में भारतीय दूतावास को राज्य के लापता लोगों के बारे में जानकारी दी है.

राज्य सरकार का कहना है कि आंध्र प्रदेश के कम से कम छह लोग इस समय लापता हैं.

नेपाल में बाढ़

बीबीसी ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर ज़िले के लापता तीर्थयात्री बालासुब्रमण्यम के भाई श्रीकांत से बात की.

श्रीकांत ने बीबीसी तेलुगू को बताया, “बालासुब्रमण्यम 14 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए थे. वह शादीशुदा हैं और उनके दो बेटे हैं, जिनकी उम्र 17 और 15 साल है. उन्हें 28 अगस्त को वापस लौटना था. हमने उनसे आख़िरी बार 25 अगस्त को बात की थी. उसके बाद से हम फ़ोन पर उनसे संपर्क नहीं कर पाए हैं.”

परिवार का कहना है कि इसके बाद से उन्हें बालासुब्रमण्यम के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है और उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है. उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप करने और मदद मुहैया कराने की अपील की है.

श्रीकांत ने एक वीडियो संदेश में कहा, “हमें पता चला कि कल जब मेरा भाई वहां इमिग्रेशन जांच करा रहा था, उसी दौरान ग्यिरोंग इलाक़े में अचानक बाढ़ आ गई. हो सकता है कि वह वहां फंस गया हो. हमें उम्मीद है कि वह बिना किसी परेशानी के सुरक्षित लौट आएगा.”

बंगाल के कई तीर्थयात्री भी लापता

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नेपाल की इस घटना में पश्चिम बंगाल के 30 पर्यटक और दो टूर असिस्टेंट भी लापता हैं. इन सभी से 25 अगस्त से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

कोलकाता स्थित टूर ऑपरेटर ‘चलो जाई ट्रैवल क्लब’ की मदद से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे इन 30 पर्यटकों में रेलवे के रिटायर्ड कर्मचारी रणजीत कुमार हाउलादार (63) भी शामिल हैं.

उनकी पत्नी गायत्री हाउलादार ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने मंगलवार रात क़रीब 10 बजे अपने पति से आख़िरी बार बात की थी.

वह बताती हैं, “उन्होंने हमसे कहा था कि वह सोने जा रहे हैं और अगली सुबह इमिग्रेशन पॉइंट के लिए निकलेंगे. वह बहुत कम बोलने वाले इंसान हैं. वह अपनी यात्राओं की हर छोटी-बड़ी जानकारी हमेशा साझा नहीं करते थे. उन्हें घूमना बहुत पसंद है और यह उनकी ड्रीम प्लेस में से एक थी.”

गायत्री हाउलादार भावुक हो गईं और उन्होंने कहा कि वह अपने पति को घायल हालत में घर आते हुए स्वीकार कर सकती हैं, लेकिन कम से कम वह ज़िंदा घर लौटें.

उन्होंने कहा, “यात्रा के दौरान वह अपनी बेटी से भी फ़ोन पर बात करते थे. यह पहली बार था जब उन्होंने ऐसा नहीं किया. मेरी बेटी इस बात से बेहद परेशान है कि बाढ़ आने से एक रात पहले भी उन दोनों की बात नहीं हो पाई.”

उन्होंने बताया कि रणजीत को घूमना बहुत पसंद है और वह 2023 में रेलवे से रिटायर होने तक इस यात्रा पर जाने का इंतज़ार कर रहे थे.

हालांकि, ख़बरों के मुताबिक़, ट्रैवल एजेंसी ने अब तक उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दे पाई है.

नेपाल बाढ़

रणजीत हाउलादार की बेटी सुनंदा मुंबई में काम करती हैं. अचानक आई बाढ़ की जानकारी मिलने के बाद वह बुधवार को कोलकाता पहुंची.

गुरुवार सुबह से वह अपने लापता पिता के बारे में जानकारी जुटाने के लिए लगातार अलग-अलग जगहों के चक्कर लगा रही हैं.

वह पुलिस स्टेशन और ट्रैवल एजेंट के कार्यालय भी गईं, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी.

उन्होंने बीबीसी को बताया, “ट्रैवल एजेंसी के प्रतिनिधियों ने हमें बताया कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक़, अब तक दो महिला पर्यटकों को बचाया गया है.

”हालांकि, वह बाक़ी लोगों के बारे में हमें कोई भरोसा नहीं दिला सके. बुधवार रात दो पुलिस अधिकारी हमारे घर आए थे और उन्होंने मेरे पिता की यात्रा की योजनाओं के बारे में पूछा. लेकिन वे भी हमें कोई जानकारी नहीं दे सके.”

उन्होंने बताया कि उन्हें भी अपने पिता के साथ इस यात्रा पर जाना था, लेकिन काम से छुट्टी नहीं मिल पाने के कारण वह नहीं जा सकीं.

पश्चिम बंगाल पुलिस ने स्थिति पर चौबीसों घंटे नज़र रखने के लिए भवानी भवन स्थित अपने मुख्यालय में एक डेडिकेटेड कंट्रोल रूम बनाया है.

बाढ़ प्रभावित नेपाल में लापता लोगों से जुड़ी किसी भी तरह की मदद के लिए दो हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं: 033-24793311, 9147890181.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS