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भारत नहीं मानेगा… जे डी वेंस के किस प्लान को सुनते ही ट्रंप ने किया था खारिज, PM मोदी का भी जिक्र

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी राष्ट्रपति ने जे डी वेंस के प्लान को सिरे से खारिज कर दिया था। हाल ही में सामने आई एक किताब में इसका खुलासा हुआ है। दावा किया गया है कि ट्रंप को एक योजना पेश की गई थी कि जिसमें… पढ़ें पूरी खबर:

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूक्रेन युद्ध में भारतीय सैनिकों को तैनात करने का प्लान तैयार किया था। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने इसका प्रस्ताव भी रखा था। हालांकि ट्रंप ने इसे सुनते ही सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने साफ कहा कि भारत इसके लिए कभी तैयार नहीं होगा। हाल ही में रिलीज हुई एक नई किताब में यह दावा किया गया है। दावा है कि ट्रंप ने यूक्रेन में भारतीय सैनिकों को शांतिदूत बनाकर भेजने के जेडी वेंस के प्रस्ताव को तुरंत खारिज कर दिया था।

ट्रंप प्रशासन के भीतर की कहानियों को बयां करने वाली किताब ‘रेजीम चेंज’ बीते 23 जून को रिलीज हुई है। इसमें ओवल ऑफिस की एक बेहद गोपनीय बैठक का जिक्र है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण के महज 10 दिन बाद 30 जनवरी 2025 को ओवल ऑफिस में एक हाई-लेवल बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सुझाव दिया कि यूक्रेन में सीजफायर की निगरानी के लिए भारत या सऊदी अरब के सैनिकों को शांति सैनिक बनाकर तैनात किया जाना चाहिए।

क्या बोले थे ट्रंप?

हालांकि ट्रंप ने वेंस की इस बात को बिल्कुल तवज्जो नहीं दी। किताब के मुताबिक, ट्रंप ने योजना सुनकर कहा, “भारतीय ऐसा नहीं करेंगे। वे इसके लिए कभी भुगतान नहीं करेंगे।” किताब में लिखा गया है कि जब भारत का नाम आया, तो ट्रंप का रवैया हमेशा की तरह बेहद बेबाक था। ट्रंप ने बैठक में यह जरूर माना कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके संबंध बेहद शानदार हैं।

ट्रंप ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी मुझे बहुत पसंद करते हैं और वे यहां आना चाहते हैं।” लेकिन इसके तुरंत बाद ट्रंप ने कहा, “भारतीय ऐसी चीज के लिए कभी मानेंगे।” ट्रंप ने आगे कहा कि अगर ब्रिटेन या फ्रांस अपने सैनिकों को वहां भेजना चाहते हैं, तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, बशर्ते अमेरिका पर इसका कोई वित्तीय या सैन्य बोझ न पड़े।

नाटो सैनिकों को भेजने पर क्यों डरे थे जेडी वेंस?

दरअसल यह पूरी बैठक ट्रंप के विशेष दूत रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग ने बुलाई थी। उन्होंने ‘ऐन अमेरिका फर्स्ट प्लान: ट्रम्प्स हिस्टोरिक पीस डील फॉर रशिया-यूक्रेन वॉर’ नाम से एक ड्राफ्ट पेश किया था। इस प्लान के तहत अमेरिका, यूक्रेन की जमीन पर रूस के कब्जे को आधिकारिक मान्यता नहीं देता, लेकिन यूक्रेन भी इसे वापस लेने की कोशिश नहीं करेगा। युद्ध रोकने के लिए फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों के सैनिकों को जमीन पर तैनात करने का सुझाव था।

हालांकि वेंस ने इस प्लान पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि नाटो देशों के सैनिकों को यूक्रेन में तैनात करना रूस को सीधे उकसाने जैसा होगा। इससे तनाव इतना बढ़ सकता है कि अमेरिका भी सीधे तौर पर इस युद्ध में घिसट जाएगा। इसी वजह से वेंस ने यूरोप से बाहर के देशों जैसे भारत और सऊदी अरब का नाम सुझाया था, जिसे ट्रंप ने खारिज कर दिया।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN