Source :- LIVE HINDUSTAN
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सामान्य मौसमी कमी नहीं, बल्कि बेहद गंभीर मौसम संकट है। अल साल्वाडोर में मई के दौरान सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश हुई। अगस्त में लगातार 19 दिनों तक सूखा रहा।
अल नीनो के तेज असर से मध्य अमेरिका में सूखे का संकट गहराता जा रहा है। ग्वाटेमाला में सूखे के कारण 32 लाख से अधिक लोगों को तत्काल मानवीय सहायता की जरूरत बताई गई है। यूरोपीय आयोग के संयुक्त अनुसंधान केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके में मक्का और बीन्स की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। पैदावार ठप होने और जल संकट बढ़ने से खाद्य सुरक्षा पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति को देखते हुए होंडुरास, अल साल्वाडोर और पनामा में आपातकाल या रेड अलर्ट घोषित किया जा चुका है।
होंडुरास ने सबसे पहले 19 अगस्त को सूखा आपातकाल घोषित किया था। इसके एक सप्ताह बाद 26 अगस्त को रेड अलर्ट का दायरा बढ़ाकर 103 नगरपालिकाओं तक कर दिया गया। अल साल्वाडोर में पर्यावरण मंत्रालय ने 25 अगस्त को देशव्यापी रेड अलर्ट जारी किया। यहां अनियंत्रित बारिश के साथ रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने हालात बिगाड़ दिए हैं। पनामा की सरकार ने भी 25 अगस्त को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया। देश की 11 प्रमुख जलधाराओं में पानी का स्तर घटने से पनबिजली उत्पादन और लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने पर संकट पैदा हो गया है।
बेहद गंभीर मौसम संकट बताया गया
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह सामान्य मौसमी कमी नहीं, बल्कि बेहद गंभीर मौसम संकट है। अल साल्वाडोर में मई के दौरान सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश हुई। अगस्त में लगातार 19 दिनों तक सूखा रहा। इस दौरान सांता रोसा डी लीमा में तापमान 43.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन ने भी चेतावनी दी है कि इस साल बेहद तीव्र अल नीनो की 90 प्रतिशत से ज्यादा संभावना है। इसके असर से 1950 के बाद के पुराने रिकॉर्ड टूटने की आशंका जताई गई है।
संयुक्त अनुसंधान केंद्र की वैश्विक समीक्षा के अनुसार, अल नीनो का असर केवल मध्य अमेरिका तक सीमित नहीं है। पूर्वी अफ्रीका में भी तेज गर्मी और सूखे से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। वहां 14 क्षेत्र अकाल के कगार पर पहुंच गए हैं। सूडान और दक्षिण सूडान में पहले से जारी गृहयुद्ध ने खाद्य संकट को और गंभीर बना दिया है। वहीं मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका, मध्य और दक्षिण एशिया तथा दक्षिणी दक्षिण अमेरिका में फिलहाल फसलों की स्थिति बेहतर है। इससे साफ है कि अल नीनो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश और मौसम के मिजाज को असमान तरीके से प्रभावित कर रहा है।
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