Source :- LIVE HINDUSTAN
फ्रांस में महंगाई और छात्रों के समर्थन में आंदोलन हिंसक हो गया। जानकारी के मुताबक नकाबपोश लोगों ने जमकर उपद्रव किया और वाहनों में आग लगा दी। कई जगह पर पुलिस के साथ झड़पें हुईं।
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और छात्र आंदोलन के समर्थन में शनिवार को पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन हुए। विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, इस दौरान प्रदर्शनकारियों-पुलिस के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं। कई शहरों में आगजनी, पत्थरबाजी, लूटपाट भी की गई। बढ़ती महंगाई के विरोध में सोशल मीडिया पर येलो वेस्ट आंदोलन को फिर से शुरू करने की अपील के बाद ये प्रदर्शन शुरू हुए। महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट से नाराज हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। राजधानी पेरिस, मार्सिले, टूलूज, एंगर्स और ल्योन जैसे शहरों में नकाबपोश लोगों ने हिंसा की।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ज्यादातर लोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे थे। उन्होंने हिंसा के लिए उन उपद्रवियों को जिम्मेदार ठहराया, जो जानबूझकर तोड़फोड़ करने और पुलिस से भिड़ने के इरादे से आए थे।
लूटपाट, सार्वजनिक इमारतों पर हमले
देर शाम तक कई शहरों में हिंसा जारी थी। जगह-जगह पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें जारी थीं। गृह मंत्रालय ने इस अशांति के लिए कट्टर वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। कई दुकानों में लूटपाट की गईं। सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया।
पुलिस ने स्थिति को कंट्रोल करने के लिए पेरिस में आंसू गैस के गोले और ग्रेनेड भी दागे। पेरिस ओपेरा के पास एक बड़े डिपार्टमेंट स्टोर में मौजूद कुछ पर्यटक आंसू गैस के धुएं की चपेट में आ गए। इसे हाल के सालों में इस देश में हुए प्रदर्शनों में सबसे हिंसक बताया जा रहा है। सेंट-एटिएन में ग्रेनेड की चपेट में आने से एक प्रदर्शनकारी का हाथ उड़ गया।
फ्रांस में प्रदर्शन पिछले महीने शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हो रहे हैं। उस समय देश के स्कूलों की स्थिति को लेकर विद्यार्थियों ने शिक्षकों की अनुपस्थिति और जर्जर सुविधाओं पर नाराजगी जताई थी। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रदर्शनों से पहले शांति और सम्मान बनाए रखने की अपील की। द है पेरिस में पुलिस ने राष्ट्रपति भवन एलिसी पैलेस, प्रधानमंत्री कार्यालय, शॉंप्स-एलिजे मार्ग और कई अन्य महत्वपूर्ण स्थानों के आसपास रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। शहर के मध्य हिस्से से होकर निकलने वाले मार्च की भी अनुमति नहीं दी गई है।
क्या था येलो वेस्ट आंदोलन
विद्यार्थियों के साथ ट्रेड यूनियनों और ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन के बचे हुए सदस्य भी प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं। यह आंदोलन नवंबर 2018 से जून 2020 तक हर सप्ताह बड़े प्रदर्शन करता रहा था। शुरुआत में इसका विरोध ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ था, लेकिन बाद में यह महंगाई और आर्थिक असमानता के व्यापक मुद्दों तक फैल गया।
वामपंथी दल ‘फ्रांस अनबाउड’ के नेता ज्यां-ल्यूक मेलंशों ने हाल के हफ्तों में विद्यार्थियों के प्रदर्शनों का समर्थन किया है। वह मंगलवार को एक प्रदर्शन में शामिल भी हुए थे। सरकार ने आरोप लगाया है कि यह दल व्यापक जन-असंतोष को और भड़का रहा है, हालांकि पार्टी ने इस आरोप से इनकार किया है।
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