Source :- LIVE HINDUSTAN
पैरेंट्स के बिहेवियर से ही बच्चा काफी कुछ सीखता है। ऐसे में आप उनके आगे क्या रवैया रख रहे हैं, इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यहां डॉक्टर ने ऐसी 5 चीजें शेयर की हैं, जो बच्चों के आगे करने से बचना चाहिए।
बच्चों की परवरिश सिर्फ अच्छी बातें सिखाने से नहीं होती, बल्कि वो अपने पेरेंट्स को देखकर भी बहुत कुछ सीखते हैं। घर का माहौल, माता-पिता का बिहेवियर और रोज की छोटी-छोटी आदतें बच्चों के मन पर गहरा असर डालती हैं। यही वजह है कि पीडियाट्रिशियन डॉ सुमित्रा मीना कहती हैं कि अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा अच्छे संस्कार और सही आदतों के साथ बड़ा हो, तो सबसे पहले आपको खुद अपने व्यवहार पर ध्यान देना होगा। कई बार हम अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका असर बच्चों पर लंबे समय तक बना रहता है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों के सामने कौन-सी बातें करने से बचना चाहिए।
पार्टनर से जोर-जोर से लड़ाई या बहस ना करें
घर में होने वाली लड़ाई या तेज आवाज में बहस बच्चों को डराती है। ऐसे माहौल में बच्चे अनसेफ फील कर सकते हैं, जिसकी वजह से उनका स्ट्रेस लेवल बढ़ सकता है। अगर आपका अपने पार्टनर से किसी बात पर झगड़ा हो भी जाए, तो कोशिश करें की बच्चों के सामने बहस करने से बचें, और शांति से बात कर के सुलझाएं। आपके इस बिहेवियर से बच्चे यही सीखते हैं कि मुश्किल समय में कैसे व्यवहार करना चाहिए।
हर समय मोबाइल या स्क्रीन में न खोए रहें
अगर पेरेंट्स हर समय मोबाइल, टीवी या लैपटॉप पर ही बिजी रहते हैं, तो बच्चों को लगता है कि उनसे ज्यादा जरूरी स्क्रीन है। इससे उनके साथ आपका अटैचमेंट कम हो सकता है। डॉ सुमित्रा मीना का कहना है कि बच्चों के साथ बिताया गया समय उनके सेल्फ कॉन्फिडेंस और इमोशनल ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी होता है। इसलिए डेली अपने बच्चे के साथ कुछ क्वालिटी टाइम जरूर स्पेंड करें।
दूसरों के सामने बच्चे का मजाक न उड़ाएं
कई बार लोग हंसी-मजाक में बच्चों की कोई बात सबके सामने कह देते हैं, लेकिन आपकी यह आदत बच्चे के सेल्फ रिस्पेक्ट को ठेस पहुंचा सकती है। बच्चे बाहर से भले कुछ ना कहें, लेकिन अंदर ही अंदर उन्हें बुरा लग सकता है। इसलिए अगर किसी बात पर समझाना हो, तो अकेले में प्यार से समझाएं। सबके सामने उसे शर्मिंदा करने से बचें।
बच्चों की तुलना किसी और से न करें
हर बच्चा अलग होता है। किसी भाई-बहन, दोस्त या दूसरे बच्चे से तुलना करने पर बच्चे के मन में हीन भावना आ सकती है। उसे लगने लगता है कि वह दूसरों जितना अच्छा नहीं है। डॉ सुमित्रा मीना सलाह देती हैं कि तुलना करने की बजाय बच्चे की अपनी खूबियों को पहचानें और उसे आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करें।
बच्चे के सामने कोई भी नशा करने से बचे
बच्चे वही बातें जल्दी सीखते हैं, जो वे अपने घर में देखते हैं। अगर वे माता-पिता को स्मोकिंग, वेप या शराब पीते हुए देखते हैं, तो उन्हें यह सब नॉर्मल लग सकता है। इसलिए बच्चों के सामने ऐसी आदतों से दूर रहना बेहतर है। जब आप बच्चों के सामने अच्छा बिहेव करेंगे तो इसका असर उनके फ्यूचर पर पॉजिटिव पड़ेगा।
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