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मार्क कार्नी से ज़ुबानी जंग के बीच ट्रंप ने कनाडा के लिए कहा- ‘बिना राज्य बने फ़ायदा चाहता है’

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Source :- BBC INDIA

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  और कनाडा के पीएम मार्क कार्नी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि कनाडा ‘अमेरिका का बिना राज्य बने ही राज्य होने के फ़ायदे चाहता है.’

दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता विफल होने के बाद यह बात ट्रंप ने शुक्रवार देर रात कही.

वार्ता टूटने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी किसानों से सालों से ‘भारी टैरिफ़ वसूला जाता रहा है. साथ ही कनाडा के कई सामानों पर अमेरिका ने नए 50% टैरिफ़ लगा दिए हैं.

दरअसल, ट्रंप का यह बयान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें उन्होंने ताज़ा टैरिफ़ को ग़लत अनुमान करार देते हुए इसके मक़सद के पीछे कनाडा को ‘नुकसान पहुंचाना और बांटना’ बताया था.

कार्नी ने कहा कि वह 8 सितंबर से ट्रंप के टैरिफ़ का जवाब ‘डॉलर के बदले डॉलर’ अंदाज़ में देंगे.

इसमें स्टील, डेयरी, घरेलू उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक्स पर लगाए गए शुल्क भी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि अमेरिका और कनाडा अब एक ‘टैरिफ़ वॉर’ में हैं.

ट्रंप के बयान पर कार्नी ने क्या कहा

कनाडा के पीएम मार्क कार्नी

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कार्नी ने शनिवार को कहा, “उन्होंने बहुत ज़्यादा मांगा और बहुत कम पेशकश की. जब आप पर हमला होता है तो आप एक किस्म के युद्ध में होते हैं. हम पर हमला किया गया है.”

ट्रंप की ताज़ा टिप्पणियां, कनाडा को अमेरिका का ’51वां राज्य’ बनाने की उनके बार-बार के दावों की ही प्रतिध्वनि है.

सत्ता में लौटने के बाद से वह कई बार यह बात कह चुके हैं, जिससे कनाडा के नेताओं और लोगों में काफ़ी नाराज़गी पैदा हुई है.

व्यापार वार्ता के टूटने से दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गहरे व्यापारिक संबंधों में बड़ा बदलाव आया है और फ़िलहाल समाधान का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा है.

कार्नी ने कहा, “हम उनकी पेशकश को स्वीकार नहीं कर सकते और हम वह नहीं देंगे जो उन्होंने मांग की है.”

सप्ताह की शुरुआत में दोनों देश समझौते को लेकर काफ़ी आशावादी थे, लेकिन बातचीत उस समय टूट गई जब दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आख़िरी समय में बदलाव करने का आरोप लगाया.

अमेरिका के नए 50% टैरिफ़ कनाडा के कई सामानों पर लागू होंगे. इसके अलावा कनाडा के स्टील, एल्युमीनियम, ऑटोमोबाइल और लकड़ी पर पहले से लागू अमेरिकी टैरिफ़ भी जारी रहेंगे.

हालांकि इन टैरिफ़ का दायरा सीमित है. ये कनाडा से होने वाले करीब 20 अरब डॉलर के आयात पर लागू होंगे, जो कुल आयात का लगभग 5% है. इसमें शराब, डेयरी उत्पाद, सीमेंट, कपड़े और हॉकी के सामान शामिल हैं.

प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा कि कनाडा अपने हितों की रक्षा के लिए ‘बेमन’ जवाबी कार्रवाई कर रहा है. उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई की जानकारी आने वाले दिनों में जारी की जाएगी.

आख़िरी समय में क्यों टूटी व्यापार वार्ता?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

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विपक्षी कंज़र्वेटिव पार्टी समेत कनाडा की अन्य पार्टियों के नेताओं ने प्रधानमंत्री कार्नी का समर्थन किया है. कुछ कनाडाई प्रांतों के नेताओं ने भी उनका समर्थन किया है.

टैरिफ़, यानी दूसरे देशों से आयात होने वाले सामान पर लगाया जाने वाला कर, ट्रंप की व्यापार नीति का अहम हिस्सा रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति का तर्क है कि इससे अमेरिका में मैन्यूफ़ैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और देश में रोज़गार के अवसर पैदा होंगे.

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि टैरिफ़ से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए क़ीमतें बढ़ी हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में बाधा पहुंची है और उसे नुक़सान हुआ है.

शनिवार को कार्नी का कनाडाई लोगों के नाम पहला संबोधन था. इससे पहले उन्होंने शुक्रवार देर रात घोषणा की थी कि समझौता नहीं हो पाएगा.

उन्होंने अमेरिकियों पर ‘आख़िरी समय में बदलाव’ करने का आरोप लगाया था.

इन बदलावों को उन्होंने ‘अनुचित’ और ‘आर्थिक रूप से नुक़सान पहुंचाने वाला’ बताया था.

इस बीच, अमेरिकी वार्ताकारों ने कनाडा पर पहले से सहमत शर्तों में ‘नई मांगें जोड़ने और पीछे हटने’ का आरोप लगाया.

शनिवार को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने फ़ॉक्स न्यूज को बताया कि बातचीत फिर से शुरू करने की कोई योजना नहीं है.

उन्होंने यह भी कहा कि इस संभावित डील के तहत अमेरिका, कनाडा पर लगाए गए अपने कुछ टैरिफ़ कम करने को तैयार था.

हालांकि, कार्नी ने कहा कि अमेरिका ने ‘अस्वीकार्य’ शर्तें रखी थीं, जो बहुत ज़्यादा ‘प्रतिबंध थोपने’ वाली थीं. इनमें कनाडा की दूसरे देशों के साथ नए व्यापार समझौते करने की क्षमता पर रोक लगाना भी शामिल था.

उन्होंने इस दावे को भी ख़ारिज किया कि कनाडा ने आख़िरी समय में नई मांगें रखी थीं. उन्होंने कहा, “क्या पेशकश की जा रही थी, इसे हमने स्पष्ट किया लेकिन हमें लगातार मिले जवाबों से निराशा हुई.”

व्यापार पर असर

व्यापार

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ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने कहा कि कनाडा की दूसरे देशों के साथ व्यापार समझौते करने की क्षमता पर प्रतिबंध लगाने की अमेरिकी मांग ‘हमें आर्थिक रूप से 51वें राज्य के बराबर कर देगी.’

एबी ने कहा, “यह कनाडाई लोगों के लिए कभी स्वीकार्य नहीं था.”

कंज़र्वेटिव विपक्ष के नेता पियरे पोइलिवेयर ने भी कार्नी का समर्थन करते हुए अमेरिका के नए टैरिफ़ को ‘अनुचित’ बताया.

क्यूबेक की प्रीमियर क्रिस्टीन फ्रेचेट ने चेतावनी दी कि नए अमेरिकी टैरिफ़ के कारण नौकरियां जाने की आशंका है.

उन्होंने प्रभावित सेक्टर्स को मदद देने के लिए उपाय करने का संकल्प लिया.

अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने दोनों पक्षों से बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की. उनके तेल-समृद्ध प्रांत ने ट्रंप प्रशासन के साथ संबंध मज़बूत करने के लिए काम किया है.

यह घटनाक्रम एक साल से ज़्यादा समय से चल रही व्यापार वार्ता के बाद हुआ है.

यह वार्ता कई बार शुरू और बंद होती रही थी और हाल के हफ्तों में उस समय इसमें तेज़ी आई जब अमेरिका ने समझौते की समयसीमा तय कर दी थी और ऐसा न होने पर और टैरिफ़ लगाने की चेतावनी दी थी.

दोनों देश मेक्सिको के साथ, मौजूदा उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते (यूएसएमसीए) की अनिवार्य समीक्षा में भी शामिल थे.

इस समझौते पर ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान हस्ताक्षर किए थे. इसका मक़सद उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता 1994 की जगह लेना था.

यह समझौता कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको के बीच हर साल होने वाले 1.6 ट्रिलियन डॉलर के त्रिपक्षीय व्यापार की बुनियाद है.

इस गर्मी की शुरुआत में कनाडा और मेक्सिको ने औपचारिक रूप से यूएसएमसीए को अगले 16 सालों के लिए बढ़ाने का अनुरोध किया था. हालांकि, अमेरिका ने इसे मौजूदा स्वरूप में आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया.

शुक्रवार को व्यापार वार्ता के टूटने का उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौते पर क्या असर पड़ेगा, इस सवाल पर कार्नी ने कहा कि यह ‘निश्चित रूप से अच्छी ख़बर नहीं है.’

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS