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मेटा ग्लासेस: सार्वजनिक जगहों पर लोगों का वीडियो बनाना कितना सही?

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Source :- BBC INDIA

किसी व्यक्ति के बाएं हाथ में मेटा चश्मा है. यह काले रंग का है और इसके दोनों ओर एक-एक कैमरा दिखाई दे रहा है. व्यक्ति ने घड़ी पहनी हुई है.

इमेज स्रोत, Getty Images

यह तकनीक का नया दौर है, जिसे जल्द ही आपके आसपास की सड़क, पार्क या चौक पर देखा जा सकता है. लेकिन स्मार्ट चश्मों के भविष्य को लेकर हर कोई आशावादी नहीं है.

इन चश्मों से लोग कॉल कर सकते हैं, एआई से बिना हाथ लगाए बात कर सकते हैं और फ्रेम को छूकर फोटो और वीडियो ले सकते हैं. इसी वजह से प्राइवेसी को लेकर चिंता बढ़ रही है.

पूरे ब्रिटेन में करीब 800 पब चलाने वाली कंपनी वेदरस्पून्स ने अपने पब में इन चश्मों से वीडियो बनाने पर रोक लगा दी है. महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने भी इनके ज़रिए उत्पीड़न की आशंका जताई है.

वहीं, टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन चश्मों से बनाए गए वीडियो की लोकप्रियता बढ़ रही है. ऐसे में सार्वजनिक जगहों पर इनका इस्तेमाल किस तरह किया जाना चाहिए, इस पर बहस जारी है.

पियर्स वैलेली उन्हीं कंटेंट क्रिएटर्स में से एक हैं. पश्चिमी बेलफास्ट के बैलीमर्फी के रहने वाले 31 वर्षीय पियर्स सोशल मीडिया पर अपने काम से पैसे कमाते हैं.

वह मेटा रे-बैन के चश्मे का इस्तेमाल करते हैं, और उनके ज्यादातर वीडियो में सड़क पर चलते हुए उनके चश्मे से दिखने वाला दृश्य दिखाया गया है, जिसमें वह राहगीरों का तुकबंदी वाले वाक्यों से अभिवादन करते हैं.

बेलफास्ट शहर के केंद्र में फिल्माए गए उनके सबसे लोकप्रिय वीडियो में से एक को टिकटॉक पर 600,000 बार देखा गया.

एक आदमी ट्रैकसूट पहने और चश्मा लगाए खड़ा है.

इमेज स्रोत, Pearse Vallely

उन्होंने कहा कि इन वीडियो की कामयाबी इस बात पर निर्भर करती है कि वह लोगों से किस तरह बात करते हैं. मना करने पर उन्होंने कभी कोई वीडियो पोस्ट नहीं किया और न ही कभी किसी ने उनसे वीडियो हटाने के लिए कहा.

“मुझे लगता है कि इसकी वजह यह है कि मैं लोगों से जिस तरह बात करता हूँ. उन्हें पता होता है कि मैं उन्हें बेवकूफ़ बनाने की कोशिश नहीं कर रहा हूँ. मैं इसे अच्छे इरादे से करता हूँ.”

वैलेली जिन मेटा ग्लासेस का इस्तेमाल करते हैं, वे स्मार्ट चश्मों के बढ़ते बाज़ार में सबसे आगे हैं. कंपनी के मुताबिक़, अब तक इनके 70 लाख से ज़्यादा पेयर्स बिक चुके हैं.

मेटा ग्लासेस कैसे काम करते हैं?

कुछ सौ पाउंड में मिलने वाले इन चश्मों को मशहूर सनग्लास ब्रांड रे-बैन बनाने वाली कंपनी के साथ मिलकर तैयार किया गया है. इनमें एक छोटा कैमरा लगा है, जिसे चश्मे को छूकर चालू किया जा सकता है.

कैमरा चालू होते ही चश्मे पर सफ़ेद रोशनी जलती है. इसका मक़सद आसपास के लोगों को बताना है कि वीडियो रिकॉर्ड हो रहा है. तस्वीर लेते समय इसमें फ्लैश भी होता है. मेटा के एक प्रवक्ता ने कहा कि “स्मार्टफोन और दूसरे कैमरों में यह सुविधा नहीं है.”

मेटा ने हाल ही में चश्मों को अपडेट किया है. अब अगर कोई इस रोशनी के साथ छेड़छाड़ करता है तो कैमरा काम करना बंद कर देता है.

अगर मेटा जैसे एआई और स्मार्ट चश्मे बनाने वाली और कंपनियों के प्रोडक्ट भी लोकप्रिय होते हैं, तो शोधकर्ताओं का अनुमान है कि अगले कुछ वर्षों में करीब 10 करोड़ लोग ऐसे चश्मे खरीद सकते हैं.

वैलेली के वीडियो सहज और सामान्य बातचीत पर आधारित होते हैं. उनका कहना है कि चश्मे पर जलने वाली रोशनी से लोगों को अक्सर पता चल जाता है कि वह रिकॉर्डिंग कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अगर उन्हें समय रहते मौका मिले तो रिकॉर्डिंग के बाद वह लोगों को बताने की कोशिश करते हैं कि उनका वीडियो बनाया गया है.

उत्तरी आयरलैंड में आम तौर पर सार्वजनिक जगहों पर किसी का चुपके से वीडियो बनाना गैरकानूनी नहीं है. इसकी वजह यह है कि सार्वजनिक जगहों पर लोगों को आम तौर पर प्राइवेसी की पूरी उम्मीद नहीं होती.

हालांकि, अगर वीडियो बनाना उत्पीड़न या पीछा करने की श्रेणी में आता है, फुटेज अश्लील है या ऐसी जगह रिकॉर्डिंग की गई है जहां व्यक्ति को प्राइवेसी की उम्मीद है तो फिर इसे ग़ैर-क़ानूनी माना जाता है.

एक कांच की मेज पर तीन जोड़ी धूप के चश्मों के बगल में, एक दूसरे के ऊपर रखे हुए चार ग्रे 'मेटा रे बैन' के डिब्बे रखे हैं.

वैलेली ने कहा, “किसी से 30 सेकंड की बातचीत करना ठीक है.”

“मुझे लगता है कि तकनीक की वजह से हम यह चीज खो रहे हैं, और मैं तकनीक का इस्तेमाल करके इसे वापस पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा हूं.”

वैलेली ने कहा कि अगर लोग अशिष्ट और असभ्य व्यवहार कर रहे हैं तो मेटा चश्मा पहनने पर प्रतिबंध लगाने के पीछे के तर्क को वह समझ सकते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि फिल्मांकन के पीछे का इरादा महत्वपूर्ण है.

“लोगों को पता है कि ये मैं कर रहा हूं, जबकि दूसरे लोग ट्रोल अकाउंट से ऐसा करते हैं. चाहे कुछ भी आविष्कार हो जाए, लोग उसका गलत इस्तेमाल करेंगे ही.”

हालांकि, वैलेली का कहना है कि उन्हें कभी किसी के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिनसे पता चलता है कि इन चश्मों से वीडियो बनाने वालों और आम लोगों के बीच तनाव बढ़ रहा है.

पिछले दिसंबर में न्यूयॉर्क के एक सबवे में एक महिला ने एक व्यक्ति का मेटा चश्मा तोड़ दिया था. इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उस महिला को “हीरो” तक कहा.

जुलाई में स्कॉटलैंड की पुलिस ने एक टिकटॉकर के ख़िलाफ़ जांच शुरू की. उस पर आरोप था कि उसने इन चश्मों से आम लोगों की चुपके से वीडियो रिकॉर्ड की थी.

वेदरस्पून्स के एक प्रवक्ता ने अपने पब में इन चश्मों पर लगी पाबंदी के बारे में कहा कि स्मार्ट ग्लास “गुप्त निगरानी को संभव बनाकर सामान्य समझ के ख़िलाफ़ जाते हैं.” कॉमिक कॉन नॉर्दर्न आयरलैंड का आयोजन करने वाली कंपनी मोनोपोली इवेंट्स ने भी गुप्त रिकॉर्डिंग की चिंता के कारण अपने कार्यक्रमों में इन चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है.

इस बीच, टिकटॉक पर ऐसे वीडियो भी पोस्ट किए जा रहे हैं जिनमें लोग महिलाओं के पास जाकर उनका नंबर मांगते हैं और उनकी प्रतिक्रिया रिकॉर्ड करते हैं. ऐसे वीडियो अक्सर ‘#हाउ टू गेट गर्लफ़्रेंड’ हैशटैग के साथ शेयर किए जाते हैं और उन्हें हज़ारों व्यूज़ मिल सकते हैं.

उत्पीड़न संबंधी चिंताएँ

भूरे बालों वाली एक महिला, जिसके बाल पीछे बंधे हुए हैं, कैमरे की ओर देख रही है. उसने पीले रंग की कमीज और चांदी का हार पहना हुआ है.

महिला संसाधन और विकास एजेंसी में महिला अधिकारों की पैरवी करने वाली एलेन क्रोरी ने कहा कि लोगों को यह पता ही नहीं होता कि इन चश्मों से कब और कैसे वीडियो बनाया जा रहा है. इससे सहमति को लेकर सवाल उठते हैं.

“अभी अगर कोई कैमरे या फोन से आपका वीडियो बना रहा है तो आम तौर पर आपको पता चल जाता है. आप चाहें तो वहां से हट सकते हैं. लेकिन आपको शायद पता ही न चले कि आपका वीडियो एआई कैमरे वाले चश्मे से बनाया जा रहा है.”

उन्होंने कहा कि यह चिंता भी है कि इन चश्मों का इस्तेमाल ऐसे कामों के लिए हो सकता है जो पहले से गैरकानूनी हैं, जैसे किसी की स्कर्ट के नीचे से वीडियो बनाना.

क्रोरी ने कहा कि लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो हटाने की मांग कर सकते हैं. कुछ जगहों पर “मामले के आधार पर” ऐसे वीडियो बनाने पर रोक भी लगाई गई है. लेकिन उनका मानना है कि कानून अभी इस तकनीक के साथ कदम नहीं मिला पा रहा है.

उन्होंने कहा, “अगर किसी व्यक्ति का सड़क, बस या क्लास में वीडियो बनाया जाता है तो उसके पास इसके ख़िलाफ़ कोई कानूनी रास्ता नहीं है.”

न्याय विभाग (डीओजे) ने कहा कि मेटा ग्लासेस का नियमन सीधे उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. हालांकि, अगर इन चश्मों का इस्तेमाल किसी ऐसे काम के लिए होता है जो अपराध की श्रेणी में आता है, तो मौजूदा कानून लागू होंगे. इनमें ‘अप-स्कर्टिंग’ जैसे अपराध भी शामिल हैं, जो किसी की निजी तस्वीर या वीडियो बिना उसकी जानकारी के बनाने से जुड़े हैं.

मेटा ग्लासेस के फायदे

मोटे, काले चश्मे और नीली कमीज पहने एक गंजा आदमी दफ्तर में एक डेस्क पर बैठा है. उसके हाथ डेस्क पर हैं और उसने घड़ी पहनी हुई है.

बेलफास्ट में अपनी दुकान पर मेटा चश्मे बेचने वाले नेत्र विशेषज्ञ ज्योफ मैककॉनविले मानते हैं कि इनके “गलत इस्तेमाल” को लेकर चिंता है. लेकिन उनके मुताबिक़, इस तकनीक के कई फ़ायदे भी हैं.

वह बताते हैं कि उनके कुछ मरीज टेक्स्ट-टू-स्पीच सुविधा का इस्तेमाल करते हैं. इससे वे एआई की मदद से अख़बार और साइनबोर्ड पढ़ पाते हैं.

“मेरे बुज़ुर्ग और कम दिखाई देने वाले मरीजों के लिए ये चश्मे बेहद उपयोगी हैं. ये शानदार हैं.”

मेटा ने एक बयान में कहा कि ये चश्मे “कम दिखाई देने या सुनने में परेशानी वाले लोगों के लिए नई और अहम तकनीक मुहैया कराते हैं. इस तकनीक के इस्तेमाल पर रोक लगाना एक बड़ा कदम पीछे जाने जैसा होगा.”

कंपनी ने कहा, “कुछ जगहों पर बिल्कुल भी वीडियो नहीं बनाया जाना चाहिए और यह बात समझ में आती है. लेकिन नियमों को हर जगह एक जैसा लागू किया जाना चाहिए.”

हाल ही में एक सवाल-जवाब सेशन में इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी ने कहा कि अगर लोग ऐसा कंटेंट पोस्ट करते हैं जो “दूसरों का फ़ायदा उठाता है और उन्हें परेशान करता है”, तो इंस्टाग्राम उसे हटा देगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS