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यह तो टॉर्चर करने जैसा, मौत की सजा के लाइव टेलीकास्ट करने के फैसले पर भड़का गुस्सा

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Source :- LIVE HINDUSTAN

अमेरिकी प्रशासन के एक फैसले पर जबर्दस्त गुस्सा भड़का हुआ है। असल में अमेरिका में एक हत्यारे को सजा-ए-मौत दी गई है। वहां की सरकार ने तय किया है कि इस सजा का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा।

अमेरिकी प्रशासन के एक फैसले पर जबर्दस्त गुस्सा भड़का हुआ है। असल में अमेरिका में एक हत्यारे को सजा-ए-मौत दी गई है। वहां की सरकार ने तय किया है कि इस सजा का लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। अब यूएन में इस फैसले का विरोध हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को कहा कि मौत की सजा का लाइव टेलीकास्ट टॉर्चर जैसा है। मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने संदेश में कहा कि किसी फांसी की लाइवस्ट्रीम करना सार्वजनिक फांसी के बराबर है। यह अत्याचार पर पूर्ण प्रतिबंध का उल्लंघन होगा।

एक रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि निदाल हसन को दी जाने वाली सजा-ए-मौत की ‘लाइव-स्ट्रीमिंग’ की जाएगी। हसन ने 2009 में फोर्ट हुड में 13 निहत्थे अमेरिकी सैनिकों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। माना जा रहा है कि यह लगभग एक सदी में अमेरिका में दी जाने वाली पहली सार्वजनिक सजा-ए-मौत होगी। मौत की सजा पाए कैदियों के साथ काम करने वाले वकील जॉन मिल्स ने कहा कि इसकी लाइव-स्ट्रीमिंग का फैसला आधुनिक दौर में अभूतपूर्व है। यह कानूनी तौर पर अनिश्चित स्थिति वाला मामला है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हम यह पक्का करेंगे कि लोग इसे देख सकें, कि यह सार्वजनिक हो। लोगों को यह समझने की जरूरत है कि इस तरह की चीजों के गंभीर नतीजे होते हैं। पेंटागन ने इस हफ़्ते की शुरुआत में घोषणा की थी कि वह हसन को सजा-ए-मौत देगा, जो 60 से ज़्यादा सालों में पहली सैन्य सज़ा-ए-मौत होगी। हेगसेथ ने कंज़र्वेटिव टीवी चैनल ‘रियल अमेरिकाज़ वॉयस’ को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि हसन को “सैनिकों के फायरिंग स्क्वाड का सामना करना पड़ेगा। जैसा कि होना चाहिए।

जब हेगसेथ से पूछा गया कि क्या हसन ने कोई आखिरी गुज़ारिश की है या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया है, तो उन्होंने कहा कि कोई फ़र्क नहीं पड़ता। हम उसे 3 दिसंबर को देखेंगे। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने सोमवार को कहा था कि रक्षा मंत्री ने इसकी सिफ़ारिश की थी और ट्रंप ने इसे मंज़ूरी दे दी। बीबीसी ने व्हाइट हाउस से इस बारे में टिप्पणी मांगी है कि क्या ट्रंप लाइव-स्ट्रीम के ज़रिए सार्वजनिक रूप से मौत की सज़ा दिए जाने का समर्थन करते हैं।

हालांकि पिछले साल 17 देशों में 2,700 से ज़्यादा लोगों को मौत की सज़ा दी गई थी, लेकिन सिर्फ़ दो देशों ने ही इसे सार्वजनिक रूप से अंजाम दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, 2025 में ईरान में ग्यारह और अफ़गानिस्तान में छह लोगों को सार्वजनिक रूप से मौत की सजा दी गई थी।

अमेरिकी सेना के सचिव ने मंगलवार को बताया कि यह सजा 3 दिसंबर को टेक्सास के फोर्ट हुड में दी जाएगी। दूसरे विश्व युद्ध के बाद फायरिंग स्क्वाड से दी जाने वाली यह पहली सैन्य मौत की सजा होगी। वर्जीनिया के अमेरिकी सेना के मनोचिकित्सक हसन ने अदालत में माना कि अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए अब तक के सबसे घातक गैर-युद्ध हमले में वही बंदूकधारी था।

गोलीबारी पांच नवंबर 2009 को हुई एक भीड़-भाड़ वाली मेडिकल इमारत में हुई थी, जहां तैनात होने वाले सैनिक चेक-अप और वैक्सीन का इंतज़ार कर रहे थे। अदालत में हसन ने किसी भी गलती के लिए माफ़ी मांगी। 2013 में अपने कोर्ट मार्शल के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें लगता था कि वह मुसलमानों और अफ़गानिस्तान में तालिबान की रक्षा कर रहे थे।

सैन्य कानून के अनुसार, सैन्य मौत की सज़ा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति की मंज़ूरी ज़रूरी है। इसके लिए अपीलीय समीक्षा की भी ज़रूरत होती है, जिसमें एक उच्च न्यायालय फ़ैसले की जाँच करता है और आगे बढ़ने के लिए इसकी वैधता पर अंतिम निर्णय लेता है। मिल्स ने कहा कि हसन के लिए अपील की प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है। संभावना है कि वह अपनी सज़ा और दोषसिद्धि की समीक्षा के लिए फ़ेडरल कोर्ट में अपील करेंगे, जिससे शायद फांसी पर रोक लग सकती है। इसलिए, मिल्स ने कहा कि अगर फांसी दी जाती है तो उन्हें हैरानी होगी।

उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन का फ़ायरिंग स्क्वाड के ज़रिए फांसी को लाइवस्ट्रीम करने का विचार सिर्फ़ ध्यान खींचने की कोशिश है। इसके होने की संभावना कम है, और इससे न्याय मिलने की तो कोई उम्मीद ही नहीं है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN