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भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया है और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाक़ात की है.
श्रीनगर में मुलाक़ात के बाद साउथ और सेंट्रल एशिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर ने पत्रकारों से बातचीत की ओर कहा कि ‘यह भारत का अहम हिस्सा है.’
सर्जियो गोर ने यह बात जम्मू-कश्मीर में कही है जिसको लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा से तनाव रहा है. भारत जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न अंग मानता है. वहीं पाकिस्तान इस मामले में संयुक्त राष्ट्र के दख़ल की वकालत करता है.
5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया था. राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ में बांट दिया था.
हाल ही में ये देखा गया है कि पाकिस्तान की अमेरिका से नज़दीकियां काफ़ी बढ़ी हैं. ईरान और अमेरिका के बीच 60 दिनों का युद्धविराम कराने में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई थी.
अमेरिकी राजदूत ने क्या कहा?
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इस साल जनवरी में सर्जियो गोर ने भारत में अमेरिकी राजदूत का पद संभाला था. इसके बाद से अमेरिकी राजदूत लगातार भारत के कई राज्यों का दौरा कर चुके हैं.
जम्मू-कश्मीर गए सर्जियो गोर ने बुधवार को एक्स पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के साथ तस्वीर शेयर की.
उन्होंने लिखा, “जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिलने और उनकी प्राथमिकताओं के बारे में और जानने का मौका पाकर बहुत अच्छा लगा. हमने आर्थिक सहयोग को और मज़बूत करने और ऐसे मौके बनाने के तरीकों पर चर्चा की जिनसे दोनों देशों को फ़ायदा हो.”
इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बात की, जिस दौरान उन्होंने कहा, “यहां आकर खुशी हो रही है, जैसा कि आप जानते हैं मैं भारत में अमेरिका का राजदूत हूं. यह भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. मैं यहां पर पहली बार आया हूं.”
“यह बहुत ही ख़ूबसूरत जगह है. मैं यहां आकर बहुत ख़ुश हूं, इस जगह को देखकर बहुत ख़ुश हूं. हमारी अभी बहुत अच्छी मीटिंग हुई. हमारे कुछ फॉलो-अप्स हैं, इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि हम उन्हें वॉशिंगटन, दिल्ली वापस ले जाएंगे. लेकिन यह बहुत गर्मजोशी भरा, बहुत अच्छा रहा और हम इस रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं.”
अमेरिकी विदेश मंत्रालय अलग-अलग देशों के लिए अपने नागरिकों को ट्रैवल एडवाइज़री जारी करता है.
भारत को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की लेवल-2 की एडवाइज़री है लेकिन जम्मू-कश्मीर समेत कुछ इलाक़ों के लिए उसने लेवल-4 की एडवाइज़री जारी की हुई है.
अमेरिका ने अपने नागरिकों को कहा है कि वो आतंकवाद और नागरिक अशांति की आशंका की वजह से जम्मू-कश्मीर का दौरा न करें.
सर्जियो गोर ने इस एडवाइज़री को लेकर भी श्रीनगर में पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा, “अमेरिका ट्रैवल वॉर्निंग जारी करता है और हम समय-समय पर उन ट्रैवल वॉर्निंग को फिर से देखते हैं. मैं आज यहां कोई बड़ी घोषणा नहीं कर सकता, लेकिन यह कुछ ऐसा है जिस पर हम गौर करने वाले हैं.”
“नई दिल्ली, यहां के मुख्यमंत्री, यहां की सरकार, हमारा मानना है कि इस इलाके को सुरक्षित रखने और इसे और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ शानदार कदम उठाए गए हैं. इसलिए, हम देखेंगे कि क्या जो ट्रैवल वॉर्निंग लगाई गई है, जिसकी अमेरिका ने सिफारिश की है, उसे कम किया जाना चाहिए. यह एक खूबसूरत इलाका है, मुझे लगता है कि बहुत से अमेरिकी यहां आकर यहां की सुंदरता और मौके को देखकर खुश होंगे.”
सीएम अब्दुल्ला भी बोले
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सर्जियो गोर जब ये बयान दे रहे थे तब उनके साथ जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी पत्रकारों से बात की. उन्होंने उम्मीद जताई कि अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच बातचीत आने वाले सालों में और गहरी होगी.
उन्होंने कहा, “यह बहुत अच्छी मीटिंग थी. हमें अपने दोनों देशों के बीच रिश्तों पर बात करने का मौका मिला, लेकिन ख़ासतौर पर इस पर बात की है कि अमेरिका जम्मू-कश्मीर के साथ क्या कर सकता है. ज़ाहिर है, कुछ पुराने मुद्दे हैं जिन्हें हम समय के साथ सुलझाने की कोशिश करेंगे, लेकिन हम इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं.”
“यह बातचीत राजदूत गोर और वॉशिंगटन के बीच, और मेरे और नई दिल्ली में भारत सरकार के बीच होगी. लेकिन हमें बहुत उम्मीद है कि आने वाले सालों में अमेरिका और जम्मू-कश्मीर के बीच जुड़ाव बढ़ेगा और गहरा होगा.”
उमर अब्दुल्ला ने अपने एक्स अकाउंट पर सर्जियो गोर के साथ तस्वीरें शेयर की हैं और लिखा है, “आज श्रीनगर में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मिलकर बहुत खुशी हुई. जम्मू-कश्मीर और अमेरिका के बीच जुड़ाव को बढ़ाने और गहरा करने की संभावनाओं पर हमारी बहुत अच्छी बातचीत हुई, खासकर टूरिज्म, हॉर्टिकल्चर और नई इकॉनमी जैसे क्षेत्रों को लेकर. मैं इस जुड़ाव को जारी रखने और हमारी बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हूं.”
इस मुलाक़ात से पहले सीएम अब्दुल्ला ने पत्रकारों से कहा था कि “हमारी समस्याओं का उनसे कोई ख़ास लेना-देना नहीं है. न ये मेरी आदत रही है कि मैं अपनी शिकायत किसी दूसरे मुल्क से करूं. हमारे मसलों का हल वॉशिंगटन को नहीं करना है. हमारे मसलों का हल हमारी केंद्र सरकार को करना है. मुझे लगता है कि ये बहुत गलत बात होगी अगर मैं अपने मुल्क को लेकर कोई शिकायत किसी दूसरे मुल्क के राजदूत से करूंगा.”
सोशल मीडिया पर उठे सवाल
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सर्जियो गोर के बयान की चर्चा सोशल मीडिया पर भी है.
पत्रकार राहुल शिवशंकर ने बताया कि सर्जियो गोर ने ‘अभिन्न’ की जगह ‘महत्वपूर्ण’ शब्द का क्यों इस्तेमाल किया.
उन्होंने एक्स पर लिखा, “राजनयिक अपने शब्द बहुत ध्यान से चुनते हैं. सर्जियो गोर भारत में अमेरिका के दूत हैं. लेकिन वह इससे भी कहीं ज़्यादा हैं. वह साउथ और सेंट्रल एशियन मामलों के लिए अमेरिका के दूत हैं. इसलिए जब वह ‘महत्वपूर्ण’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो इसका मतलब और भी बहुत कुछ होता है.”
सर्जियो गोर के दौरे से पहले पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती ने एक्स पर लिखा, “अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं कि कश्मीर जाने के ख़िलाफ़ सबसे ऊंचे लेवल की ट्रैवल एडवाइज़री को रिव्यू करें और वापस ले लें.”
“कश्मीर के लिए, जहां हज़ारों परिवार टूरिज़्म पर निर्भर हैं, कश्मीर पर ट्रैवल एडवाइज़री सिर्फ़ एक चेतावनी से कहीं ज़्यादा है, यह कश्मीर और दुनिया के बीच एक दीवार है.”
“इसे हटाने से भरोसे का एक मज़बूत मैसेज जाएगा, इंटरनेशनल टूरिस्ट को वापस लाने में मदद मिलेगी और उन अनगिनत परिवारों को बहुत ज़रूरी राहत मिलेगी जिनकी रोज़ी-रोटी टूरिज़्म पर निर्भर है.”
भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने सर्जियो गोर के बयान पर कहा, “‘भारत का अहम हिस्सा’- एक स्वागत योग्य राजनीतिक पुष्टि. आसिम मुनीर और शहबाज़ शरीफ़ ने इस बात की अहमियत पर ध्यान दिया होगा. आइए देखते हैं पाकिस्तान की प्रतिक्रिया क्या होती है.”
उमर अब्दुल्ला के बैठक से पहले दिए गए बयान पर कंवल सिब्बल ने कहा, “जम्मू-कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक बोझ है. अमेरिका ने इसमें अहम भूमिका निभाई है. ट्रंप के दख़ल देने की कोशिश के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने पहले ही यह कहकर बिल्कुल सही कहा था कि वह भारत में अपने राजदूत के ज़रिए अमेरिका को हमारे देश के हित के ख़िलाफ़ कोई भी एजेंडा चलाने की जगह नहीं देंगे.”
पाकिस्तान की हो रही चर्चा
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कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान में ख़ासा तनाव रहता है. हाल में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच दोस्ताना व्यवहार की ख़ासी चर्चा रही है. सर्जियो गोर के दौरे को पाकिस्तान के लिए कुछ विश्लेषक एक झटका बता रहे हैं.
इंडो-पैसिफ़िक सॉल्यूशंस के संस्थापक और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार डेरेक जे ग्रॉसमैन ने उमर अब्दुल्ला के एक्स पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लिखा, “राजदूत गोर ने आज जम्मू-कश्मीर का दौरा किया, जो भारत के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है, लेकिन समस्या यह है कि उनके बॉस पाकिस्तान को पसंद कर सकते हैं.”
पाकिस्तान के नेता नबील गबोल ने एक्स पर लिखा, “अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का श्रीनगर दौरा कश्मीर के इतिहास और ज़मीनी हकीकत से उनकी दूरी दिखाता है. उनके बयान से पता चलता है कि संवेदनशील इलाके के दौरे से पहले ब्रीफिंग में गंभीर गड़बड़ियां थीं. जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है और यह रेज़ोल्यूशन 47, 51, 80, 91, 98, 122, 123 और 126 के तहत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडा में बना हुआ है. इसलिए राजदूत को संयुक्त राष्ट्र रिकॉर्ड और यूएनएमओजीआईपी के इतिहास को देखना चाहिए. कश्मीर के इतिहास की जानकारी न होना कूटनीति का विकल्प नहीं है.”
ऑस्ट्रियाई-बुल्गारियाई भू-राजनीतिक रणनीतिकार और राजनीतिक वैज्ञानिक वेलिना चाकारोवा ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “ईरान में मध्यस्थ की भूमिका… सऊदी अरब और तुर्की के साथ रक्षा समझौते के कारण पाकिस्तान का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ महसूस होता है. लेकिन बड़े भू-राजनीतिक खेल में वैश्विक शक्तियों की ही हमेशा आख़िरी बात होती है. इस मामले में, अमेरिका नए गठबंधनों और क्षेत्रीय भू-राजनीति में दख़ल देने के लिए भारत के साथ खड़ा दिखा.”
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