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यूपी: सपा ने एक उद्योगपति को दिया राज्यसभा सीट के लिए टिकट, क्या हैं राजनीतिक मायने

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Source :- BBC INDIA

अखिलेश यादव ने धनराज नाथवानी को टिकट देने के कदम को उद्योग जगत से जुड़ने का मौका बताया है

”समाजवादी पार्टी ने उद्योग जगत से जुड़ने के लिए धनराज नाथवानी को अपनी पार्टी से राज्यसभा सदस्य बनाने का फ़ैसला किया है.”

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यालय में आयोजित अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब उनसे हमने पूछा कि पार्टी ने धनराज नाथवानी को राज्यसभा उम्मीदवार क्यों चुना तो उनका जवाब साफ़ था.

”मुझे खुशी इस बात की है कि एक नई पीढ़ी, नई सोच के व्यक्ति को राज्यसभा भेजने का समाजवादी पार्टी को मौका मिला है. और समाजवादी पार्टी इस बदलते हुए दौर में, जहां कई दलों का बहुत दबदबा है कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कई उद्योगपति न केवल उद्योग का कारोबार कर रहे हैं या उद्योग चला रहे हैं, अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं, बल्कि समाज में भी समय-समय पर काम करते हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “इसलिए समाजवादी पार्टी ने उद्योग जगत से जुड़ने के लिए ही अपनी पार्टी से राज्यसभा का सदस्य बनाने का फ़ैसला किया है.”

उद्योग जगत और

अखिलेश यादव

हमने पूछा कि जिस इंडिया ब्लॉक का वो हिस्सा हैं और जिस पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, वह देश के दो बड़े उद्योगपतियों पर अक्सर हमलावर रहती है. ऐसे में उनके इस फ़ैसले पर सवाल उठ रहे हैं.

जवाब में अखिलेश ने कहा, “समाजवादी पार्टी का मानना है कि सरकार का रास्ता भी उद्योग और कारोबार को बढ़ावा देने से होकर जाता है इसलिए हमने ऐसे लोगों को पार्टी से जोड़ा है जो उद्योग जगत से जुड़े हैं. और जिन्हें पता है कि उद्योग कैसे लगाए जाएं और कारोबार को कैसे बढ़ावा दिया जाए. समाजवादी पार्टी प्रदेश में कारोबार और उद्योग को बढ़ाने का काम करेगी.”

”हमने उस समय भी कहा था, जब हम एक्सप्रेस-वे बना रहे थे कि अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए जो भी योगदान देगा, समाजवादी पार्टी उसका साथ लेगी. अगर कोई किसानों की आय बढ़ाने, गरीबों और नौजवानों के लिए रोजगार पैदा करने और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान देता है, तो समाजवादी पार्टी उसका सहयोग लेगी.”

धनराज नाथवानी को अखिलेश यादव ने सपा से राज्यसभा की एक सीट के लिए टिकट दिया है

हालांकि, अखिलेश यादव खुद कई मौकों पर बीजेपी सरकार पर चुनिंदा उद्योगपतियों को फ़ायदा पहुंचाने और बड़े कॉरपोरेट घरानों के पक्ष में नीतियां बनाने के आरोप लगाते रहे हैं.

लेकिन उनके इस फ़ैसले के बाद सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख से लेकर एआईएमआईएम के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष और आरएलडी पार्टी के नेता जहां अखिलेश यादव पर हमलावर हैं, वहीं बीजेपी कुछ भी बोलने से कतरा रही है.

उत्तर प्रदेश बीजेपी के एक्स हैंडल पर किए गए पोस्ट में राज्यसभा नामांकन को लेकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए पोस्ट तो नज़र आता है लेकिन इसमें कहीं भी नाथवानी की ज़िक्र नहीं मिलता.

पार्टी ने केवल परिवारवाद के मुद्दे पर अखिलेश यादव को घेरते हुए लिखा है- ” असली पीडीए का मतलब है- परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी. समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा के लिए दो सीट में से एक सीट रामगोपाल यादव को दी.”

प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव वर्तमान में भी समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं. उनका कार्यकाल इसी साल सितंबर में पूरा होने वाला था. वह प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई हैं.

वहीं, धनराज नाथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज में ग्रुप प्रेसिडेंट के पद पर कार्यरत हैं. वे एक उद्योगपति हैं और वर्तमान राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी के बेटे हैं. परिमल नाथवानी ख़ुद इस समय झारखंड से एनडीए समर्थित निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं.

राजभर का तंज- ‘पीडीए के डी का मतलब दौलतमंद’

नामांकन के दौरान धनराज नाथवानी

समाजवादी पार्टी का धनराज नाथवानी को अपना राज्यसभा उम्मीदवार चुनना कई लोगों लिए चौंकाने वाला फ़ैसला है. सोशल मीडिया पर इसकी काफ़ी चर्चा है.

अलग-अलग कयास लग रहे हैं कि आख़िर पार्टी ने किस रणनीति के तहत ये फ़ैसला लिया होगा क्योंकि इसके पहले तक संभावना जताई जा रही थी कि पीडीए का नारा देने वाली समाजवादी पार्टी दलित, पिछड़ा या अल्पसंख्यक समुदाय में से किसी को अपना उम्मीदवार बनाएगी.

इसी को आधार बनाते हुए प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर सवाल उठाया है.

उन्होंने कहा है कि अखिलेश के पीडीए में पी से परिवार यानी रामगोपाल यादव और डी से दौलतमंद यानी धनराज नाथवानी हैं.

एआईएमआईएम के स्टेट प्रेसिडेंट शौकत अली ने भी अखिलेश पर निशाना साधते हुए लिखा है, ”मुसलमान भाजपा के ख़िलाफ़ सपा को वोट दें और सपा राज्यसभा में भाजपा के लोगों को भेजे. वाह अखिलेश यादव जी सपा के मुसलमान नेता क्या दरी बिछाएंगे. भाजपा की असली टीम सपा ने खेल दिखा दिया.”

इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, ”जब अल्पसंख्यकों को अहमियत दी जाती है तब तो कोई कुछ नहीं कहता. इसी महीने पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद के नेतृत्व में बदलाव करते हुए मोहम्मद जासमीर अंसारी को नया नेता प्रतिपक्ष बनाया है. तो राज्यसभा उम्मीदवारी का फ़ैसला भी बहुत सोच-समझकर लिया गया है. किस रणनीति के तहत लिया गया है, ये हम अभी नहीं बता सकते. कुछ दिनों बाद सबको खुद पता लग जाएगा.”

क्या कहते हैं वरिष्ठ पत्रकार

धनराज परिमल नाथवानी, पीएम नरेंद्र मोदी और परिमल नाथवानी

समाजवादी पार्टी के इस फ़ैसले को कुछ लोग बीजेपी के लिए एक रणनीतिक चुनौती के तौर पर भी देख रहे हैं.

दरअसल, उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में विधायकों की मौजूदा संख्या के आधार पर बीजेपी सात और समाजवादी पार्टी दो सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि दसवीं सीट के लिए मुकाबला होता दिख रहा है.

ऐसे में धनराज नाथवानी को उम्मीदवार बनाना महज़ उद्योग जगत से जुड़ने की कोशिश है या इसके पीछे राज्यसभा चुनाव के समीकरण को साधने की भी कोई रणनीति है.

अखिलेश के इस फ़ैसले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है.

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं, ”राजनीतिक दल राज्यसभा में सिर्फ़ अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को ही नहीं भेजते. ऐसे लोग भी उम्मीदवार बनाए जाते रहे हैं जो पार्टी को चलाने, चुनावों में मदद करने या राजनीतिक और दूसरे समीकरणों को साधने में उपयोगी रहे हों.

उनके मुताबिक़, धनराज नाथवानी के मामले में उनके पिता का बीजेपी समर्थित राज्यसभा सांसद होना इसे राजनीतिक रूप से दिलचस्प ज़रूर बनाता है, लेकिन इससे अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाज़ी होगी.

वह कहते हैं, ”धनराज नाथवानी का मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनके पिता बीजेपी समर्थित सांसद हैं.’

आनंद राय के मुताबिक, ‘नाथवानी के पिता परिमल नाथवानी का झारखंड से बीजेपी समर्थित राज्यसभा सांसद होना इस फ़ैसले को राजनीतिक रूप से दिलचस्प बनाता है.’

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इससे सीधे कोई निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाज़ी होगी.’

नाथवानी के पिता परिमल नाथवानी का झारखंड से बीजेपी समर्थित राज्यसभा सांसद हैं जिसके चलते सपा के फ़ैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं

वहीं, पीडीए के सवाल पर वह कहते हैं, ”सिर्फ़ राज्यसभा उम्मीदवार के आधार पर समाजवादी पार्टी की सामाजिक प्रतिनिधित्व की राजनीति का आकलन नहीं किया जा सकता. इसकी असली परीक्षा विधानसभा चुनाव में होगी, जहां जनता सीधे उम्मीदवारों को चुनती है.”

”यह भी देखा जाएगा कि सपा दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों को कितनी राजनीतिक हिस्सेदारी देती है.”

दूसरी तरफ़ वरिष्ठ पत्रकार सुनीता ऐरन के मुताबिक़, ”आज लगभग हर राजनीतिक दल औद्योगिकीकरण, निवेश और रोज़गार की बात करता है. ऐसे में कोई भी राजनीतिक पार्टी उद्योग जगत के लिए अपने दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं कर सकती.”

उनके शब्दों में, ”उद्योगपतियों को सिर्फ़ पैसे वाले लोगों के तौर पर देखना सही नहीं है, क्योंकि किसी भी राज्य में उद्योग लगाने और रोज़गार पैदा करने के लिए उद्योग जगत के साथ संवाद और रिश्ते जरूरी होते हैं.”

वो कहती हैं कि अखिलेश यादव की राजनीति की पहचान भले ही किसानों और पीडीए के नारे से होती है, लेकिन उनके सामने अब यह सवाल भी है कि उत्तर प्रदेश में उद्योग कैसे आएं और रोज़गार कैसे पैदा हों.

इसी संदर्भ में वह अखिलेश के लोहिया के विचारों के हवाले को महत्वपूर्ण मानती हैं कि अगर समृद्धि लानी है तो उद्योग चाहिए और उद्योग के लिए उद्योगपतियों के साथ संबंध भी रखने होंगे.

सुनीता ऐरन कहती हैं, ”इसे अखिलेश यादव की आने वाले चुनावों की रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा सकता है. विधानसभा चुनाव सामने हैं और अगर समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो उद्योग जगत के साथ बेहतर रिश्ते उसके लिए उपयोगी हो सकते हैं.”

वहीं, अडानी-अंबानी को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीति के सवाल पर उनका कहना है कि किसी उद्योगपति की राजनीतिक आलोचना करना और कारोबारी तौर पर उसके साथ काम करना दो अलग बातें हैं.

उनके अनुसार, ”राहुल गांधी अडानी-अंबानी को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं, लेकिन अगर कल कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह भी उद्योग जगत से दूरी नहीं बना सकती. उद्योग और कारोबार देश की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं और सरकारों को उनके साथ काम करना ही पड़ता है.”

वह समाजवादी पार्टी के पुराने रिश्तों की ओर भी ध्यान दिलाती हैं.

उनका कहना है, ”सपा का अंबानी परिवार के साथ पहले से संपर्क रहा है और अतीत में अनिल अंबानी को समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा भेजा गया था. इसलिए अखिलेश यादव का किसी बड़े कारोबारी को राज्यसभा भेजना पूरी तरह नई बात नहीं है.”

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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SOURCE : BBC NEWS