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लग्जरी ब्रांड नहीं, हथकरघा साड़ियां क्यों पसंद करती हैं कुछ महिलाएं? मनोविज्ञान से समझें वजह

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Source :- LIVE HINDUSTAN

साड़ी को लेकर हर महिला की चॉइस अलग होती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि लग्जरी ब्रांड छोड़कर हथकरघा साड़ियां चुनने वाली महिलाओं के पीछे मनोवेज्ञानिक वजह छिपी है। 

फैशन के दौर में हर महिला की अपनी पसंद है। कुछ महिलाएं वेस्टर्न कपड़ों को पहनना पसंद करती हैं तो कुछ साड़ी में खुद को सबसे सुंदर मानती हैं। साड़ी कई वैरायटी में आती हैं। कुछ महिलाएं महंगे लग्जरी ब्रांड्स को प्राथमिकता देती हैं, तो कुछ का दिल हथकरघा साड़ियों पर आता है। वैसे तो ये एक महिला की पर्सनल चॉइस है कि वह किस तरह की साड़ी को पसंद करती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ महिलाएं महंगी डिजाइनर साड़ियों के बजाय हथकरघा साड़ियों को ही क्यों चुनती हैं? दरअसल इसके पीछे मनोवैज्ञानिक वजह है।

क्यों हथकरघा पसंद करती हैं कुछ महिलाएं?

मनोविज्ञान के अनुसार, जो महिलाएं लग्जरी ब्रांडों के बजाय हथकरघा साड़ियों को पसंद करती हैं, उनकी फैशन को लेकर सोच थोड़ी अलग हो सकती है। उनके लिए कपड़ों की कीमत और ब्रांड से ज्यादा अहम उसकी कारीगरी, परंपरा, संस्कृति और अपनी पहचान होती है। ऐसी पसंद उनके व्यक्तिगत स्टाइल, सादगी और भारतीय विरासत के प्रति जुड़ाव को भी दर्शा सकती है। जो महिलाएं हैंडलूम की ओर आकर्षित होती हैं, उनके लिए इसका आकर्षण उन खूबियों में हो सकता है जिन्हें कोई लोगो खुद से नहीं बता सकता। कपड़े की बनावट, बुनाई, रंग और यह जानकारी कि वह कपड़ा किसी क्षेत्रीय परंपरा से जुड़ा है, ये बातें उतनी ही मायने रखती हैं, जितना कि वह कपड़ा देखने में कैसा लगता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि जो महिलाएं डिजाइनर लेबल खरीदती हैं, वे अपनी अलग पहचान को कम अहमियत देती हैं। लग्जरी फैशन भी खुद को व्यक्त करने, कला की सराहना करने और अपनी निजी पहचान बनाने का एक तरीका हो सकता है। फर्क सिर्फ इतना है कि हर व्यक्ति किन चीजों को अहमियत देता है। ऐसा नहीं है कि एक विकल्प मनोवैज्ञानिक रूप से दूसरे से बेहतर है।

व्यक्ति के बारे में क्या बताते हैं कपड़े

कपड़े पहनना सिर्फ शरीर को ढकने तक सीमित नहीं होता। ये आपकी पसंद, सामाजिक स्थिति, सांस्कृतिक पहचान और उस छवि को दर्शा सकते हैं, जो आप दूसरों के सामने पेश करना चाहते हैं। फैशन स्टाइलिंग हर किसी की अलग-अलग हो सकती है। ‘फैशन, स्टाइल एंड पॉपुलर कल्चर’ में 2025 में पब्लिश्ड एक रिपोर्ट में में सात महिलाओं के साक्षात्कार के आधार पर यह पता लगाया गया कि कपड़ों की व्यक्तिगत स्टाइल, व्यक्ति की अपनी स्वयं की धारणा से कैसे जुड़ी होती है। इस स्टडीज में पाया गया कि प्रतिभागी अपने स्टाइल को खुद को व्यक्त करने, भविष्य में वे जो इंसान बनना चाहती हैं उसे दर्शाने और अपनी क्रिएटिविटी को दिखाने के रूप में देखती थीं। कपड़ों में निरंतरता और आराम का होना भी उनके लिए मायने रखता था। हालांकि यह छोटी सी स्टडी सभी महिलाओं का प्रतिनिधित्व नहीं करता, लेकिन इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कपड़ों का चुनाव इतना व्यक्तिगत क्यों हो सकता है।

क्यों पर्सनल लगती हैं हैंडलूम साड़ी?

एक हैंडलूम साड़ी के साथ ऐसी यादें भी जुड़ी हो सकती हैं, जिनका फैशन से कोई लेना-देना नहीं है।हो सकता है कि साड़ी का कोई खास बॉर्डर आपको अपनी मां की शादी की तस्वीरों की याद दिला दे। सूती साड़ी देखकर आपको अपनी दादी की याद आ जाए, जो शायद किसी आम दोपहर को तैयार हो रही थीं। बुनाई का कोई जाना-पहचाना पैटर्न आपको अपने उस पुराने शहर की याद दिला सकता है, जहां आप अब नहीं रहते। बेशक, हर हैंडलूम साड़ी के साथ कोई पारिवारिक याद जुड़ी हो, ऐसा जरूरी नहीं है। और न ही हर खरीदार का परंपरा के साथ कोई भावनात्मक जुड़ाव हो। कुछ महिलाओं को बस कपड़े का एहसास अच्छा लगता है, वे प्राकृतिक बनावट पसंद करती हैं, या उन्हें बड़े पैमाने पर बनी चीजों के मुकाबले हैंडलूम के रंग ज्यादा आकर्षक लगते हैं। कभी-कभी आपकी अपनी पसंद के लिए किसी गहरी व्याख्या की जरूरत नहीं होती।

ये आर्टिकल टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक लिखा गया है।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN