Source :- BBC INDIA

विनेश फोगाट

इमेज स्रोत, ANI

रेसलर विनेश फोगाट एशियन गेम्स ट्रायल्स के तीसरे मुक़ाबले में हार गई हैं. इसके साथ ही वह ट्रायल्स से बाहर हो गई हैं.

तीसरे मुक़ाबले में उन्हें अपने ही राज्य हरियाणा की खिलाड़ी मीनाक्षी से हार का सामना करना पड़ा. मुक़ाबले में विनेश ने 4 अंक हासिल किए, जबकि मीनाक्षी ने 6 अंक जुटाए.

इस हार के साथ विनेश फोगाट का एशियन गेम्स ट्रायल्स में सफ़र समाप्त हो गया है और वह अब ट्रायल्स से बाहर हो गई हैं.

विनेश फोगाट को एशियन गेम्स ट्रायल्स में महिलाओं की 53 किलोग्राम कैटेगरी में खेलने की इजाज़त मिली थी.

विनेश फोगाट ओलंपिक में तीन बार हिस्सा ले चुकी हैं, लेकिन मां बनने के बाद, कुश्ती प्रतिस्पर्द्धा में वापसी की विनेश की कोशिश, उतनी ही बड़ी लड़ाई में तब्दील होती जा रही है जितना मैट पर संघर्ष.

वापसी की घोषण के बाद से ही विनेश ने ख़ुद को कोर्ट, महासंघ की नीतियों, योग्यता को लेकर पैदा हुए विवादों और प्रशासनिक बाधाओं के बीच पाया.

हर समय ऐसा लगता कि एक बाधा ख़त्म हो गई तो दूसरी शुरू हो गई.

ताज़ा विवाद 30 मई को नई दिल्ली में एशियन गेम्स सेलेक्शन ट्रायल्स की सुबह शुरू हुआ. और इस तरह भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफ़आई) और देश के सबसे सफल महिला पहलवानों में से एक के बीच लंबी खींचतान में एक नया अध्याय जुड़ गया.

विनेश हरियाणा की जुलाना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक भी हैं.

इससे पहले, विनेश को डब्ल्यूएफ़आई के योग्यता मानदंडों के कारण ट्रायल्स में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था.

उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया, जिसने उन्हें इसमें हिस्सा लेने की अनुमति दे दी. डब्ल्यूएफ़आई ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी लेकिन राहत पाने में सफल नहीं हो पाया और सर्वोच्च अदालत ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को बरक़रार रखा.

जब यह क़ानूनी लड़ाई ख़त्म होने लगी, तभी एक दूसरा विवाद खड़ा हो गया.

शनिवार को क्या हुआ?

विनेश फोगाट

इमेज स्रोत, ANI

शनिवार की सुबह केडी जाधव इंडोर हॉल में रजिस्ट्रेशन के दौरान विनेश ने महिलाओं के 53 किलोग्राम भार वर्ग के ट्रायल्स में शामिल होने की कोशिश की.

उनके अनुसार, अधिकारियों ने उन्हें बताया कि 28 मई के डब्ल्यूएफ़आई सर्कुलर के अनुसार उन्हें 50 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लेने की अनुमति थी.

यही वह वज़न वर्ग था जिसमें उन्होंने पेरिस ओलंपिक में हिस्सा लिया था और उसके बाद ही खेल से संन्यास लेने की घोषणा की थी.

उनकी टीम की ओर से जारी किए गए और सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में विनेश ने इस फ़ैसले पर सवाल उठाया.

उन्होंने कहा, “महासंघ ने मुझे 28 मई का सर्कुलर नहीं भेजा है. तो यह सर्कुलर आया कहां से? मुझे 53 किलोग्राम वर्ग में ट्रायल देने की अनुमति मिलनी चाहिए.”

इस घटनाक्रम ने कुश्ती जगत के कई लोगों को हैरान कर दिया क्योंकि विनेश ने मई की शुरुआत में गोंडा में आयोजित राष्ट्रीय रैंकिंग टूर्नामेंट के लिए 53 किलोग्राम वर्ग में पंजीकरण कराया था और उसी वर्ग में वापसी की तैयारी कर रही थीं. फिर भी उन्हें टूर्नामेंट में हिस्सा लेने का मौक़ा नहीं दिया गया.

अहम बात यह है कि 53 किलोग्राम वह वर्ग है जो पेरिस ओलंपिक में उनके प्रतिस्पर्धा वाले वर्ग से अधिक वज़न का है.

विनेश ने 2018 एशियाई खेलों में 50 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था और 2014 खेलों में 48 किलोग्राम भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल किया था. उन्होंने 2022 विश्व चैंपियनशिप में 53 किलोग्राम वर्ग में भी कांस्य पदक जीता था.

इस फ़ैसले की आलोचना करने वालों में द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता कोच महावीर सिंह फोगाट भी शामिल थे, जिन्होंने विनेश और अन्य फोगाट बहनों को कुश्ती सिखाई थी.

महावीर ने सवाल किया, “डब्ल्यूएफ़आई यह कैसे तय कर सकती है कि विनेश किस भार वर्ग में प्रतिस्पर्धा करेंगी?”

“यह तय करना पहलवान का अधिकार है कि वह किस भार वर्ग में खेलना चाहती है. अगर वह 53 किलोग्राम भार वर्ग में खेलना चाहती हैं, तो उन्हें इसकी अनुमति मिलनी चाहिए. इसके अलावा आख़िरी समय में वज़न कम करना न तो व्यावहारिक है और न ही उचित. यह सब विनेश पर बेवजह मानसिक दबाव बना रहा है.”

क्या ये भार वर्ग का मुद्दा था?

विनेश फोगाट

इमेज स्रोत, ANI

महावीर के लिए यह मुद्दा सिर्फ़ भार वर्ग का नहीं है.

उन्होंने कहा, “इस समय एक पहलवान का ध्यान ट्रायल्स पर होना चाहिए. इसके बजाय उन्हें प्रशासनिक मुद्दों से जूझने के लिए मजबूर किया जा रहा है.”

“ऐसा दबाव मानसिक एकाग्रता को प्रभावित करता है और महत्वपूर्ण मुक़ाबलों में मानसिक एकाग्रता बेहद ज़रूरी होती है.”

महासंघ की आलोचना करते हुए उन्होंने और भी साफ़ शब्दों में कहा, “भारतीय कुश्ती महासंघ विनेश की मैट पर वापसी में बेवजह रुकावटें पैदा कर रहा है.”

“कुश्ती में उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें बहुत पहले ही ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति मिल जानी चाहिए थी. इसके बजाय महासंघ मनमानी दिखा रहा है.”

करीब दो घंटे तक चली अनिश्चितता और कार्यवाही में देरी के बाद डब्ल्यूएफ़आई ने आख़िरकार विनेश को उनकी पसंद के 53 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दे दी.

एक बयान में महासंघ ने कहा, “एशियाई खेल सेलेक्शन ट्रायल्स के स्वीकृत कार्यक्रम के अनुसार महिला 53 किलोग्राम भार वर्ग समेत सभी भार वर्गों का वज़न, इंदिरा गांधी स्टेडियम, नई दिल्ली में कराया गया.”

“विनेश फोगाट सहित सभी पात्र पहलवान वज़न के लिए हाज़िर हुए और ज़रूरी औपचारिकताएं पूरी कीं. इसके अनुसार निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले सभी योग्य पहलवानों को सेलेक्शन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दे दी गई है.”

विवाद की पृष्ठभूमि

विनेश फोगाट

इमेज स्रोत, ANI

हालांकि यह विवाद यूं ही नहीं उभरा.

यह एक के बाद एक हुई कई घटनाओं की पृष्ठभूमि में सामने आया है जिसने विनेश के समर्थकों के बीच संदेह को और बढ़ाया है.

दिसंबर 2025 में इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी (आईटीए) ने बताया था कि विनेश एक प्रतियोगिता से बाहर होने वाली डोपिंग जांच में ग़ैर मौजूद रहीं.

इससे संकेत मिला कि डोपिंग रोधी एजेंसियों को उनकी वापसी की योजनाओं की जानकारी पहले से थी.

दो महीने बाद डब्ल्यूएफ़आई ने एशियाई खेलों के लिए अपनी सेलेक्शन पॉलिसी की घोषणा की, जिसमें योग्यता को कुछ निर्धारित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के पदक विजेताओं तक सीमित कर दिया गया.

आलोचकों का कहना है कि ऐसी नीतियों की घोषणा आमतौर पर काफ़ी पहले कर दी जाती है ताकि खिलाड़ियों को अपनी योजनाएं बनाने का समय मिल सके.

चूंकि विनेश संन्यास और उसके बाद मातृत्व के कारण खेलों से दूर थीं, इसलिए यह नीति उन्हें नुक़सान वाली स्थिति में ले गई.

मामला तब और विवादित हो गया जब उन्हें गोंडा में राष्ट्रीय रैंकिंग टूर्नामेंट में हिस्सा लेने से रोक दिया गया.

हालांकि बाद में उन्होंने क़ानूनी हस्तक्षेप के ज़रिये एशियाई गेम्स ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति हासिल कर ली, लेकिन उनके भार वर्ग को लेकर बनी अनिश्चितता ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया.

पूर्व राष्ट्रीय कोच और डब्ल्यूएफ़आई की पूर्व कार्यकारिणी के सदस्य पीआर सोंढी का मानना है कि इस स्थिति का असर सिर्फ़ एक खिलाड़ी तक सीमित नहीं है.

सोंढी ने कहा, “अगर विनेश सफल वापसी करती हैं, तो इससे और अधिक लड़कियां खेलों को गंभीरता से अपनाने और शादी और मातृत्व के बाद भी अपना करियर जारी रखने के लिए प्रेरित होंगी.”

उन्होंने कहा, “मौजूदा अव्यवस्था और जिस तरह विनेश को प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से रोका जा रहा है, उससे डब्ल्यूएफ़आई की छवि ख़राब हो रही है और भारतीय कुश्ती की बेवजह नकारात्मक तस्वीर बन रही है.”

स्पष्ट नीति का अभाव

विनेश फोगाट

इमेज स्रोत, ANI

इस विवाद ने भारतीय खेलों की एक बड़ी समस्या को भी सामने ला दिया है और वह है- बच्चे के जन्म के बाद वापसी करने वाली शीर्ष खिलाड़ियों के लिए व्यवस्थित नीति का अभाव.

कई देशों में महिला खिलाड़ियों को मातृत्व अवकाश के बाद रैंकिंग सुरक्षा, क्वालिफ़िकेशन में लचीलापन और संस्थागत सहयोग दिया जाता है.

लेकिन भारत में खिलाड़ियों को अक्सर अपनी पुरानी उपलब्धियों की परवाह किए बिना शुरुआत से अपना करियर दोबारा बनाना पड़ता है.

विनेश के लिए यह वापसी अब सिर्फ़ कुश्ती तक सीमित नहीं रह गई है.

2024 पेरिस ओलंपिक की निराशा के बाद संन्यास से लौटने और जुलाई 2025 में मां बनने के बाद उन्हें मैट पर कदम रखने से पहले ही महासंघ के नियमों, क़ानूनी कार्यवाहियों और बार-बार उठे योग्यता विवादों से गुज़रना पड़ा है.

ये घटनाक्रम नियमों के सामान्य पालन का हिस्सा हैं या फिर बेवजह पैदा की गई बाधाएं, इस पर बहस हो सकती है.

लेकिन इसमें कोई विवाद नहीं है कि विनेश की वापसी अब सिर्फ़ उनकी कुश्ती क्षमता की परीक्षा नहीं रह गई है, बल्कि उस व्यवस्था से जूझने की भी कसौटी बन गई है जिसे कई लोग उनकी राह को ज़रूरत से कहीं ज़्यादा मुश्किल बनाने वाला मानते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

SOURCE : BBC NEWS