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शी जिनपिंग और महान देश चीन को जीत पर बधाई, जन्मजात नागरिकता पर फैसले के बाद ट्रंप का तंज

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Source :- LIVE HINDUSTAN

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत के फैसले में कहा कि नागरिकता, तब भी और अब भी अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में शामिल होने का अधिकार है। 14वें संशोधन को बनाने वालों ने इस देश में पैदा हुए हर व्यक्ति से यह वादा किया था।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जन्मजात नागरिकता को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट करके तंज कसते हुए चीन को बधाई भी दी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं राष्ट्रपति शी जिनपिंग और महान देश चीन को उनकी बर्थराइट सिटिजनशिप पर बड़ी जीत के लिए बधाई देना चाहता हूं।” साथ ही, उन्होंने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले पर निराशा जताई, जिसमें जन्मजात नागरिकता के सिद्धांत को बरकरार रखा गया। ट्रंप ने कहा कि यह अमेरिका के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसे कांग्रेस के जरिए कानून बनाकर बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए किसी लंबे और जटिल संवैधानिक संशोधन की जरूरत नहीं होगी।

डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस से अपील की कि वह आज से ही जन्मजात नागरिकता को समाप्त करने के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करे। उन्होंने इसे अमेरिका के लिए महंगा और अनुचित कदम बताया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर वह कांग्रेस को अपना पूरा समर्थन देंगे। ट्रंप का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की कानूनी प्रक्रिया के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस कानून बनाकर इस व्यवस्था में बदलाव कर सकती है। उन्होंने विश्वास जताया कि राष्ट्रपति के समर्थन के साथ आवश्यक कानून पारित कर जन्मजात नागरिकता की व्यवस्था को समाप्त किया जा सकता है।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बहुमत से दिए फैसले में जन्म के आधार पर नागरिकता मिलने के व्यापक सिद्धांत को बरकरार रखा। इसके साथ ही अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि जो लोग अमेरिका में गैर-कानूनी या अस्थायी तौर पर रह रहे हैं, उनके बच्चों को अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। न्यायाधीशों ने संविधान के 14वें संशोधन (जिसे गृह युद्ध के बाद अपनाया गया था) की लंबे समय से लागू व्याख्या और हाल के संघीय कानूनों के आधार पर यह फैसला सुनाया। इसमें कहा गया कि देश में पैदा होने वाला कोई भी व्यक्ति (कुछ बहुत ही सीमित अपवादों को छोड़कर) नागरिक होता है।

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत के फैसले में कहा कि नागरिकता, तब भी और अब भी अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में शामिल होने का अधिकार है। 14वें संशोधन को बनाने वालों ने इस देश में पैदा हुए हर व्यक्ति से यह वादा किया था। उन्होंने संविधान संशोधन के लिए कांग्रेस में हुई बहस का जिक्र करते हुए कहा, ‘हम आज भी उस वादे को बरकरार रख रहे हैं।’ ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि अवैध प्रवासियों और पर्यटकों या विदेशी छात्रों जैसे अस्थायी आगंतुकों के यहां पैदा होने वाले बच्चे 14वें संशोधन के तहत नागरिकता के पात्र नहीं हैं। इस संशोधन को गृहयुद्ध के बाद पूर्व दासों और उनके वंशजों की स्थिति को ठीक करने के लिए लागू किया गया था।

SOURCE : LIVE HINDUSTAN